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'बेशर्म लोग दोनों तरफ से फायदा चाहते हैं', महुआ मोइत्रा ने NCPI का उड़ाया मजाक, काकोली घोष दस्तीदार ने किया पलटवार

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एनसीपीआई के गरीबों के हितैषी होने के दावे का मजाक उड़ाया. इसके जवाब में बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आरजी कर मामले का जिक्र करते हुए अभया के लिए न्याय और दोषी को फांसी की मांग दोहराई.

Image Source: IANS
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पश्चिम बंगाल की टीएमसी पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा ने रविवार को नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सोशल मीडिया हैंडल पर उसके गरीबों के हितैषी होने के दावों का मजाक उड़ाया. रविवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मोइत्रा ने इस बात पर भी शक जताया कि एनसीपीआई अपनी गरीबों के हक वाली इमेज कब तक बनाए रख पाएगी, जबकि 20 बागी तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य त्रिपुरा की लगभग न के बराबर पॉलिटिकल पार्टी में शामिल हो गए हैं.

काकोली घोष दस्तीदार का पलटवार

महुआ के पोस्ट पर बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पलटवार किया. उन्होंने आर जी कर मामले का जिक्र करते हुए लिखा कि अभया के लिए न्याय मांगता है बंगाल, अभया के लिए न्याय मांगता है भारत, अभया के लिए न्याय मांगता है मानवता. हम असली बलात्कारी के लिए मौत की सजा चाहते हैं.

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एनसीपीआई में शामिल बागी सांसदों पर तंज

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दूसरी ओर, मोइत्रा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एनसीपीआई अब टीएमसी के सिंबल पर चुने गए 20 सांसदों की नई पार्टी है. इसके फेसबुक पेज पर लिखा है, ‘यह हमारे समाज के गरीब लोगों की मदद करती है.' सच में उम्मीद है कि यह इन 20 लोगों, जो इतने गरीब नहीं हैं, गद्दारों की भी मदद करेगी.

बागी सांसदों की सबसे मुखर आलोचक बनीं महुआ

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महुआ तृणमूल कांग्रेस के उन कुछ लोकसभा सदस्यों में से एक हैं जो पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी बनाए हुए हैं. जब से चार बार के लोकसभा सदस्य डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में 20 बागी लोकसभा सदस्य टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए हैं. मोइत्रा इसकी सबसे मुखर आलोचना कर रही हैं, चाहे वह सोशल मीडिया पर हो या मीडियाकर्मियों से बात करते समय.

टीएमसी के बैंक अकाउंट फ्रीज करने पर भी जताई नाराजगी

इस बीच, मोइत्रा ने राज्य पुलिस द्वारा तृणमूल कांग्रेस के तीन ऑफिशियल बैंक अकाउंट फ्रीज करने के कदम की भी आलोचना की है. तृणमूल कांग्रेस के पूर्व ट्रेजरर और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री, अरूप बिस्वास द्वारा संबंधित बैंक अधिकारियों को लिखे गए एक लेटर के बाद ये अकाउंट फ्रीज किए गए थे, जिसमें इन बैंक अकाउंट को फ्रीज करने का अनुरोध किया गया था.

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बागी विधायकों की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

बिस्वास का बैंक अधिकारियों को लिखा गया लेटर विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी विधायकों द्वारा पुलिस में की गई शिकायतों के बाद आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार से कमाया गया पैसा इन बैंक अकाउंट में जमा किया गया था. इसके बाद, बैंक अधिकारियों ने इन बैंक अकाउंट से डेबिट ट्रांजैक्शन फ्रीज करने का फैसला किया.

चुनावी फंडिंग पर बागियों से मांगा जवाब

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बागी विधायकों के इस आरोप पर मोइत्रा ने कहा कि इस बागी ग्रुप को, चाहे वे सांसद हों या विधायक, पहले यह साफ करना चाहिए कि हाल ही में हुए असेंबली इलेक्शन में कैंपेन के खर्च के लिए पार्टी ने उन्हें जो फंड दिया था, वह अकाउंटेड था या अनअकाउंटेड. महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर आपको लगता है कि आपने अपने कैंपेन में अनअकाउंटेड पैसे का इस्तेमाल किया और चुने भी गए, तो यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है कि आप कुर्सी से इस्तीफा दे दें. लेकिन मुझे पता है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। वे बेशर्म लोग हैं। वे दोनों तरफ से फायदा उठाना चाहते हैं.

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