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होर्मुज खोलने के लिए UN में घमासान- अरब देशों की मांग पर रूस-चीन और फ्रांस ने फेरा पानी, मुश्किल में फंसे ट्रंप!

संयुक्त राष्ट्र (UN) में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य कार्रवाई के अरब देशों के प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर खारिज कर दिया.

Image Source: IANS
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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर रूस का रुख हमेशा से ही ईरान के समर्थन में रहा है. खासतौर से रूस इस मामले में अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ रहा है. होर्मुज के बंद रहने से कई देशों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत देशों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन करने के लिए सभी जरूरी बचाव के तरीके इस्तेमाल करने का अधिकार होगा. हालांकि, रूस ने इस प्रस्ताव को पहले ही वीटो कर दिया है. इन सबके बीच सवाल ये उठता है कि यूएन में इस प्रस्ताव को पास ना किए जाने के बाद क्या अमेरिका होर्मुज में अपनी ताकत का इस्तेमाल करेगा?

UN की मंजूरी के बिना अमेरिकी सैन्य कार्रवाई मुश्किल

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बिना, अमेरिका के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चुनौतीपूर्ण होगा. रूस और चीन पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं कि वे किसी भी एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप को अवैध मानेंगे. हालांकि, अमेरिका ऐतिहासिक रूप से 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' के नाम पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने हितों की रक्षा के लिए अकेले कदम उठाता रहा है.

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रूस के वीटो के बाद बढ़ा तनाव

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बहरीन के प्रस्ताव पर यूएन में रूस के वीटो के बाद अमेरिका संभवतः अपने सहयोगी देशों को होर्मुज स्ट्रेट में सैनिकों की तैनाती और कार्रवाई के लिए मना सकता है. हालांकि, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों ने शुरुआत से ही होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत भेजने या किसी भी तरह से अपनी ताकत को इस संघर्ष में झोकने से इनकार कर दिया है.

फ्रांस ने युद्ध के लिए अमेरिका को घेरा

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फ्रांस का कहना है कि यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया है, इसलिए उसे खुद इस मामले से उलझना चाहिए. अमेरिका के लिए इस वक्त स्थिति काफी गंभीर बने हुए हैं. एक तरफ तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से यूएस पर वैश्विक दबाव बन रहा है. दूसरी तरफ ट्रंप सरकार के लिए पीछे हटना इस संघर्ष में हार मानने जैसा है.

ट्रंप सरकार पर कांग्रेस की सहमति के बिना ईरान पर हमले का आरोप

अमेरिका तमाम रोकथाम के बावजूद भी ईरान के खिलाफ हमले जारी रखे हुए है. अमेरिका में किसी भी देश पर हमला करने से पहले कांग्रेस में इसपर चर्चा की जाती है और उसपर सहमति बनने के बाद ही अमेरिकी किसी देश पर हमला कर सकता है. अमेरिकी कांग्रेस में ये आरोप लगाए गए कि ट्रंप सरकार ने ईरान पर हमला करने से पहले सीनेट में इस बात को नहीं रखा.

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बिना सहमती सैनिक तैनाती पर बिगड़ेगा वैश्विक कानून

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ट्रंप सरकार ने अब तक कानून की अनदेखी करते हुए अब तक वही किया, जो उन्हें करना था. ऐसे में बहरीन के प्रस्ताव पर सहमति ना बनने के बाद भी अगर यूएस होर्मुज में सैनिक भेजता है, तो यह सीधे तौर पर यूएन की प्रभावशीलता पर प्रश्न चिन्ह लगा देगा. यूएन चार्टर के हिसाब से अगर अमेरिका सैनिक भेजता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा.

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