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‘परमाणु हथियार हराम…’, दिल्ली में ईरानी दूत के एक ऐलान ने बदला पश्चिम एशिया का माहौल, दुनिया को दिया शांति का संदेश

ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने साफ तौर पर कहा है कि इस्लाम में परमाणु हथियार बनाना या रखना ‘हराम’ है. मजीद हकीम इलाही के इस बयान को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक साकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

Image Source: PC-IANS
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ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ता दिख रहा है. ट्रंप लगातार ईरान पर हमला करने की धमकी दे रहे हैं. वहीं ईरान भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए खुद को तैयार बता रहा है. इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल मजीद इलाही के एक बयान की खूब चर्चा हो रही है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस भी छेड़ दी है. दरअसल,वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सूरत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहता, क्योंकि इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार इनका निर्माण और भंडारण 'हराम' है.

सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने क्या कहा?

डॉ. इलाही ने दोहराया कि ईरान का यह स्टैंड कोई नया नहीं है. उन्होंने कहा, ‘करीब 30 साल पहले ही हमने वैश्विक मंच पर साफ और स्पष्ट रूप से ऐलान कर दिया था कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते. परमाणु हथियारों का उपयोग और उन्हें अपने पास रखना इस्लाम के विरुद्ध है. इसी कारण हमारी इन हथियारों में न कभी रुचि थी और न आज है’.

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तनाव कम करने के लिए अमेरिका-ईरान वार्ता

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ईरानी प्रतिनिधि का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन, तेल अवीव और पश्चिमी देशों के साथ तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. हाल के दिनों में अमेरिका और तेहरान के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा

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इस बीच, 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट ने वैश्विक हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक उभरते समझौते पर सहमति बनती दिख रही है, जिसके तहत ईरान अपने पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भंडार कई परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता था।

यूरेनियम को लेकर ट्रंप ने ईरान को दी धमकी

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने खुली चेतावनी दी थी कि अगर यूरेनियम के मुद्दे पर बात नहीं बनी, तो सैन्य विकल्प खुला है. वहीं दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच युद्धविराम और तनाव को नियंत्रित करने के लिए भी बातचीत जारी है. ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. 

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ईरान के बयान से शांति की नई उम्मीद

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जानकारों का मानना है कि डॉ. हकीम इलाही का यह बयान पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है. यह उन देशों के लिए भी राहत की खबर है जो लंबे समय से ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर आशंकित थे. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के नतीजों पर टिकी हैं. अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव साबित हो सकता है.

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