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व्हाइट हाउस में ट्रंप कर रहे थे सीक्रेट प्लानिंग, तभी बाहर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग... सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को किया ढेर
अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस के पास रविवार को गोलीबारी हुई. घटना के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में मौजूद थे. सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में संदिग्ध हमलावर घायल हुआ, जिसकी बाद में मौत हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है.
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अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब दुनिया की सबसे सुरक्षित इमारतों में गिने जाने वाले व्हाइट हाउस के पास अचानक गोलियों की गूंज सुनाई दी. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना उस वक्त हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) व्हाइट हाउस परिसर के अंदर मौजूद थे और किसी महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने में अधिकारियों से साथ काम कर रहे थे. गोलीबारी की इस घटना ने ना सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया, बल्कि पूरे अमेरिका में राजनीतिक हिंसा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई फायरिंग की भयावह तस्वीर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार व्हाइट हाउस परिसर के बाहर अचानक तेजी से कई राउंड फायरिंग हुई. मौके पर मौजूद एक रिपोर्टर ने दावा किया कि करीब 25 गोलियों जैसी आवाजें सुनाई दीं. घटना के तुरंत बाद यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के जवान हरकत में आए और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया. अधिकारियों ने कुछ ही मिनटों में स्थिति को नियंत्रण में लेने का दावा किया. राहत की बात यह रही कि किसी भी सुरक्षाकर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा. बता दें कि इससे पहले 25 अप्रैल को ट्रंप की डिनर पार्टी में एक हमलावर ने फ़ायरिंग किया था.
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जवाबी कार्रवाई में मारा गया हमलावर
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न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध हमलावर ने व्हाइट हाउस के चेकपॉइंट के पास फायरिंग शुरू कर दी थी. जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस के जवानों ने उसे घायल कर दिया. बाद में अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि घटना में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है, जिसका इलाज जारी है.
कौन था हमलावर नेसिर बेस्ट?
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व्हाइट हाउस पर फायरिंग करने वाले हमलावर की पहचान 21 वर्षीय नेसिर बेस्ट के रूप में हुई है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह युवक खुद को यीशु मसीह मानता था. बताया गया कि उसने रिवॉल्वर से कई राउंड फायर किए, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने बेहद तेजी से जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही काबू कर लिया. इस घटना ने अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों को फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद कोई व्यक्ति व्हाइट हाउस के इतने करीब हथियार लेकर कैसे पहुंच गया.
व्हाइट हाउस परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
घटना के बाद पूरे व्हाइट हाउस परिसर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया. सीक्रेट सर्विस की स्नाइपर टीमें व्हाइट हाउस की छतों पर तैनात दिखाई दीं. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह एक स्टैंडर्ड सिक्योरिटी रिस्पांस होता है, जिसमें किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में ऊंची जगहों पर स्नाइपर्स को तैनात किया जाता है ताकि पूरे इलाके पर नजर रखी जा सके. फायरिंग के बाद व्हाइट हाउस के नॉर्थ लॉन इलाके को पूरी तरह खाली करा लिया गया. हथियारों से लैस एजेंट लगातार गश्त करते नजर आए. वहीं प्रेस ब्रीफिंग रूम को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. अंदर मौजूद पत्रकारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. पूरे इलाके में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया था.
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एफबीआई ने शुरू की जांच
इस घटना की पुष्टि एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की. उन्होंने बताया कि एफबीआई की टीम मौके पर मौजूद है और सीक्रेट सर्विस के साथ मिलकर जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि हमलावर अकेला था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.
अमेरिकी नेताओं ने जताई चिंता
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घटना के बाद कई अमेरिकी नेताओं ने चिंता जाहिर की. ज़ोहरान ममदानी ने कहा कि राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है और इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए. वहीं हाउस रिपब्लिकन्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि भगवान का शुक्र है कि ट्रंप सुरक्षित हैं और सीक्रेट सर्विस ने बेहद साहस और तेजी से स्थिति को संभाला.
जानें व्हाइट हाउस की खासियत
व्हाइट हाउस केवल अमेरिकी राष्ट्रपति का निवास नहीं, बल्कि अमेरिका की ताकत और सत्ता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. वॉशिंगटन डीसी में स्थित यह ऐतिहासिक इमारत दुनिया की सबसे चर्चित सरकारी इमारतों में शामिल है. यहां अमेरिकी राष्ट्रपति रहते हैं, विदेशी नेताओं से मुलाकात करते हैं और देश से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं. व्हाइट हाउस के प्रमुख हिस्सों में ओवल ऑफिस शामिल है, जहां राष्ट्रपति काम करते हैं. वेस्ट विंग में राष्ट्रपति और उनके वरिष्ठ सलाहकारों के दफ्तर होते हैं. ईस्ट विंग में प्रथम महिला और प्रशासनिक कार्यालय मौजूद रहते हैं, जबकि रेजिडेंस हिस्सा राष्ट्रपति परिवार के रहने के लिए होता है.
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बताते चलें कि व्हाइट हाउस का निर्माण वर्ष 1792 में शुरू हुआ था और साल 1800 से अमेरिकी राष्ट्रपति यहां रहने लगे. इस जगह के पहले निवासी अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति जॉन एडम्स थे. आज भी यह इमारत दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में गिनी जाती है. हालांकि रविवार की यह घटना यह दिखाती है कि सुरक्षा कितनी भी मजबूत क्यों न हो, खतरे कभी भी सामने आ सकते हैं.