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योगी सरकार का बड़ा फैसला, स्कूल बंद होने पर टीचर्स को भी मिलेगा ऑफ, शिक्षकों की जबरन ड्यूटी पर रोक

CM Yogi: पहले इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने निर्देश जारी किए थे, लेकिन कई जिलों में उन आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया. इसी वजह से अब शासन स्तर पर सख्ती की तैयारी हो रही है और जल्द ही साफ व कड़े नियम जारी किए जा सकते हैं.

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04 Feb 2026
( Updated: 04 Feb 2026
03:46 AM )
योगी सरकार का बड़ा फैसला, स्कूल बंद होने पर टीचर्स को भी मिलेगा ऑफ, शिक्षकों की जबरन ड्यूटी पर रोक
Image Source: Social Media
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UP School Teachers New Rules: उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है.अब ऐसा नहीं होगा कि कोई भी जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) मनमाने ढंग से छुट्टी के दिन शिक्षकों को स्कूल बुला ले. अगर कोई अधिकारी बिना ठोस और जरूरी कारण के ऐसा करता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है. पहले इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने निर्देश जारी किए थे, लेकिन कई जिलों में उन आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया. इसी वजह से अब शासन स्तर पर सख्ती की तैयारी हो रही है और जल्द ही साफ व कड़े नियम जारी किए जा सकते हैं.

ठंड की छुट्टियों में क्यों हुआ बवाल?

पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ी थी. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए मुख्यमंत्री और शासन की ओर से स्कूलों में ठंड की छुट्टियां घोषित की गई थीं.साफ आदेश था कि स्कूल बंद रहेंगे. लेकिन इसके बावजूद कई जिलों में डीआईओएस (DIOS) ने शिक्षकों को स्कूल आने का आदेश दे दिया. कहीं पहले से सूचना नहीं दी गई और कहीं छुट्टी के दिन अचानक फोन करके शिक्षकों को बुला लिया गया. इससे शिक्षकों में काफी नाराजगी फैल गई. उनका कहना था कि जब सरकार ने छुट्टी घोषित की है, तो फिर जबरन स्कूल बुलाना गलत है.

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शिक्षक संगठनों ने क्यों जताया विरोध?

इस मनमानी के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने आवाज उठाई. उन्होंने इसे अधिकारियों की तानाशाही बताया और शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक लिखित शिकायतें भेजीं. शिक्षकों का साफ कहना था कि वे काम से भागने वाले नहीं हैं, लेकिन नियमों का पालन होना चाहिए. छुट्टी का मतलब छुट्टी ही होना चाहिए. अगर हर बार छुट्टी में बुलाया जाएगा, तो शिक्षकों का मनोबल टूटेगा और व्यवस्था पर भरोसा भी कम होगा.

अब शासन ने अपनाया सख्त रुख

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने अब इस पूरे मामले में सख्ती दिखाने के संकेत दिए हैं. शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कहा है कि इस विषय पर बिल्कुल साफ और मजबूत गाइडलाइन बनाई जाए. हालांकि बताया जा रहा है कि पहले जो आदेश दिए गए थे, उनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ. इसी कारण अब शासन खुद इस मामले में दखल देने जा रहा है. प्रस्ताव है कि अगर किसी छुट्टी के दिन शिक्षक को ड्यूटी पर बुलाना जरूरी हो, तो पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. बिना अनुमति अगर शिक्षक को बुलाया गया, तो संबंधित डीआईओएस पर कार्रवाई की जा सकती है.

शिक्षकों की क्या है मुख्य मांग?

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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव ने इस मुद्दे पर साफ बात रखी है. उनका कहना है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग रहे हैं. अगर किसी जरूरी काम के लिए छुट्टी के दिन भी बुलाया जाता है, तो शिक्षक ड्यूटी करने को तैयार हैं, लेकिन उसके बदले उन्हें उचित प्रतिकर अवकाश यानी कंपनसेटरी लीव मिलनी चाहिए. अगर एक दिन की छुट्टी में काम कराया गया है, तो बदले में एक दिन की छुट्टी मिलना बिल्कुल न्यायसंगत और व्यावहारिक व्यवस्था है.

आगे क्या बदलेगा सिस्टम में?

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अगर शासन की ओर से प्रस्तावित आदेश लागू हो जाते हैं, तो इससे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी. इससे अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी और छुट्टी का सही मतलब समझा जाएगा. शिक्षक मानसिक रूप से राहत महसूस करेंगे, उनका मनोबल बढ़ेगा और काम का माहौल भी बेहतर होगा. साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा. यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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