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दिल्ली में क्वाड की बैठक से पाकिस्तान को दो टूक संदेश, आतंकियों की अब खैर नहीं, विदेश मंत्री जयशंकर ने तगड़ा चेता दिया
दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त संदेश दिया गया है. विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलियाई समकक्षों की मौजूदगी में साफ कह दिया कि आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.
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भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न हो गई. इसमें भारत सहित सदस्य देशों ने विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे की जरूरतों और सोच को समझा और समर्थन भी किया. इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद खासकर सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और कहा कि इस समस्या से पीड़ित देश होने के नाते वो जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.
क्वाड से पाकिस्तान को सख्त संदेश
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद विदेश मंत्री ने आतंकवाद को लेकर कहा कि लोकतांत्रिक देशों के तौर पर, हमने आतंकवाद के साझा खतरे से निपटने पर भी ध्यान दिया. आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस होना चाहिए, और आतंकवादी हमलों का शिकार होने वाले देशों को अपना बचाव करने का अधिकार है.
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फ्री इंडो पैसिफिक पर क्वाड में दिया गया जोर
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आगे कहा कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका, जो समुद्री लोकतंत्र, विविध समाज और बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं, उन सबकी जिम्मेदारी है कि वे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को आजाद और खुला बनाए रखें. उन्होंने कहा कि यह इलाका दुनिया के विकास और स्थिरता के लिए बहुत अहम है.
नई दिल्ली में मंगलवार को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, “हम 18 महीने से भी कम समय में तीसरी बार मिल रहे हैं. हम अपनी साझा गतिविधियों पर चर्चा करेंगे और फैसले लेंगे. दुनिया में कई चुनौतियां और मौके हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर बात होगी. हमारा मुख्य फोकस इंडो-पैसिफिक रहेगा, जो क्वाड की खास सीमा और क्षेत्र है.”
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क्वाड की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर हुई जांच
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मंत्रियों को सप्लाई चेन की मजबूती, कनेक्टिविटी में रुकावटें (चोक पॉइंट्स), मैन्युफैक्चरिंग और संसाधनों की एक जगह पर ज्यादा निर्भरता, और जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देना होगा.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, क्वाड के अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, आर्थिक मजबूती और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत (एचएडीआर) सहित कई प्रमुख प्राथमिकताओं पर सहयोग को आगे बढ़ाया है.
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विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमें वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की मजबूती, कनेक्टिविटी की रुकावटें, उत्पादन और संसाधनों की एक जगह पर निर्भरता, और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी समस्याओं को हल करना होगा. हर समस्या नए साझेदारी और बेहतर विकास का मौका देती है. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की अपनी भी कुछ खास चुनौतियां हैं. इसके लिए जरूरी है कि रणनीतिक भरोसा बढ़े, समुद्री सुरक्षा मजबूत हो, आर्थिक विकल्प बढ़ें और पारदर्शी और भरोसेमंद साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए.”
उन्होंने आगे कहा, "पिछले कुछ महीनों में, हमारे अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, आर्थिक मज़बूती और एचएडीआर सहित कई प्रमुख प्राथमिकताओं पर सहयोग को आगे बढ़ाया है. हमने कई पहलों पर उत्साहजनक प्रगति देखी है. समुद्री लोकतंत्र, बहुलवादी समाज और बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, हम एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी साझा करते हैं. इस क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता का वाहक बने रहना चाहिए. आज हम अपनी चर्चाओं के माध्यम से इसी बात पर ज़ोर देंगे, और मुझे विश्वास है कि ये चर्चाएँ उपयोगी और सार्थक साबित होंगी."
अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी क्वाड एकजुटता पर दिया जोर
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वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि चारों देश मिलकर दुनिया की कई बड़ी समस्याओं से निपटने की क्षमता रखते हैं, जैसे मानवीय मदद, समुद्री रास्तों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, और जरूरी खनिजों और सप्लाई चेन को अलग-अलग स्रोतों से मजबूत करना.
उन्होंने कहा कि क्वाड की सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं है कि यह चार रणनीतिक साझेदार देशों का समूह है जो एक साथ आकर अपने साझा हितों पर बात करते हैं, बल्कि यह भी है कि यह धीरे-धीरे एक ऐसा मंच बन रहा है जहां हम मिलकर काम करना शुरू कर रहे हैं. चारों देश अपनी-अपनी अलग ताकतें लेकर आते हैं, और मिलकर हम दुनिया की कई बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद कर सकते हैं. चाहे वह मानवीय सहायता हो, ऊर्जा सुरक्षा हो, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता हो या ऊर्जा और जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को ज्यादा विविध बनाना हो.
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क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं. इसका मकसद समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन को मजबूत करना, जरूरी खनिज, बुनियादी ढांचा विकास, आपदा राहत और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है. इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी शामिल हुए.