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व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने किया कमाल, श्रीलंका को 3-0 से हराकर जीती सीरीज, मनोज धाकड़ बने जीत के हीरो
मनोज धाकड़ की कहानी संघर्ष और जज्बे की मिसाल है. वर्ष 2021 में हुए एक भीषण सड़क हादसे में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे. इसके बावजूद मनोज ने हार नहीं मानी और व्हीलचेयर क्रिकेट को अपना मैदान बना लिया.
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कोलंबो के मैदान पर भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है. कप्तान कबीर भदौरिया के नेतृत्व में Team India ने "भारत बनाम श्रीलंका 2026 - अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट 3T-20 चैंपियनशिप" के तीनों T-20 मैचों में मेजबान श्रीलंका को हराकर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली है.
हादसे के बाद भी नहीं मानी हार
इस टीम में मध्य प्रदेश के तीन खिलाड़ी चुने गए थे. ओर बाकी खिलाड़ी अदर स्टेट वाइज स्टेट से चुने गए इस ऐतिहासिक जीत में कैलारस तहसील के ग्राम खेरा मानगढ़ निवासी मनोज धाकड़ पुत्र उम्मेद सिंह धाकड़ ने Player के रूप में शानदार प्रदर्शन किया. 2021 में भीषण सड़क हादसे में दोनों पैर गँवाने वाले मनोज ने अपनी हिम्मत और जुनून से व्हीलचेयर क्रिकेट को अपना मैदान बनाया और आज देश को इंटरनेशनल ट्रॉफी दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
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26 से 28 मई तक खेला गया टूर्नामेंट
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Lion Wheelchair Cricket Association India द्वारा आयोजित यह टूर्नामेंट 26 मई से 28 मई तक खेला गया. तीनों मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त खेल दिखाया और श्रीलंका को कोई मौका नहीं दिया.
मनोज धाकड़ ने जीत को दिव्यांग खिलाड़ियों को समर्पित किया
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जीत के बाद मनोज धाकड़ ने कहा, "कप्तान कबीर भदौरिया भाई के नेतृत्व में पूरी टीम ने एकजुट होकर खेला. LWCA India का धन्यवाद जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया. 2021 के हादसे के बाद मैंने सपना देखा था कि एक दिन देश के लिए खेलूँगा. आज 3-0 से सीरीज जीतकर वो सपना पूरा हुआ. ये जीत मेरे गाँव खेरा मानगढ़, मेरे जिले मुरैना और देश के हर दिव्यांग भाई के नाम है जिसने कभी हार नहीं मानी."
मुरैना के लिए गौरव का क्षण
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मुरैना के लिए गौरव का क्षण: जिले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले पहले व्हीलचेयर क्रिकेटर मनोज धाकड़ अब "इंटरनेशनल चैंपियन" बनकर लौटेंगे. 29 मई को टीम के भारत लौटने पर मुरैना में भव्य स्वागत की तैयारी है.