हरियाणा में EDC-SIDC बकायेदारों पर सख्ती, 20 करोड़ से ज्यादा बकाया पर लाइसेंस रद्द, सरकार का बड़ा फैसला

Haryana: हरियाणा सरकार का साफ संदेश है कि नियमों से बचने की कोशिश अब नहीं चलेगी. जो कंपनियां अपने बकाये नहीं चुकातीं और नियमों का पालन नहीं करतीं, उन्हें नए प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं मिलेगी.

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12 Feb 2026
( Updated: 12 Feb 2026
03:32 PM )
हरियाणा में EDC-SIDC बकायेदारों पर सख्ती, 20 करोड़ से ज्यादा बकाया पर लाइसेंस रद्द, सरकार का बड़ा फैसला
Image Source: Social Media

CM Nayab Singh Saini: हरियाणा सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों पर अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन बिल्डरों या डेवलपर्स पर बाहरी विकास शुल्क (EDC) और राज्य अवसंरचना विकास शुल्क (SIDC) का 20 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है, उन्हें अब कोई नया लाइसेंस या प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं दी जाएगी. सरकार का कहना है कि जो कंपनियां अपने पुराने बकाये नहीं चुका रहीं, उन्हें नए प्रोजेक्ट शुरू करने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

मंजूरी से पहले होगी गहन जांच

अब किसी भी नए लाइसेंस, बिल्डिंग प्लान या लेआउट की मंजूरी देने से पहले कंपनी की पिछले एक साल की पूरी जानकारी खंगाली जाएगी. इसमें शेयरहोल्डिंग पैटर्न और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की संरचना की जांच अनिवार्य होगी. पहले कई कंपनियां मंजूरी लेने के समय अपने डायरेक्टर या शेयरधारकों को अस्थायी रूप से बदल देती थीं, ताकि वे डिफॉल्टर न दिखें. मंजूरी मिलते ही पुराने लोग फिर से बोर्ड में शामिल हो जाते थे. सरकार ने इसे नियमों की अनदेखी माना है और इस पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं.

पुराने JDR मामलों में मिली राहत

सरकार ने 9 फरवरी 2022 से पहले हुए ज्वाइंट डेवलपमेंट राइट्स (JDR) ट्रांसफर मामलों को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है। कई कॉलोनियां सिर्फ इसलिए अटकी हुई थीं क्योंकि मूल डेवलपर पर भारी बकाया था, जबकि जमीन और निर्माण की जिम्मेदारी जेडीआर होल्डर निभा रहे थे;अब ऐसे पुराने मामलों में, जहां जेडीआर होल्डर पर बकाया नहीं है, वहां बिल्डिंग प्लान, लेआउट अप्रूवल और रिन्यूअल जैसी मंजूरियां दी जाएंगी. इससे लंबे समय से रुकी हुई कॉलोनियों के विकास का रास्ता साफ होगा.

अटकी कॉलोनियों को मिलेगा फायदा

राज्य में कई कॉलोनियां अधूरी पड़ी थीं, सड़कें और बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही थीं, क्योंकि मूल कंपनी पर बकाया था. नए आदेश से ऐसी कॉलोनियों को राहत मिलेगी और उनका काम आगे बढ़ सकेगा. सरकार का मकसद है कि जहां गलती किसी और की है, वहां घर खरीदारों या जेडीआर होल्डर को नुकसान न उठाना पड़े.

डिफॉल्टर से बचने का रास्ता अब बंद

रियल एस्टेट सेक्टर में यह आम तरीका बन गया था कि कंपनियां लाइसेंस के समय अपने बोर्ड और शेयरहोल्डिंग में बदलाव दिखाकर खुद को डिफॉल्टर की सूची से बाहर कर लेती थीं. अब ऐसा नहीं हो सकेगा. विभाग आवेदन के दिन की स्थिति के साथ-साथ पिछले 12 महीनों का रिकॉर्ड भी जांचेगा. अगर पिछले एक साल में एक भी दिन ऐसा पाया गया कि कंपनी का कोई डायरेक्टर या शेयरधारक किसी अन्य प्रोजेक्ट में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया के साथ डिफॉल्टर रहा है, तो उसका आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाएगा.

सरकार का स्पष्ट संदेश

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हरियाणा सरकार का साफ संदेश है कि नियमों से बचने की कोशिश अब नहीं चलेगी. जो कंपनियां अपने बकाये नहीं चुकातीं और नियमों का पालन नहीं करतीं, उन्हें नए प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं मिलेगी. वहीं, जहां पुराने विवादों के कारण कॉलोनियां अटकी हुई थीं और खरीदार परेशान थे, वहां राहत देने की कोशिश की गई है. सरकार चाहती है कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़े, बकाया वसूली हो और अधूरी परियोजनाएं समय पर पूरी हों.

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