केडीएमसी चुनाव के बाद मनसे का बड़ा फैसला, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को दिया समर्थन

मनसे ने सत्ताधारी पक्ष में शामिल होने का फैसला क्यों किया, इस सवाल का जवाब देते हुए पाटिल ने जोर दिया कि पार्टी के पांच पार्षद सरकार के अंदर रहकर जनता की बेहतर सेवा कर पाएंगे.

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21 Jan 2026
( Updated: 21 Jan 2026
05:19 PM )
केडीएमसी चुनाव के बाद मनसे का बड़ा फैसला, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को दिया समर्थन

कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केडीएमसी) चुनाव के बाद एक नाटकीय मोड़ में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दिया है. 

इस कदम के पीछे की वजह बताते हुए मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने बुधवार को साफ किया कि यह फैसला राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और सत्ता की लड़ाई के बजाय स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है.

“संख्याओं का खेल और अराजकता खत्म करना जरूरी था”

केडीएमसी में शिंदे गुट को समर्थन देने के मनसे के फैसले के बाद शिवसेना-यूबीटी को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि दोनों भाइयों ने बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य नागरिक निकायों के चुनाव 'मराठी मानुष' और मराठी पहचान के 'हितों की रक्षा' के साझा मुद्दे पर लड़े थे.

“सरकार में रहकर विकास पर निगरानी रखेंगे”

पार्टी के पार्षदों के समूह को रजिस्टर करने के बाद कोंकण भवन में मीडिया से बात करते हुए राजू पाटिल ने कहा, "संख्याओं का खेल और पाला बदलने का लगातार खतरा खत्म नहीं हो रहा था. यह अराजकता आने वाले समिति चुनावों में भी जारी रहने की संभावना थी. शहर में स्थिरता लाने के लिए हमने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया."

मनसे ने सत्ताधारी पक्ष में शामिल होने का फैसला क्यों किया, इस सवाल का जवाब देते हुए पाटिल ने जोर दिया कि पार्टी के पांच पार्षद सरकार के अंदर रहकर जनता की बेहतर सेवा कर पाएंगे.

पाटिल ने आगे कहा, "कल्याण-डोंबिवली के लोग दल-बदल की राजनीति से थक चुके हैं. हमारा फैसला व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं है. सत्ता संरचना का हिस्सा बनकर हम निगरानी रख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि विकास कार्य पूरे हों. हम जनहित पर केंद्रित एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) के साथ आगे बढ़ रहे हैं."

राज ठाकरे को दी गई थी पूरी जानकारी

पाटिल ने बताया कि स्थानीय नेतृत्व ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को क्षेत्र के जटिल राजनीतिक समीकरणों के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने कहा, "साहब (राज ठाकरे) ने हमसे कहा कि स्थानीय स्थिति के आधार पर जो भी फैसला जरूरी हो, वह लें. हमने उसी के अनुसार काम किया है."

इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि मनसे ने कई क्षेत्रों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, पाटिल ने कहा कि स्थानीय समीकरण अक्सर राज्य-स्तरीय गठबंधनों से अलग होते हैं.

खंडित जनादेश ने बढ़ाई अहमियत

उन्होंने बताया कि नतीजों के बाद कुछ पार्षद गायब हो गए थे, जिससे उनके अपने जीतने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा और अखंडता को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं. मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि ऐसे गठबंधन 'स्थानीय स्तर' पर होते हैं.

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केडीएमसी चुनाव में खंडित जनादेश आया था. 122 सदस्यों वाले कॉर्पोरेशन में, शिवसेना ने 53 सीटें जीतीं, जो भाजपा से थोड़ी ही ज्यादा थीं, जिसे 51 सीटें मिलीं. बहुमत का आंकड़ा 62 है, जिससे चुनाव के बाद समर्थन बहुत जरूरी हो गया है.

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