Advertisement

मोदी-नेतन्याहू की यारी, पाकिस्तान पर पड़ी भारी! इजरायल से ‘आयरन डोम’ की डील ने उड़ा दी इस्लामाबाद की नींद

पीएम मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि इन दोनों नेताओं के बीच हुए समझौतों से पश्चिमी एशिया की राजनीति में बदलाव हो सकता है.

पीएम मोदी को इजरायल दौरे पर वहां का सर्वोच्च सम्मान दिया गया. पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच संबंध और मजबूत हुआ है. वहीं भारत-इजरायल के बीच इस दोस्ती को देखकर पाकिस्तान को झटका लगा है. पाकिस्तान की घबराहट उसके हालिया प्रस्ताव में साफ दिखाई दे रही है. दरअसल, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत और दूसरे देशों के साथ क्षेत्रीय गठबंधन बनाने के बारे में बताया, जिसका नाम हेक्सागन अलायंस होगा. पाकिस्तान को पीएम नेतन्याहू की ये बात चुभ रही है. तभी तो पाकिस्तान ने इजरायली प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है.

MoU पर हुए हस्ताक्षर

भारत और इजरायल रक्षा, व्यापार और सुरक्षा क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं. भारत और इजरायल ने एक सुरक्षा एमओयू पर भी हस्ताक्षर किया है जो भारत में हथियार की व्यवस्था को एक साथ विकसित करने पर फोकस है. यह समझौता आयरन डोम को भारत में इजरायल के सहयोग से विकसित करने पर हुआ है. आपको बता दें कि, जुलाई 2017 में पीएम मोदी के इजरायल के पहले दौरे के दौरान भारत के इजरायल के साथ संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ गए थे. हाल के दौरे से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हुए हैं. पीएम मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच भरोसे ने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों में और योगदान दिया है.

भारत-इजरायल दोस्ती से पाकिस्तान की उड़ी नींद

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और इजरायल के बीच संबंध में मजबूती पाकिस्तान के परेशान और डरे होने की वजह है. 17 जून, 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान, भारतीय एयर फोर्स के मिराज-2000 ने द्रास और बटालिक सेक्टर में पाकिस्तान के घुसपैठियों को टारगेट किया था. इस दौरान लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल करके टारगेट पर निशाना लगाया गया था. इसके लिए भारतीय मिराज पर इजरायली लाइटनिंग पॉड्स का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा, बालाकोट में ऑपरेशन बंदर और ऑपरेशन सिंदूर दोनों के दौरान भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती देखी गई.

दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर हुए नए MoU

भारत ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी कैंपों को उड़ाने के लिए इजरायली लोइटरिंग एम्युनिशन, लेजर गाइडेड बम और गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया था. कारगिल युद्ध के दिनों से, भारत हेरॉन-टीओ और सर्चर मार्क 11 जैसे इजरायली ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. भारत में हथियार सिस्टम को मिलकर विकसित करने के लिए दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए नए एमओयू ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है. पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि इसी वजह से नेतन्याहू के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ. 

‘भारत-इजरायल साझेदारी पाकिस्तान विरोधी है’

प्रस्ताव में भारत-इजरायल और दूसरे देशों के बीच तालमेल को इलाके की शांति और दुनिया भर में स्थिरता के लिए खतरा बताया गया. इजरायल पर मुस्लिम-बहुल देशों को अलग-थलग करने के मकसद से गुट बनाने का आरोप है. भारत और इजरायल के बीच नजदीकी ना केवल पाकिस्तानी संसद, बल्कि वहां की मीडिया के प्राइम टाइम में भी चर्चा का विषय था. प्राइम टाइम की बहस भारत-इजरायल साझेदारी पर केंद्रित थी. शो में आए मेहमान पाक-चीन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन मुशाहिद हुसैन सैयद और पूर्व डिप्लोमैट मलीहा लोधी ने दोनों देशों के बीच इस साझेदारी की आलोचना की. उनका कहना है कि इस गठबंधन का मकसद चीन और पाकिस्तान को तोड़ना है. इसके अलावा यह भी कहा गया कि भारत-इजरायल साझेदारी मुस्लिम विरोधी और पाकिस्तान विरोधी है.

‘पाकिस्तान का दोगलापन फिर आया सामने’

पाकिस्तान में भारत-इजरायल की साझेदारी को लेकर हुए इस हलचल पर एक अधिकारी ने कहा कि यह पाकिस्तान के दोगलेपन को साफ तौर पर दिखाता है. एक तरफ तो यह भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की आलोचना करता है, वहीं दूसरी तरफ हमास जैसे आतंकवादी संगठन का समर्थन करता है. एक और अधिकारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान का दोगलापन सामने आता है. हालांकि भारत की इज़रायल और रूस जैसे दूसरे देशों के साथ डिफेंस पार्टनरशिप है, लेकिन उसने कभी भी हथियारों या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हमलावर की तरह नहीं किया है.

पश्चिम एशिया में बड़े वैश्विक राजनीतिक बदलाव से पाकिस्तान चिंतित

अधिकारी ने कहा कि रणनीतिक रक्षा साझेदारी का मकसद पाकिस्तान वाले अस्थिर इलाके में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने दूसरे देशों के साथ अपनी रक्षा साझेदारी का इस्तेमाल हमलावर की भूमिका निभाने के लिए किया है. एक और अधिकारी ने कहा कि इजरायल में पीएम मोदी का जैसा स्वागत हुआ और दोनों देशों ने जो समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उससे पाकिस्तान चिंतित है क्योंकि वह पश्चिम एशिया में बड़े वैश्विक राजनीतिक बदलावों को लेकर आशंकित है. 

‘इजरायल भारत का मुख्य डिफेंस सप्लायर बनकर उभरा है’

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान रणनीतिक भारत-इजरायल साझेदारी से नाखुश है. हालांकि, उसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि इजरायल भारत का मुख्य डिफेंस सप्लायर बनकर उभर रहा है. भारत ने हमेशा कहा है कि इजरायल के साथ उसका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और आपसी फायदे पर आधारित है. नई दिल्ली ने कहा है कि यह संबंध किसी देश के खिलाफ नहीं है.

Advertisement

यह भी पढ़ें

Advertisement