SIR को मोदी के खिलाफ मुद्दा बनाया, वहीं से निकला जीत का रास्ता! कांग्रेस नेता ने ही बंद कर दी राहुल गांधी की बोलती
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया ने केरल में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई. वहीं उन्होंने पश्चिम बंगाल में लाखों वैध वोटर्स के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी चिंता जताई.
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल और पश्चिम बंगाल चुनावों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. आमतौर पर विपक्षी दल जिस SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ हल्लाबोल किया। अब उसी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता शशि थरूर ने बड़ा दावा कर दिया. उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस की जीत में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) की अहम भूमिका रही. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
दरअसल, स्टैनफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान शशि थरूर ने पश्चिम बंगाल और केरल चुनावों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या वैध मतदाताओं की थी. थरूर के मुताबिक इनमें से लगभग 34 लाख लोगों ने अपील भी की, लेकिन चुनाव से पहले बहुत कम मामलों का निपटारा हो पाया.
बंगाल चुनाव को लेकर उठाए बड़े सवाल
थरूर ने कहा कि नियमों के मुताबिक हर अपील की अलग-अलग सुनवाई जरूरी थी, लेकिन वोटिंग से पहले सिर्फ कुछ सौ मामलों पर ही फैसला लिया जा सका. उन्होंने दावा किया कि आज भी 31 से 32 लाख लोग ऐसे हो सकते हैं, जिन्हें भविष्य में वैध वोटर माना जाए, लेकिन वे चुनाव में मतदान का मौका खो चुके हैं. उन्होंने बीजेपी की बंगाल में मिली जीत का जिक्र करते हुए कहा कि जीत का अंतर लगभग 30 लाख वोटों का था, जो लंबित अपीलों की संख्या के करीब है. थरूर ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर लाखों लोगों को वोट देने का मौका ही नहीं मिला, तो क्या इसे पूरी तरह निष्पक्ष और लोकतांत्रिक चुनाव कहा जा सकता है.
#WATCH | San Francisco, USA: Speaking at the roundtable on 'India, That is Bharat: Growth Governance and Identity' at Stanford India Conference, Congress MP Shashi Tharoor says, "About the SIR... there are legitimate questions to answer. Look at the Bengal case. 91 lakh names… pic.twitter.com/QpysPZcVV1
— ANI (@ANI) May 10, 2026
केरल में कांग्रेस को कैसे मिला फायदा?
शशि थरूर ने चर्चा के दौरान यह भी स्वीकार किया कि SIR प्रक्रिया से केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को फायदा हुआ. उनके मुताबिक केरल में लंबे समय से डबल और ट्रिपल एनरोलमेंट की समस्या रही है. यानी एक ही व्यक्ति का नाम कई अलग-अलग बूथों पर दर्ज होता था. थरूर ने आरोप लगाया कि वामपंथी दल CPM इस तरह के मल्टी एनरोलमेंट में माहिर रहे हैं. उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान जब ऐसे डुप्लीकेट नाम हटाए गए, तब वोटर लिस्ट ज्यादा साफ और पारदर्शी बनी, जिसका फायदा कांग्रेस गठबंधन को मिला. थरूर ने कहा कि केरल और तमिलनाडु में बहुत कम अपीलें दर्ज हुईं, जबकि बंगाल में लाखों लोग अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ सामने आए.
चुनावी नतीजों ने बदली राज्यों की राजनीति
हाल ही में पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया. पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पहली बार शानदार प्रदर्शन करते हुए 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बना ली. वहीं केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 140 में से 102 सीटें जीतकर वामपंथियों के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया.
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बताते चलें कि शशि थरूर का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने एक तरफ SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ यह भी माना कि इसी प्रक्रिया ने केरल में कांग्रेस को फायदा पहुंचाया. अब उनके बयान को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों खेमों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में SIR और वोटर लिस्ट संशोधन का मुद्दा देश की राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है.
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