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अमेरिका में जाति विवाद...हिंदू-भारतीय कर्मचारियों पर 'कास्ट कोड' लागू करने की कोशिश, HAF ने CRD को कोर्ट में घसीटा

अमेरिका में जाति विवाद का मामला गरमाता जा रहा है. US Civil Rights Department पर आरोप लग रहे हैं कि वो हिंदू, भारतीय और दक्षिण एशियाई अमेरिकियों पर जाति पॉलिसी लागू करने की कोशिश कर रहा है.

अमेरिका में जाति विवाद: कोर्ट गया हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (सांकेतिक तस्वीर)
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भारत के बाद अमेरिका जातिवाद के 'जहर' ने बवाल खड़ा कर दिया है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने एक अमेरिकी अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है. संगठन ने दलील दी कि कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार नियामक एजेंसी ने जाति के भेदभाव को गलत तरीके से हिंदू धर्म से जोड़ा है और भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों को टारगेट किया है.

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन किया कोर्ट का रुख

6 अप्रैल को नौवीं सर्किट अपील न्यायालय में दाखिल जवाबी याचिका में हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने अनुरोध किया कि निचली अदालत की ओर से उसके मुकदमे को खारिज करने में जिन प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला दिया गया, उन्हें हटाया जाए. संगठन का कहना है कि जिला अदालत ने उसके दावों के मूल मुद्दे पर विचार ही नहीं किया.

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अमेरिकी एजेंसी के सेलेक्टिव रूप से जाति को हिंदू धर्म से जोड़ने पर विवाद!

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संगठन का आरोप है कि कैलिफोर्निया नागरिक अधिकार विभाग (सीआरडी) की कार्रवाई स्पष्ट और अप्रत्यक्ष रूप से 'जाति' को हिंदू धर्म और भारतीय या दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से जोड़ती है, जिससे एक अल्पसंख्यक समुदाय को अलग से निशाना बनाया जा रहा है. 

यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जो सीआरडी ने सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज की थी, जिसमें जाति-आधारित भेदभाव के आरोप लगाए गए थे. नियामक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसने 'सिस्को सिस्टम्स और उसके पूर्व प्रबंधकों पर जाति के आधार पर भेदभाव का केस किया है.' यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई.

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हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के अनुसार, कैलिफोर्निया के नागरिक अधिकार विभाग ने अपनी इस थ्योरी पर जोर कि सिस्को को अपने दक्षिण एशियाई भारतीय कर्मचारियों में होने वाले जाति के भेदभाव को रोकना चाहिए था. संगठन ने बताया कि एजेंसी की शिकायत में जाति शब्द बार-बार इस्तेमाल किया गया है.

नागरिक अधिकार विभाग पर HAF ने लगाए गंभीर आरोप

संगठन का दावा है कि नागरिक अधिकार विभाग की प्रस्तुति भारतीयों और हिंदुओं के बारे में नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित थी. उसने विभाग के उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि 'भारत की जाति व्यवस्था' एक 'कठोर हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम' है.

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हिंदू कर्मचारियों पर जाति पॉलिसी लागू करने पर विवाद!

हालांकि, कैलिफोर्निया के नागरिक अधिकार विभाग ने बाद में इस वाक्यांश को हटा दिया और कहा कि मामला अब अप्रासंगिक हो गया है. वहीं, संगठन का कहना है कि मूल समस्या अब भी बनी हुई है. फाउंडेशन ने कहा, "'हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम' शब्द हटाने से यह बात नहीं बदलती कि सीआरडी सिर्फ कंपनी के भारतीय, दक्षिण एशियाई और हिंदू कर्मचारियों पर 'जाति' पॉलिसी लागू करने की कोशिश कर रहा है."

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने मामले को अंजाम तक ले जाने का किया फैसला!

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संगठन की सीनियर लीगल डायरेक्टर निधि शाह ने चेतावनी दी कि इसका असर एक केस से कहीं ज्यादा है. शाह ने कहा, "हिंदू अमेरिकी, भारतीय अमेरिकी व दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय चिंतित हैं." शाह ने आगे कहा, "नागरिक अधिकार विभाग अपनी प्रवर्तन शक्तियों का इस्तेमाल उन अल्पसंख्यक समूहों को अलग करने की कोशिश कर रहा है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है. कैलिफोर्निया के लोग ध्यान दे रहे हैं. कैलिफोर्निया के लोग, नियोक्ता और व्यवसाय इस पर ध्यान दे रहे हैं."

'Civil Rights Department जाति के आधार पर काम कर रहा'

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उन्होंने यह भी कहा, "नागरिक अधिकार विभाग जाति के आधार पर काम कर रहा है, जाति के आधार पर भेदभाव का दोष हिंदू धर्म पर डाल रहा है और यह बस कुछ ही समय की बात है, जब तक वे अपने अगले हिंदू टारगेट की पहचान नहीं कर लेते."

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