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'भारत से रिश्ते सबसे ऊपर', सीमा विवाद के बीच दिल्ली में नेपाली विदेश मंत्री का बयान, जयशंकर बोले-अब बदलाव का मौका

सीमा विवाद पर नेपाली पीएम बालेन शाह के बयान के बीच नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल का एक उच्च स्तरीय दिल्ली दौरा हुआ है. इस दौरान खनाल ने कहा कि भारत के साथ संबंध हमारे लिए सबसे ऊपर हैं. उन्होंने आगे कहा कि नेपाल पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर नई और ठोस शुरुआत करना चाहता है.

Nepal FM Meeting S Jaishankar (Image: S Jaishankar/ X)
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भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बड़ा दांव चला है. दिल्ली पहुंचे नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के साथ शनिवार को हुई बैठक में जयशंकर ने साफ कहा कि दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का यही सही मौका है. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के हालिया विवादित बयान के बाद इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है.

नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने और सीमा विवाद को लेकर बने गतिरोध के बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की एक उच्च स्तरीय मुलाकात हुई है. इस दौरान जहां विदेश मंत्री जयशंकर ने नेपाल के साथ रिश्तों को बेहद खास बताया बल्कि इसके और प्रगाढ़ करने, नए सिरे से शुरू करने और रिश्तों में कड़वाहट को पूरी तरह बदलने वाला मौका करार दिया.

नेपाल के लिए भारत के साथ रिश्ते सबसे ऊपर: शिशिर खनाल

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इस दौरान नेपाली विदेश मंत्री ने भारत को खास पार्टनर करार दिया. खनाल ने आगे कहा कि नेपाल भारत के साथ रिश्तों को बेहद महत्व देता है और सबसे ऊपर रखता है. इस दौरान नेपाली विदेश मंत्री का भारत के साथ संबंधों को लेकर काफी सकारत्मक रहा.

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खनाल ने इस दौरान भारत को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनकी सरकार बिना किसी पुराने बैगेज (पुरानी कड़वाहट) के आगे बढ़ने के लिए तैयार है. इतना ही नहीं खनाल ने भरोसा दिया कि नेपाल भारत के साथ मिलकर एक मजबूत व पारदर्शी रिश्ते की नई शुरुआत करना चाहता है.

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सीमा विवाद के बीच नेपाली विदेश मंत्री का हुआ भारत दौरा

आपको बता दें कि नेपाली विदेश मंत्री का ये भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब नेपाली पीएम बालेन शाह ने दावा किया था कि भारत ही नहीं, नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है. इसको लेकर उन्होंने पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन से मदद मांगी थी. इस पर भारत ने त्वरित और कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. भारत ने अपनी विदेश नीति का हवाला देते हुए कहा था कि वो किसी तीसरे देश की मध्यस्थता और दखल को कभी नहीं स्वीकार करेगा, दोनों देश आपस में मिलकर ही इस मुद्दे को सुलझाएंगे. इन सबके बीच खनाल का दिल्ली दौरे पर आना अपने आप में अहम हो जाता है.

भारत ने नेपाल को सौंपी कई परियोजनाएं

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नेपाली विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत नेपाल को 72 स्वास्थ्य सुविधाएं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाएं वर्चुअली सौंपीं.

मीटिंग के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के साथ अच्छी मीटिंग के बाद, 2015 के भूकंप के बाद रिकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम के तहत 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 कल्चरल हेरिटेज प्रोजेक्ट वर्चुअली सौंपे गए." उन्होंने कहा, "क्रॉस-बॉर्डर पर्सनल रेमिटेंस को आसान बनाने के लिए यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) भारत और नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस ऑफ नेपाल के बीच मिलकर लिंकेज लॉन्च किया गया."

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नेपाल के विदेश मंत्री खनाल की NSA डोभाल से भी हुई मुलाकात

विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूर्व नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल की भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात हुई. दोनों नेताओं ने कनेक्टिविटी, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.


नेपाली मीडिया 'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, विदेश मंत्री खनल ने कहा कि मौजूदा नेतृत्व पुरानी राजनीतिक जिम्मेदारियों से आजाद है और नई सरकार भारत के साथ वर्षों की राजनीतिक खींचतान को खत्म करने के लिए तैयार है ताकि प्रैक्टिकल सोच, ऐसे नतीजे जिन्हें मापा जा सके और आपसी विकास पर आधारित संबंध बनाया जा सके. आफको बता दें कि NSA डोभाल के साथ मुलाकत के बाद खनाल ने भारत को खास पार्टनर और एक आर्थिक महाशक्ति करार दिया.

