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राजस्थान हाई कोर्ट में पहली बार आधी रात को लगी अदालत, एक झटके में 10 पार्षदों को मिली राहत, जानें पूरा घटनाक्रम

रात 10 बजे राजस्थान हाई कोर्ट एक मामले की सुनवाई के लिए खुला, जिसमें फैसला भी देर रात ही सुनाया गया. एक महिला जज की सिंगल बेंच ने सभी दलीलें सुनीं.

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21 Sep 2026
( Updated: 21 Sep 2026
05:42 PM )
राजस्थान हाई कोर्ट में पहली बार आधी रात को लगी अदालत, एक झटके में 10 पार्षदों को मिली राहत, जानें पूरा घटनाक्रम
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राजस्थान हाई कोर्ट के इतिहास में पहली बार रात में सुनवाई हुई. मामला पार्षदों की गिरफ्तारी से जुड़ा है. ऐसे में रात के 2 बजे अदालत लगी. हाई कोर्ट ने देर रात में ही मामले पर फैसला सुनाते हुए पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. 

दरअसल, कोर्ट के लिए देर रात सुनवाई करना इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि अगले दिन यानी सोमवार को मेयर चुनाव होने वाले थे. ऐसे में चुनावों से ठीक पहले कोर्ट में पार्षदों और प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी की आशंका को लेकर तत्काल राहत की मांग करते हुए याचिकाएं पेश की गई. 

क्या है पूरा मामला? 

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जस्टिस नूपुर भाटी की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. उन्होंने रात 10 बजे से दलीलें सुनना शुरू किया और 12 बजे फैसला सुनाया. यह राजस्थान हाई कोर्ट के दुर्लभ मामलों में से एक बन गया. जब हाई कोर्ट को छुट्टी के दिन देर रात सुनवाई करनी पड़ी. अदालत ने याचिकाकर्ता पार्षदों को राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी. जिन पार्षदों को राहत मिली उनमें 9 हनुमानगढ़ और एक बीकानेर के कांग्रेस पार्षद हैं. 

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस पर महिला न्यायाधीश डॉक्टर जस्टिस नूपुर भाटी ने फैसला सुनाया है. ये मामला हनुमानगढ़ में निर्दलीय विधायक गणेश बंसल समर्थित उम्मीदवारों से जुड़ा है. विधायक बंसल ने आरोप लगाया कि उन्हें 23 साल पुराने जमीन के पट्टे से जुड़े मामले में हिरासत लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसे लेकर उन्हें या परिवार को कोई जानकारी भी नहीं दी गई थी. ऐसा करते हुए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. 

राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों पर एक नजर 

अजमेर और पाली में दोनों नगर निगमों में कांग्रेस के ज्यादा पार्षद जीतने के बावजूद BJP ने अजमेर और पाली में मेयर का पद हासिल किया. हालांकि, कांग्रेस ने बीकानेर में अपनी पकड़ बनाए रखी, जहां अनिल कल्ला मेयर चुने गए. अजमेर में BJP की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं, जबकि BJP ने 80 में से 32 पार्षद सीटें जीती थीं. 

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कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि 11 निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते. बहुमत का आंकड़ा 41 था. पाली में BJP की नमिता बुबकिया 33 वोटों के साथ मेयर चुनी गईं. BJP 21 पार्षद सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़ा गुट बनकर उभरी थी. 

कांग्रेस उम्मीदवार सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले. पाली में 15 निर्दलीय पार्षद थे, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनका समर्थन अहम हो गया. BJP ने उदयपुर में भी मेयर का पद हासिल किया, जहां पारस सिंघवी चुने गए. BJP ने 80 में से 53 वार्ड जीते थे, जिससे उसे स्पष्ट बहुमत मिला. अलवर में BJP की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश शर्मा को हराया. उन्हें 42 वोट मिले जबकि शर्मा को 23 वोट मिले. बीकानेर में, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे और कांग्रेस नेता अनिल कल्ला मेयर चुने गए. 

यह भी पढ़ें- ‘तुरंत हटाइए…’, SC के जज संदीप मेहता ने CJI को लिखा लेटर, हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस पर होगा एक्शन!

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कॉरपोरेशन के 80 वार्डों में से 42 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की और अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. बारां जिले की अटरू नगरपालिका में, कांग्रेस की निशा नैनवाल ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को तीन वोटों से हराया. श्री गंगानगर जिले की श्री विजयनगर नगरपालिका में चेयरमैन पद के चुनाव से पहले तनाव की खबर मिली.

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