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सावन में करें बिनसर महादेव के दर्शन, CM धामी ने मंदिर से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया

बिनसर महादेव मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि यहां भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. स्थानीय लोगों के बीच एक खास मान्यता भी प्रचलित है कि इस मंदिर तक हर कोई नहीं पहुंच पाता. कहा जाता है कि जिस भक्त को भगवान शिव का बुलावा होता है, वही यहां तक पहुंच पाता है.

सावन में करें बिनसर महादेव के दर्शन, CM धामी ने मंदिर से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया
Image Credit: Fecebook/@pushkarsinghdhami.in
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उत्तराखंड की सुंदर वादियों में भगवान भोलेनाथ के निवास और विशेष महत्व की मान्यता है. श्रावण मास में श्रद्धालु रानीखेत क्षेत्र में स्थित बिनसर महादेव मंदिर पहुंचते हैं. 

CM धामी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया बिनसर महादेव मंदिर का वीडियो 

मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर की भव्यता के बारे में बताया, साथ ही लोगों से बिनसर महादेव के दर्शन करने के लिए भी कहा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट किया.

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इसके साथ उन्होंने लिखा, "सावन के पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व है. इस शुभ समय में, श्रद्धालु बड़ी संख्या में रानीखेत (अल्मोड़ा) के घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित बिनसर महादेव मंदिर पहुँचते हैं और आस्था, भक्ति व आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं. यह क्षेत्र तीर्थयात्रियों को न केवल एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है, बल्कि प्रकृति के साथ एक अनोखा जुड़ाव भी महसूस कराता है. यदि आप सावन के महीने में रानीखेत की यात्रा कर रहे हैं, तो आध्यात्मिक पुण्य का लाभ पाने के लिए भगवान शिव के इस पवित्र धाम में दर्शन और पूजा के लिए जरूर जाएं."

प्राचीन और पवित्र मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है 

यह प्राचीन और पवित्र मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत देवदार के जंगलों और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, मंदिर 9/10वीं सदी में बनाया गया था और इसलिए यह उत्तराखंड में सदियों से एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा है.

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गणेश, हर गौरी और महेशमर्दिनी की मूर्तियों के साथ, यह मंदिर इसकी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है. महेशमर्दिनी की मूर्ति 9वीं शताब्दी की तारीख में ‘नगरीलिपी’ में ग्रंथों के साथ उत्कीर्ण है. माना जाता है कि यह मंदिर अपने पिता बिंदू की याद में राजा पिठ्ठ द्वारा निर्मित है और इसे बिंदेश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है. देवदार, पाइन और ओक के जंगल से घिरा हुआ यह मंदिर राज्य में आने के लिए अपना एक अलग स्थान रखता है.

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन यहाँ लगता है एक बड़ा मेला

यहां हर साल बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर एक बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं.

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बिनसर महादेव मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि यहां भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. स्थानीय लोगों के बीच एक खास मान्यता भी प्रचलित है कि इस मंदिर तक हर कोई नहीं पहुंच पाता. कहा जाता है कि जिस भक्त को भगवान शिव का बुलावा होता है, वही यहां तक पहुंच पाता है.

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