पंजाब में निजी स्कूलों पर लगाम, पांच फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे, CM भगवंत मान ने किया एलान
Punjab School Fees: सीएम भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी नहीं चलने देंगे.अब इस संदर्भ में आगामी विधानसभा सत्र में कानून लाया जाएगा और यह पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा.
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CM Bhagwant Mann: प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के सिलसिले को खत्म करने और पंजाब भर के लाखों परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भगवंत मान सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचे की घोषणा की है. इसके तहत वार्षिक फीस वृद्धि पर 5 फीसदी की सीमा लगाई गई है. जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान वार्षिक सीमा का उल्लंघन किया है, उनके द्वारा वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करना अनिवार्य किया गया है और सख्त जुर्मानों के प्रावधान के अलावा अंततः स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है.
प्रस्तावित कानून और उसका प्रभाव
प्रस्तावित कानून, जिसे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून करार दिया है, आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा और यह पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि पांच फीसदी की यह सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य खर्चों और फंडों पर भी लागू होगी.
मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान
'एक्स' पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, "अमृतसर में हुई दुखद घटना के बाद मुझे पिछले 24 घंटों के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ाने के संबंध में माता-पिता के सैकड़ों फोन आए हैं. हमारे बच्चों के भविष्य और माता-पिता को हो रही भारी परेशानी को ध्यान में रखते हुए आपकी सरकार ने बहुत ही महत्वपूर्ण और सख्त फैसला लिया है."
फीस वृद्धि की नई सीमा
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, "पंजाब के किसी भी प्राइवेट स्कूल को अब अपनी वार्षिक फीस में पांच फीसदी से अधिक वृद्धि करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों में फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उन्हें माता-पिता से वसूली गई अतिरिक्त राशि तुरंत वापस करनी होगी."
ऐतिहासिक कदम और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही
इस कदम को शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित विद्यार्थियों की लूट-खसूट को खत्म करना है. उन्होंने दावा किया कि "प्राइवेट स्कूलों द्वारा बेहिसाब फीस बढ़ाने के खिलाफ पंजाब में देश का सबसे सख्त कानून होगा."
पुराने कानून और 2019 के संशोधन
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राइवेट अनएडेड स्कूलों का फीस ढांचा वर्तमान में 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेश्नल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016' के अधीन आता है. 2019 में संशोधन के कारण स्कूलों को मनमानी फीस बढ़ाने की अनुमति मिली थी.
फीस बढ़ोतरी पर पारदर्शिता
2019 के संशोधन ने स्कूलों को ‘डिस्क्लोजर मैकेनिज्म’ के जरिए निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने की इजाजत दी थी. दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी को स्कूल के नोटिस बोर्ड, वेबसाइट और शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर दर्शाना अनिवार्य था.
लंबित शिकायतों की जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि फीस बढ़ोतरी से संबंधित सभी लंबित शिकायतों की जांच की जाएगी और उन पर कार्रवाई होगी. रेगुलेटरी बॉडी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी वृद्धि वास्तविक खर्च या विकास गतिविधियों के आधार पर जायज हो.
रेगुलेटरी बॉडी की शक्तियां
रेगुलेटरी बॉडी यह देखेगी कि स्कूलों का फीस ढांचा उचित सीमा में रहे, मुनाफाखोरी रोकी जाए और विद्यार्थियों से वसूले गए फंड का इस्तेमाल शिक्षा के अलावा किसी और उद्देश्य के लिए न हो.
उल्लंघन पर जुर्माने और मान्यता रद्द
कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के लिए चरणबद्ध जुर्माना प्रणाली है. पहले उल्लंघन पर 30,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, बार-बार उल्लंघन पर 60,000 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना और तीसरे उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता या एफिलिएशन रद्द किया जा सकता है.
वित्तीय ऑडिट और पारदर्शिता
पंजाब सरकार स्कूलों के वित्तीय ऑडिट पर भी विचार कर रही है. चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक कमेटी पिछले 3–5 सालों के स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी.यह सुनिश्चित करेगा कि फीस बढ़ोतरी जायज थी और फंड का उपयोग शिक्षा के उद्देश्य के लिए ही हुआ.
उद्देश्य और दीर्घकालिक प्रभाव
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प्रस्तावित अध्यादेश का उद्देश्य नियमों को सख्ती से लागू करना, प्राइवेट स्कूलों की निगरानी मजबूत करना, फीस निर्धारण में पारदर्शिता लाना और मनमानी फीस बढ़ोतरी को चुनौती देना है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शैक्षणिक संस्थान बिना किसी मुनाफाखोरी के काम करें.