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खंडित मूर्तियों, पूजा-पाठ के सामान की सम्मनजनक विदाई...हिंदुओं की वो बड़ी समस्या, दिल्ली सरकार ने कर दी खत्म, बना डाले कलेक्शन सेंटर्स

दिल्ली में धार्मिक आस्था के सम्मान और स्वच्छता के संरक्षण को लेकर एक व्यापक पहल शुरू की है. हिंदुओं को खंडित मूर्तियों, प्रतिमाओं, देवी-देवताओं की फटी-पुरानी तस्वीरों के विसर्जन और सम्मानजनक विदाई की बड़ी दिक्कत आती है. अब रेखा गुप्ता सरकार ने इस समस्या का हल कर दिया है.

Image Source: X/ @Rekhagupta
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दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने धार्मिक आस्था और स्वच्छता दोनों को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक पहल की है. इस कदम से न सिर्फ राजधानी दिल्ली साफ-सुथरी रहेगी, बल्कि पूजा-पाठ की सामग्री, फूल-मालाओं और खंडित मूर्तियों को भी पूरे सम्मान के साथ उचित स्थान देकर संरक्षित किया जा सकेगा.

इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने धार्मिक आस्था को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए 110 चिन्हित स्थानों पर विशेष 'संग्रह केंद्र' स्थापित किए हैं जहां पुरानी और खंडित धार्मिक मूर्तियों और पूजा सामग्री के सम्मानजनक निपटान किया जा सकेगा.

 कृत्रिम विसर्जन कुंडों की भी दिल्ली में की गई व्यवस्था!

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इसके अलावा इस बार गणेश चतुर्थी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कृत्रिम विसर्जन कुंडों की भी व्यवस्था की गई थी. सरकार की कोशिश है कि आस्था से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दिल्ली की स्वच्छता और पर्यावरण की भी पूरी तरह से रक्षा हो.

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खंडित मूर्तियों को दी जा सकेगी सम्मानजनक विदाई

हिंदू धर्म में मूर्तियों, फोटो, प्रतिमाओं की पूजा की जाती है. ऐसे में अक्सर लोग अपनी धार्मिक भावनाओं के कारण पुरानी या खंडित मूर्तियों और पूजा-संबंधी सामग्री को पेड़ों के नीचे, पार्कों में, सड़कों के किनारे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ देते हैं.

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दिल्ली में बनाए गए विशेष कलेक्शन सेंटर!

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वैसे तो ये धार्मिक आस्था से जुड़ा है, लेकिन इससे पब्लिक प्लेस की स्वच्छता और पर्यावरण के लिए चुनौतियां भी पैदा होती हैं. इसी आस्था और स्वच्छता के द्वंद का समाधान खोजते हुए दिल्ली सरकार ने 110 स्थानों की सूची तैयार की है जहां विशेष 'संग्रह केंद्र' स्थापित किए जा रहे हैं. मंदिरों सहित दूसरे मेन जगहों पर, निर्धारित संग्रह कंटेनर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जहां भक्त सम्मानपूर्वक पुरानी, ​​खंडित या अन्य धार्मिक सामग्री जमा कर सकते हैं. यह व्यवस्था लोगों को उनके घरों के पास धार्मिक सामग्री के लिए एक स्वच्छ, व्यवस्थित और सम्मानजनक विकल्प प्रदान करेगी.

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पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों के इस्तेमाल की अपील!

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सरकार की ओर से भक्तों से यह भी अपील की गई है कि वे पूजा का सामान, फूल, मालाएं और दूसरी धार्मिक सामग्री नदियों या जलाशयों में न डालें, ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ दिल्ली के जलाशयों की सफाई और पर्यावरण की रक्षा की जा सके. मुख्यमंत्री ने भक्तों से पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों को प्राथमिकता देने और प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP), हानिकारक रसायनों वाले रंगों और सजावटी सामानों के इस्तेमाल से बचने की भी अपील की है, जो जलाशयों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

आस्था का सम्मान भी पर्यावरण का संरक्षण भी!

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की इस पहल का व्यापक मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली में धार्मिक आस्था से जुड़ी हर परंपरा सम्मान और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े. जहां पुरानी और क्षतिग्रस्त मूर्तियों के सम्मानजनक निपटान के लिए 'कलेक्शन सेंटर' उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं गणेश उत्सव के दौरान विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब भी तैयार किए गए हैं. इससे भक्तों को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए व्यवस्थित और साफ जगहें मिलेंगी और सार्वजनिक जगहों व जलाशयों पर अनावश्यक दबाव कम करने में मदद मिलेगी.

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