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नेपाल में ‘जेन-जी’ आंदोलन की बड़ी जीत! केपी ओली समेत 3 शीर्ष अधिकारियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

उच्च-स्तरीय जांच आयोग ने जेनजी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं के लिए पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री और तत्कालीन पुलिस प्रमुख के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की है.

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नेपाल में पिछले वर्ष हुए जेनजी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ आपराधिक जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की है.

ओली समेत तीन पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश

गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने 8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में ओली और लेखक की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की ओर इशारा किया और उनके खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की. आयोग ने पूर्व पुलिस प्रमुख को भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश देने के लिए जिम्मेदार ठहराया.

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यदि आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुकदमा चलता है, तो इन तीनों को तीन से दस साल तक की सजा और अधिकतम 30 हजार नेपाली रुपए का जुर्माना हो सकता है. आयोग की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसकी एक लीक कॉपी व्यापक रूप से फैल चुकी है. आयोग के सामने अपने बयान में ओली ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को जान-माल के नुकसान को कम करने और प्रदर्शन में अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए गए थे.

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जेनजी आंदोलन के दौरान 77 मौतें और 85 अरब की संपत्ति नष्ट

एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, ओली सरकार को गिराने वाले जेनजी आंदोलन के दौरान कुल 77 लोगों की मौत हुई और 85 अरब नेपाली रुपए से अधिक की संपत्ति नष्ट हुई. ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पतन के बाद, सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक गैर-राजनीतिक प्रशासन का गठन किया गया, जिसने पांच मार्च को प्रतिनिधि सभा के चुनाव करवाए. 

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दोषी पूर्व अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा

चुनाव के बाद, बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी संसद में लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी जैसी पारंपरिक पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा. नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक दो दिन पहले यह रिपोर्ट लीक हुई, जिससे आने वाली सरकार पर आंदोलन के दौरान जिम्मेदार पाए गए पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ सकता है. 

चार अधिकारियों पर लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का आरोप

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आयोग ने तत्कालीन गृह सचिव गोकरण मणि दुवाडी, सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजु अर्याल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छवि राज रिजाल के खिलाफ भी मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी के आरोप में जांच और मुकदमे की सिफारिश की है. 

दोषियों को हो सकता है 3 साल जेल और जुर्माना

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यदि इन पर मुकदमा चलता है, तो उन्हें अधिकतम तीन साल की सजा और 30 हजार नेपाली रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. आयोग ने नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और राष्ट्रीय जांच विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की है.

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