Advertisement
'सुधर जाओ, नहीं तो नामोनिशान मिटा देंगे...', अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई जंग, बौखलाए ट्रंप ने दे दी बड़ी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अगर इस बार नहीं सुधरे तो उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा. ऐसे में अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आपको बता दें कि 24 घंटे में अमेरिका ने ईरान पर दूसरा बड़ा हमला किया है.
Advertisement
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर साइन होने के बावजदू फिर से तनाव की स्थिति बनी हुई है. अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक दूसरे पर जवाबी हमले किए हैं. अमेरिकी स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने बहरीन-कुवैत सहित दूसरे अमेरिकी बेस वाले खाड़ी के देशों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं.
'ईरान नहीं सुधरा तो नामोनिशान मिटा देंगे'
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर ईरान नहीं सुधरा तो उसका अस्तित्व नहीं बचेगा. वहीं ट्रंप ने जानकारी दी है कि अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए एयर स्ट्राइक किए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान पर होर्मुज स्ट्रेट के पास एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हमला करके सीजफायर समझौते को फिर से तोड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो इस्लामिक रिपब्लिक अब नहीं रहेगा.
Advertisement
यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने कहा कि ये हमले राष्ट्रपति के कहने पर किए गए, जब ईरान ने कथित तौर पर एकतरफा ड्रोन अटैक लॉन्च किया, जिसने सुबह 4:30 बजे ET पर पनामा के झंडे वाले टैंकर एम/टी किकू को टक्कर मारी. टैंकर दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था.
Advertisement
ट्रंप ने ईरान को दी सुधर जाने की चेतावनी
ट्रूथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर भी हमला किया था. अमेरिका के एयरक्राफ्ट ने सीजफायर समझौते को तोड़ने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों और कोस्टल रडार साइट्स पर फिर से हमला किया! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!”
Advertisement
उन्होंने आगे कहा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं ले पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था. अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान नहीं रहेगा!”
On Truth Social, US President Donald Trump posts, "United States aircraft just struck Iranian missile and drone storage locations, and coastal radar sites, for violating the Cease Fire Agreement, again!... There may come a point when we are no longer able to be reasonable and… pic.twitter.com/0cHxj190Z6
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 28, 2026
ईरान पर अमेरिका ने 24 घंटे में किया दूसरा बड़ा हमला
Advertisement
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि एम/वी एवर लवली पर हमले के जवाब में शुक्रवार को अमेरिका के हमलों के बाद ईरान को सीजफायर करने का मौका दिया गया था. कमांड ने कहा कि शुक्रवार को अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान को युद्धविराम (सीजफायर) समझौते का पालन करने का अवसर दिया गया था. हालांकि, उसका दावा है कि ईरान ने इस समझौते का सम्मान नहीं किया और उसकी सेना ने आज सुबह भारतीय समयानुसार 4:30 बजे (ईटी) एम/टी किकू को निशाना बनाते हुए एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन लॉन्च किया.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हमले के समय पनामा के झंडे वाला टैंकर दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल ले जा रहा था और होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था. एक अलग पोस्ट में, कमांड ने यह भी बताया कि “अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आज रात ईरान के एम/टी किकू पर ड्रोन हमले के बदले में होर्मुज स्ट्रेट में और उसके पास कई जगहों पर 10 ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए.”
बहरीन से लेकर कुवैत तक ईरान ने किया जवाबी हमला
Advertisement
यह ताजा सैन्य कार्रवाई वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव में एक और बढ़ोतरी दिखाती है, जिसमें अमेरिका ने कहा कि इन हमलों का मकसद इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था.
सेना की बढ़ती गतिविधियों के बावजूद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि जरूरी पानी के रास्ते से कमर्शियल शिपिंग जारी है. बयान के आखिर में कहा गया, “होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों का आना-जाना जारी है. अमेरिकी सेना चौकन्नी, खतरनाक और तैयार है.”
यह भी पढ़ें
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा गलियारों में से एक है, जो वैश्विक तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संभालता है, जिससे समुद्री यातायात में कोई भी बाधा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाती है.