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WiFi बना ‘मॉनिटरिंग डिवाइस’? घर के हर सदस्य पर रख सकता है नजर, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
Wifi: हाल ही में आई एक रिसर्च ने इस सोच को थोड़ा चौंका दिया है. इस स्टडी के मुताबिक, आने वाले समय में Wi-Fi सिर्फ इंटरनेट देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह घर में मौजूद लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों को समझने में भी सक्षम हो सकता है..
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आज ज्यादातर लोग Wi-Fi राउटर को सिर्फ एक ऐसे डिवाइस के रूप में देखते हैं जो घर में इंटरनेट चलाता है - Netflix, YouTube या Instagram जैसी चीजों के लिए ..लेकिन हाल ही में आई एक रिसर्च ने इस सोच को थोड़ा चौंका दिया है. इस स्टडी के मुताबिक, आने वाले समय में Wi-Fi सिर्फ इंटरनेट देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह घर में मौजूद लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों को समझने में भी सक्षम हो सकता है, हालांकि यह अभी पूरी तरह व्यावहारिक रूप से आम इस्तेमाल में नहीं है, लेकिन इसकी संभावना जरूर दिखाई गई है.
BFId टेक्नोलॉजी क्या है?
जर्मनी की कार्लस्रू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक पर काम किया है, जिसे BFId (Beamforming Feedback Information) कहा जाता है. यह तकनीक Wi-Fi सिग्नल और मशीन लर्निंग को मिलाकर काम करती है.
इसका मतलब यह हुआ कि जब Wi-Fi सिग्नल किसी कमरे में फैलते हैं, तो वे वहां मौजूद लोगों के शरीर से टकराकर अलग-अलग तरीके से वापस लौटते हैं। यह तकनीक उन छोटे-छोटे बदलावों को पकड़कर यह समझने की कोशिश करती है कि कमरे में कौन मौजूद है और कैसे मूव कर रहा है.
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इंसान की हरकत से कैसे पहचान हो सकती है?
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हम में से हर इंसान के चलने, खड़े होने या घूमने का तरीका थोड़ा अलग होता है. रिसर्च के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति Wi-Fi सिग्नल के बीच से गुजरता है, तो उसका शरीर उन तरंगों को थोड़ा बदल देता है.
BFId सिस्टम इन्हीं बदलावों को नोट करता है और फिर मशीन लर्निंग की मदद से एक “पैटर्न” बना लेता है. यह पैटर्न किसी तरह का डिजिटल पहचान चिन्ह जैसा काम कर सकता है. शोधकर्ताओं का दावा है कि नियंत्रित माहौल में यह सिस्टम काफी सटीक तरीके से यह पहचान सकता है कि कौन व्यक्ति कमरे में मौजूद है.
प्राइवेसी को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
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इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी की है. अगर यह सिस्टम बड़े स्तर पर विकसित हो जाता है, तो यह बिना कैमरा या किसी डिवाइस के भी यह समझ सकता है कि कोई व्यक्ति घर में कहां है और क्या कर रहा है.
इससे डर यह है कि अगर गलत हाथों में यह तकनीक चली गई, तो लोग बिना बताए किसी की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इसका इस्तेमाल सही दिशा में किया जाए तो यह स्मार्ट होम, सुरक्षा और हेल्थ मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में मददगार हो सकता है.
क्या Wi-Fi कैमरे से भी ज्यादा “स्मार्ट” हो सकता है?
कैमरा सिर्फ वही दिखा सकता है जो उसकी नजर में आता है. लेकिन Wi-Fi सिग्नल दीवारों और बंद दरवाजों के पार भी फैल जाते हैं. इसी वजह से यह तकनीक उन जगहों पर भी जानकारी जुटा सकती है जहां कैमरा नहीं पहुंच पाता.
यही बात इसे और ज्यादा शक्तिशाली और साथ ही संवेदनशील बना देती है, क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि इस डेटा का मालिक कौन होगा और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा.
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अभी डरने की जरूरत नहीं
फिलहाल आम घरों में इस्तेमाल होने वाले Wi-Fi राउटर ऐसी ट्रैकिंग नहीं करते. यह रिसर्च सिर्फ यह दिखाती है कि तकनीकी रूप से यह संभव हो सकता है, अगर इसे भविष्य में AI और एडवांस सिस्टम के साथ जोड़ा जाए.
इसका मतलब यह नहीं है कि आपका राउटर अभी आपकी जासूसी कर रहा ह. लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि आने वाले समय में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी.
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