अमेरिका के साथ ट्रेड डील फाइनल… विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समझाया, इस समझौते से भारत को असली फायदा कैसे मिलेगा
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है. जिससे भारतीय निर्यात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. इस डील की वर्तमान स्थिति पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ी जानकारी साझा की है.
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भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिका दौरे के समापन के बाद इस बात के स्पष्ट संकेत मिले हैं कि दोनों देश बहुत जल्द इस समझौते की बारीकियों को अंतिम रूप देने वाले हैं. इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल बीते महीनों का व्यापारिक तनाव कम होगा, बल्कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग का नया अध्याय भी शुरू होगा.
इस प्रस्तावित समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती है. बीते कुछ समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में अभूतपूर्व तनाव देखने को मिला था, जिसके चलते कई भारतीय वस्तुओं पर प्रभावी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था. इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगा था. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि भारतीय सामानों पर अब केवल 18 प्रतिशत शुल्क लागू होगा.
रोजगार और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह टैरिफ कटौती भारतीय निर्यात के लिए संजीवनी साबित होगी. उनका कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी और लंबे समय से रुके हुए ऑर्डर फिर से गति पकड़ेंगे. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, शुल्क में इस कमी का सीधा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होता है. रत्न-आभूषण, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे. इन उद्योगों में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं और निर्यात बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह समझौता भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देगा और आम लोगों की आय पर भी सकारात्मक असर डालेगा.
उच्च स्तर पर बनी सहमति
अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ विस्तृत चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौते के तकनीकी पहलुओं को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच मजबूत सहमति और सकारात्मक माहौल साफ नजर आ रहा है. इसके साथ ही एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि व्यापार के अलावा खनिज सहयोग, रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है.
क्रिटिकल मिनरल्स और रणनीतिक साझेदारी
व्यापार के साथ-साथ दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. लिथियम, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना भारत और अमेरिका दोनों की रणनीतिक प्राथमिकता है. इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में इन खनिजों की अहम भूमिका को देखते हुए आने वाले समय में इस सहयोग के और गहराने की उम्मीद है. हालांकि अमेरिका ने अपने बाजार को और खोलने के लिए भारत पर दबाव बनाया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भारतीय वार्ताकारों ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित की है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क को पूरी तरह शून्य करना फिलहाल संभव नहीं है, ताकि देश के किसानों और स्थानीय उत्पादकों के हितों की रक्षा की जा सके.
बहरहाल, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए एक संतुलित और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है. इससे जहां भारतीय निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी.
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