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चोरी-छिपे महिलाओं की तस्वीरें लेने वालों पर कसा शिकंजा, अब तुरंत FIR और सख्त कार्रवाई की तैयारी

पुलिस ने एक अहम निर्देश जारी किया है, जिसका मकसद उन मामलों में सख्ती बढ़ाना है जहां किसी व्यक्ति, खासकर महिलाओं, की निजी तस्वीरें या वीडियो उनकी बिना अनुमति के शेयर किए जाते हैं या उनका गलत इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे मामलों में अब पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.,

Image Source: Canva (Representative Image)
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हाल ही में कर्नाटक पुलिस ने एक अहम निर्देश जारी किया है, जिसका मकसद उन मामलों में सख्ती बढ़ाना है जहां किसी व्यक्ति, खासकर महिलाओं, की निजी तस्वीरें या वीडियो उनकी बिना अनुमति के शेयर किए जाते हैं या उनका गलत इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे मामलों में अब पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.,

निजी तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल अब गंभीर अपराध

आजकल कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि किसी की निजी तस्वीरें या वीडियो चोरी-छिपे बना लिए जाते हैं या बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर डाल दिया जाता है. कुछ मामलों में तो इन्हें बदला लेने, ब्लैकमेल करने या किसी को बदनाम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. अगर कोई शिकायत आती है, तो पुलिस को बिना देरी किए FIR दर्ज करनी होगी और जरूरी कानूनी धाराएं तुरंत लगानी होंगी,..

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सहमति (consent) की गलत समझ पर भी सफाई

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गाइडलाइन में एक बहुत जरूरी बात पर जोर दिया गया है. कई बार ऐसा होता है कि लोग यह मान लेते हैं कि अगर किसी ने अपनी तस्वीर खिंचवाने या वीडियो रिकॉर्ड कराने की अनुमति दी थी, तो उसे कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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लेकिन कानून कहता है कि यह गलत समझ है. किसी फोटो या वीडियो को बनवाने की अनुमति देना और उसे बिना इजाजत किसी और के साथ शेयर करना दो अलग बातें हैं. अगर कोई व्यक्ति बाद में उस कंटेंट को सार्वजनिक करता है, तो वह अपराध माना जाएगा.

पीड़ित की सुरक्षा और सम्मान सबसे जरूरी

इन मामलों में पीड़ित की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखने पर भी जोर दिया गया है. इसका मतलब है कि पुलिस या कोई भी अधिकारी पीड़ित का नाम, फोटो या कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा..

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साथ ही यह भी कहा गया है कि शिकायत करने आए व्यक्ति के साथ सम्मान से पेश आना जरूरी है. किसी भी तरह की ऐसी बात या व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे पीड़ित को शर्मिंदगी, डर या मानसिक परेशानी महसूस हो.

महिलाओं के मामलों में खास सावधानी

गाइडलाइन में यह भी साफ किया गया है कि अगर पीड़ित महिला है, तो उसकी शिकायत महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करें। इसका मकसद यह है कि महिला को ज्यादा सुरक्षित और सहज माहौल मिल सके.

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लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

सबसे अहम बात यह है कि अगर किसी मामले में FIR दर्ज करने में देरी की गई या उसे नजरअंदाज किया गया, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा. ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

कुल मिलाकर संदेश क्या है?

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यह पूरा निर्देश इस बात पर जोर देता है कि किसी की निजी जिंदगी से जुड़ी तस्वीरों या वीडियो का गलत इस्तेमाल अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पीड़ित की सुरक्षा, सम्मान और त्वरित न्याय को प्राथमिकता दी जाएगी, और पुलिस को इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

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