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दोनों देशों के बीच हुए कई समझौते

दोनों नेताओं ने नेपाल के लिए 'वॉयस फर्स्ट' लैंग्वेज ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म के लिए नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलकर बनाने के लिए डिजिटल इंडिया भाषानी और काठमांडू यूनिवर्सिटी के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) एक्सचेंज किया. विदेश मंत्री ने दोनों देशों के लोगों की आपसी तरक्की, खुशहाली और भलाई के लिए नेपाल के साथ काम करने का भारत का वादा भी दोहराया. 

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नेताओं ने भारत-नेपाल साझेदारी पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें विकास सहयोग, जुड़ाव, ऊर्जा, खासकर हाइड्रोपावर डेवलपमेंट, शिक्षा, स्वास्थ्य, कैपेसिटी बिल्डिंग, डिजिटल, कल्चर और स्पोर्ट्स शामिल थे.

भारत एक ऊभरती, तेज, टेक और आर्थिक महाशक्ति: खनाल

वहीं नेपाली विदेश मंत्री ने अपने ताजा बयान में कहा कि, "हम 20वीं सदी की जियोपॉलिटिक्स (भू-राजनीति) के टेढ़े-मेढ़े और बहुत ज़्यादा संवेदनशील नज़रिए से भारत को नहीं देखना चाहते. इसके बजाय, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेपाल-भारत संबंधों की पूरी सोच को जियोपॉलिटिकल टकराव से हटाकर विकास और कूटनीति पर मज़बूती से केंद्रित करना चाहती है. हम भारत को खुले दिल, साफ़ नज़रिए और एक ही साफ़ एजेंडे के साथ देखते हैं: नेपाल का आर्थिक बदलाव. जब हम सीमा के उस पार देखते हैं, तो हमें एक उभरता हुआ भारत दिखता है—एक ऐसा भारत जिसने ग्लोबल मंच पर खुद को एक गतिशील, तेज़ी से बढ़ती टेक और आर्थिक महाशक्ति के तौर पर बुनियादी और शानदार ढंग से नए सिरे से पेश किया है. हम ज़बरदस्त महत्वाकांक्षा, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और लगातार काम करने की क्षमता वाले इस भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं. बदले में, हम महत्वाकांक्षी नेपाल की ऊर्जा लेकर आते हैं. हमारी मुख्य ज़िम्मेदारी कागज़ पर किए गए पुराने वादों और ज़मीन पर असल में हुए कामों के बीच के अंतर को खत्म करना है, ताकि सिर्फ़ राजनीतिक बयानों से आगे बढ़कर ऐसे नतीजे दिए जा सकें जिन्हें मापा जा सके और जिनसे लोगों की ज़िंदगी बदल सके."

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नेपाल और भारत के बीच खास रिश्ता: जयशंकर

खनल के साथ मीटिंग के दौरान अपनी शुरुआती बातों में, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "भारत और नेपाल के बीच बहुत खास रिश्ता है, जो लोगों के बीच अच्छे संबंधों, बॉर्डर पार कनेक्शन और साझा सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर बना है. यह साझा भरोसे, अच्छी भावना और आपसी फायदे पर टिका है. हमारे आपसी व्यापार संबंध, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा, डिजास्टर रिस्पॉन्स और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़े हैं."

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उन्होंने कहा, "आज हमारे पास इसे कई दूसरे क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने का मौका है, जैसे स्टार्टअप, एआई, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और दूसरे नए डोमेन में. हम अपने लंबे और खास तौर पर खुले बॉर्डर पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं."

दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही एकता पर जोर देते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में चल रहे संकट के बीच नेपाल को बिना रुकावट फ्यूल सप्लाई सुनिश्चित किया है.

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उन्होंने कहा कि नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रमुख रबी लामिछाने के हाल के भारत दौरे के दौरान संबंधों को दी जाने वाली अहमियत दिखी है. विदेश मंत्री ने कहा, "मैं इस मौके पर आपकी सरकार की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं. आपकी सरकार के बताए गए मकसद और पड़ोस में भारत की पहल के बीच मजबूत तालमेल है."

नेपाल-भारत संबंधों में पूरी तरह बदलाव का मौका

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-नेपाल संबंधों की दिशा को पूरी तरह बदलने और मजबूत सहयोग के जरिए उनकी पूरी क्षमता को समझने का एक साफ मौका है.

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उन्होंने कहा, “मैं आज बहुत साफ और मजबूती से सहयोग और समन्वय का मैसेज देना चाहता हूं. हमारा मानना ​​है कि आज भारत-नेपाल संबंधों की दिशा को पूरी तरह बदलने और हमारे संबंधों की पूरी क्षमता को समझने का एक मौका है. मुझे यकीन है कि आज हमारी बातचीत हमें इस मकसद की ओर बढ़ने में मदद करेगी.”

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अपनी बात खत्म करते हुए विदेश मंत्री ने दोनों देशों की आपसी तरक्की, खुशहाली और भलाई के लिए आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नेपाल के साथ काम करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दोहराया.

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