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फर्जी हस्ताक्षर विवाद में TMC का बड़ा एक्शन, दो विधायकों को किया सस्पेंड; विपक्ष ने भी साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल जारी है. टीएमसी के भीतर बढ़ते विवाद के बीच विधायक ऋतोब्रता बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है. एक दशक से भी ज्यादा समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी और आपसी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं. पार्टी ने अपने दो विधायकों, ऋतोब्रता बनर्जी और संदीपन साहा, को निष्कासित कर दिया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है और विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है.
जानकारी के अनुसार, ऋतोब्रता बनर्जी उलुबेरिया पूर्व विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि संदीपन साहा एंटाली सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. दोनों नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई ने पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को उजागर कर दिया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन जब यह सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे तो उसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं.
संदीपन साहा ने उठाए गंभीर सवाल
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निष्कासन के बाद संदीपन साहा ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव में ऐसे लोगों के हस्ताक्षर शामिल किए गए, जो संबंधित बैठक में मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने इसे एक गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.
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अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर चर्चा
संदीपन साहा ने इस पूरे मामले में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि पार्टी के महासचिव के रूप में दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी उनके पास थी. यदि सूची में त्रुटियां थीं, तो उन्हें समय रहते सुधारा जाना चाहिए था. हालांकि, पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रिया दी जा रही है.
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विपक्ष ने भी साधा निशाना
इस विवाद को और हवा तब मिली जब विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि संबंधित प्रस्ताव में कई अनियमितताएं थीं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया.
नेताओं पर हमलों से बढ़ी चिंता
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वहीं, दूसरी तरफ़ हाल के दिनों में कुछ नेताओं पर हुए हमलों ने भी राज्य की राजनीति को अस्थिर बना दिया है. पहले अभिषेक बनर्जी पर हमले की खबर चर्चा में रही और उसके बाद टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी पर हमले की घटना ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी. इन घटनाओं के बीच ममता बनर्जी की नाराजगी भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है.
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बहरहाल, पश्चिम बंगाल की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां पार्टी के अंदरूनी मतभेद और विपक्ष के आरोप आने वाले दिनों में नई राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं. सभी की नजर अब इस बात पर है कि तृणमूल कांग्रेस इस चुनौती से कैसे निपटती है.