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'मैंने गाय का गोश्त बनाया है, खाओगे क्या', बंगाल के CM को गोमांस खाने का न्योता देना पड़ा भारी, महिला की गिरफ्तारी के बाद आया नया ट्विस्ट, Video वायरल

Viral Video: गुरुग्राम में पश्चिम बंगाल की एक महिला द्वारा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के लिए बीफ पकाने का दावा करने वाला वीडियो सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है. मामले में महिला की गिरफ्तारी हो चुकी है. वहीं पश्चिम बंगाल के कई मुस्लिम नेताओं ने भी इस कृत्य की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे कदम लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं.

Image Source: IANS/Canva
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Viral Video: हरियाणा पुलिस ने गुरुग्राम में रहने वाली 33 वर्षीय एक महिला को गिफ्तार किया है. महिला मूल रूप से पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले की रहने वाली बताई जा रही है और फिलहाल गुरुग्राम में घरों में काम करके अपना जीवनयापन करती है. पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के कारण उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. अदालत ने उसकी जमानत याचिका भी फिलहाल खारिज कर दी है. अब उसे कम से कम 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई तक जेल में रहना होगा.

वीडियो में क्या कहा गया था?

पुलिस और शिकायतकर्ता के अनुसार, वायरल वीडियो में महिला रसोई में खाना बनाती हुई दिखाई दे रही थी. वीडियो में वह दावा करती है कि उसने गोमांस पकाया है और उसे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को खिलाना चाहती है. इसके साथ ही उसने ईद के दौरान गाय की कुर्बानी को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया था. वीडियो में महिला ने कुछ ऐसी बातें भी कही थीं जिन्हें कई लोगों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और समाज में तनाव बढ़ाने वाला बताया. यही वजह रही कि वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हुई और कई लोगों ने इसका विरोध किया.

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''कढ़ाई में बीफ बना रही हूं. सुवेंदु अधिकारी हम लोगों को इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं करने दी. खुद दूसरों के घर जाकर 2-2 कटोरी खाकर आए. लेकिन मैंने बीफ पकाया है. रोटी भी बनाई है. अगर चावल खाना है तो बताओ. वह भी पका दूंगी. सुवेंदु अधिकारी मुसलमानों पर अत्याचार कर रहे हो. हिंदुओं को भड़का रहे हो. अल्लाह देख रहा है. इसका बदला जरूर लिया जाएगा.'' ''कढ़ाई में बीफ बना रही हूं. सुवेंदु अधिकारी हम लोगों को इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं करने दी. खुद दूसरों के घर जाकर 2-2 कटोरी खाकर आए. लेकिन मैंने बीफ पकाया है. रोटी भी बनाई है. अगर चावल खाना है तो बताओ. वह भी पका दूंगी. सुवेंदु अधिकारी मुसलमानों पर अत्याचार कर रहे हो. हिंदुओं को भड़का रहे हो. अल्लाह देख रहा है. इसका बदला जरूर लिया जाएगा.''

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शिकायत कैसे दर्ज हुई?

यह मामला तब सामने आया जब गुरुग्राम के चक्कपुर इलाके में रहने वाले दिनेश यादव नामक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दी. उन्होंने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल फोन पर यह वीडियो मिला था. वीडियो देखने के बाद उन्हें लगा कि इसमें कही गई बातें धार्मिक भावनाओं को भड़का सकती हैं और समाज में विवाद पैदा कर सकती हैं. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कानूनी प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज कर ली.

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किस धारा के तहत कार्रवाई हुई?

पुलिस ने महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया. यह धारा उन मामलों से जुड़ी है जिनमें किसी धर्म या धार्मिक मान्यताओं को जानबूझकर अपमानित करने या लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया जाता है. जांच के दौरान पुलिस ने वीडियो से जुड़े सबूत जुटाए और उसके बाद महिला को गिरफ्तार कर लिया गया.

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पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि वीडियो उसी ने रिकॉर्ड किया था. अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सामग्री और उससे जुड़े अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उसे गिरफ्तार किया गया. पुलिस का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच भी जरूरी है.

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अदालत में क्या हुआ?

गिरफ्तारी के बाद महिला को अदालत में पेश किया गया. बाद में उसके वकील ने जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया. हालांकि, पुलिस ने जमानत का विरोध किया. पुलिस का तर्क था कि महिला दूसरे राज्य की रहने वाली है और यदि उसे फिलहाल रिहा कर दिया गया तो उसके शहर छोड़ने की संभावना हो सकती है. साथ ही जांच और गवाहों पर भी असर पड़ सकता है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया और महिला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

मामला क्यों बना चर्चा का विषय?

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यह मामला केवल वीडियो की वजह से ही नहीं, बल्कि इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि वीडियो में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का नाम लिया गया था. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की सीमा से जुड़ा मामला बताया, जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और समाज में तनाव पैदा करने वाला कदम बताया. इसी कारण यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया.

मुस्लिम नेताओं ने भी महिला के कथित कृत्य की आलोचना की

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 मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है. इस बीच पश्चिम बंगाल के कुछ मुस्लिम नेताओं ने भी महिला के कथित बयान और हरकत की आलोचना की है. कोलकाता की नाखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक क़ासमी ने कहा कि वह किसी भी ऐसे काम का समर्थन नहीं करते जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे. उनका कहना है कि ऐसे मामलों में कानून को अपना काम करने देना चाहिए. इमाम ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को आहत करना गलत है और इसका समाधान कानून के जरिए ही होना चाहिए.

वहीं मैसूर फैमिली फातेहा फंड वक्फ एस्टेट के सचिव मोहम्मद शहीद आलम ने भी इस मामले की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह व्यवहार गलत है और ऐसा लगता है कि ध्यान खींचने या सुर्खियां पाने की कोशिश की गई है. उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को व्यक्त करने के और भी सही तरीके होते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ भी ऐसा करना गलत है, तो किसी राजनीतिक नेता के मामले में ऐसा दावा करना और भी गंभीर है. उनका कहना है कि इस मामले में कानून ही अंतिम निर्णय करेगा.

आगे क्या होगा?

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फिलहाल महिला न्यायिक हिरासत में है और अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है. आने वाले दिनों में अदालत के सामने पुलिस अपनी जांच से जुड़े तथ्यों को रखेगी, जबकि बचाव पक्ष भी अपनी दलीलें पेश करेगा. इसके बाद अदालत उपलब्ध सबूतों और कानूनी पहलुओं को देखते हुए आगे का फैसला करेगी. अभी यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही सामने आएगा.

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