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फरार सुमित रॉय पर नया केस दर्ज, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप; अभिषेक बनर्जी के घर तक पहुंची थी पुलिस

अभिषेक बनर्जी के फरार सहयोगी सुमित रॉय पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की नई एफआईआर दर्ज हुई है. जमीन हड़पने के मामले में भी उनके खिलाफ वारंट और लुकआउट नोटिस जारी है.

Image Source: IANS
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तृणमूल कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के फरार एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई है. वेस्ट मिदनापुर जिले के डेबरा पुलिस स्टेशन में दर्ज नई एफआईआर में रॉय पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार के दौरान लोगों को राज्य सरकार में नौकरी दिलाने का वादा कर लाखों रुपए ठगे.

जमीन हड़पने के मामले में पहले से जारी है वारंट

वेस्ट मिदनापुर जिले की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पहले ही उसी जिले के सालबोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक और केस के संबंध में उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था, जिसमें उन पर गैरकानूनी तरीके से जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया था. पुलिस ने उन्हें विदेश भागने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया था. रॉय फिलहाल फरार हैं.

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सुजॉय हाजरा के बयानों के बाद बढ़ी मुश्किलें

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तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा के बयानों के बाद जिन्हें इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल पुलिस ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। रॉय का नाम जमीन हड़पने और राज्य सरकार का वादा करके लोगों को ठगने के दोनों मामलों में घसीटा गया था.

अभिषेक बनर्जी के घर हुई थी रेड

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इस महीने की शुरुआत में, सालबोनी पुलिस स्टेशन, कोलकाता पुलिस और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की एक जॉइंट टीम ने रॉय की तलाश में दक्षिण कोलकाता में कालीघाट रोड पर अभिषेक बनर्जी के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन किया था. यह रेड और सर्च ऑपरेशन अभिषेक बनर्जी के घर पर की गई थी, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं, क्योंकि उनके मोबाइल फोन के टावर की आखिरी लोकेशन से पता चला कि यह अभिषेक बनर्जी का घर था.

जांच एजेंसियों ने कई मामलों में की पूछताछ

अभिषेक बनर्जी से पिछले एक महीने में दो जांच एजेंसियों ने तीन अलग-अलग मामलों में कई बार पूछताछ की थी, जिनमें से एक पश्चिम बंगाल पुलिस का क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) और दूसरी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) थी.

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ईडी और सीआईडी के रडार पर अभिषेक

ईडी ने उनसे पश्चिम बंगाल में स्कूल जॉब के लिए करोड़ों रुपए के कैश मामले में पूछताछ की थी। दूसरी ओर सीआईडी ने उनसे दो अलग-अलग मामलों में पूछताछ की थी, जिसमें से एक पश्चिम बंगाल में विधायकों के हस्ताक्षरों में अंतर का मामला था और दूसरा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले हिंसा भड़काने वाले बयानों से संबंधित था.

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(INPUT-IANS)

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