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EVM पर परफ्यूम और टेप का खेल! फाल्टा में चुनावी साजिश का बड़ा खुलासा

Bengal Election: इस बार मामला सिर्फ राजनितिक तक सीमित नहीं रहा. फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से जो रिपोर्ट आई है, उसने मतदान प्रकिया की निष्पक्षता और भरोसे पर सीधे सवाल खड़े कर दिए है.

EVM पर परफ्यूम और टेप का खेल! फाल्टा में चुनावी साजिश का बड़ा खुलासा
Image Source: IANS
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Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान जिस तरह की घटनाएं सामने आई है.. उसमे पूरे चुनावी माहौल को तनावपूर्ण और विवादित बना दिया है. आमतौर पर चुनाव के बाद आरोप, प्रत्यारोप होते है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ राजनितिक तक सीमित नहीं रहा. फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से जो रिपोर्ट आई है, उसने मतदान प्रकिया की निष्पक्षता और भरोसे पर सीधे सवाल खड़े कर दिए है. सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि अगर EVM के बटनों के साथ इस तरह कि छेड़छाड़ या अजीब हरकतें हुई है, तो यह सिर्फ  तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रकिया पर गंभीर सवाल है. ऐसे मामलों से लोगों का चुनावी सिस्टम पर भरोसा कमजोर होता है.    

फाल्टा में क्या आरोप लगे?

चुनाव आयोग के स्पेशल ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार फाल्टा क्षेत्र के कई बूथों पर EVM के बटनों पर परफ्यूम लगाने जैसी घटनाएं सामने आईं. इसका मकसद यह बताया गया कि जब मतदाता बटन दबाए तो उसकी उंगली पर खुशबू लग जाए, जिससे बाद में उसकी पहचान की जा सके. इसके अलावा कुछ बूथों पर बटनों पर काले टेप (ब्लैक मास्किंग टेप) चिपकाने के भी आरोप लगे, जिससे मतदाता के लिए सही विकल्प चुनना मुश्किल हो गया. अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर मतदान की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है.

मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई जगहों पर बूथ के अंदर पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी थी, जो नियमों के खिलाफ है. कुछ जगहों पर डर का माहौल भी बताया गया, जिससे मतदाता स्वतंत्र रूप से वोट नहीं कर पाए. इसके अलावा कुछ मामलों में फर्जी मतदान, एक व्यक्ति द्वारा कई बार वोट डालना और एक ही बूथ पर दो लोगों का एक साथ वोटिंग कंपार्टमेंट में मौजूद होना जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं. ये सभी चीजें मिलकर चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं.

रिकॉर्डिंग और सबूतों पर भी सवाल

रिपोर्ट में एक और गंभीर बात सामने आई कि कई बूथों की वीडियो रिकॉर्डिंग या तो गायब थी या अधूरी थी. कुछ जगहों पर तो रिकॉर्डिंग में पुराने चुनावों के फुटेज मिले, जो बहुत बड़ी लापरवाही या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है. कई डिजिटल रिकॉर्ड्स भी सही तरीके से सेव नहीं पाए गए, जिससे जांच करना मुश्किल हो गया. इस वजह से यह समझना और भी कठिन हो गया है कि असल में बूथों पर क्या हुआ था.

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चुनाव आयोग की कार्रवाई

इन सभी शिकायतों को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया है. आयोग ने माना कि इस तरह की घटनाएं चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं और मतदाताओं के फैसले पर असर डालती हैं. इसी आधार पर फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 पोलिंग बूथों पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया गया है. यह कदम इसलिए लिया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया को दोबारा पारदर्शी तरीके से कराया जा सके.

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

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रिपोर्ट में कई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. कहा गया है कि कुछ जगहों पर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्थिति बिगड़ती चली गई. कई मामलों में जो रिपोर्ट्स और असल स्थिति थी, उनमें भी अंतर पाया गया.  इससे यह सवाल उठता है कि क्या निगरानी व्यवस्था ठीक से काम कर रही थी या नहीं.

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