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'हादसा होता तो कौन होता जिम्मेदार?', मद्रासी कैंप पर हुए बुलडोजर एक्शन पर CM रेखा गुप्ता का करारा जवाब, कहा- कोर्ट ने 4 बार आदेश दिया

बुलडोजर एक्शन को लेकर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर कोर्ट ने कुछ आदेश दिया है तो न तो सरकार और न ही प्रशासन कुछ कर सकता है. उन्होंने कहा कि कोर्ट जानता है कि वह क्या कर रहा है और इसलिए उसने आदेश दिए हैं.

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दिल्ली के कई इलाकों में झुग्गियों पर लगातार बुलडोजर एक्शन देखने को मिल रहा है. पिछले दिनों कोर्ट के आदेश के बाद मद्रासी कैंप में भी बड़ी कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई पर राजनीति भी खूब हो रही है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सीएम रेखा गुप्ता पर हमला बोला. जिसका अब सीएम गुप्ता ने खुलकर जवाब दिया है. दरअसल रविवार को शालीमार बाग के यू और वी ब्लॉक में स्थित एमसीडी के जेजे क्लस्टर में 20-सीटर जन सुविधा केंद्र (JSC) के निर्माण स्थल का निरीक्षण करने पहुंची रेखा गुप्ता का का बयान सामने आया है.

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि मैंने साफ कहा है कि अगर कोर्ट ने कुछ आदेश दिया है तो न तो सरकार और न ही प्रशासन कुछ कर सकता है. मद्रासी कैंप को गिराने का सच यह है कि यह बारापुला नाले के किनारे बनाया गया था. कोर्ट ने इस झुग्गी बस्ती को हटाने के लिए चार बार आदेश दिया था ताकि नाले की सफाई के लिए मशीनें लगाई जा सकें. नहीं तो दिल्ली में फिर से 2023 जैसी बाढ़ देखने को मिलेगी.

‘अगर हादसा होता तो कौन होता जिम्मेदार?’
सीएम ने कहा कि कोई भी कोर्ट के आदेश की अवहेलना कोई नहीं कर सकता है. उस कैंप के निवासियों को घर आवंटित करके वहां शिफ्ट कर दिया गया है. दिल्ली में तीन जगहों पर कार्रवाई की गई, जिसमें रेलवे ट्रैक के पास बनी झुग्गी बस्ती भी शामिल है. रेलवे ने यह कार्रवाई की है. अगर जान का नुकसान होता है तो कौन जिम्मेदार होगा? क्या सौरभ भारद्वाज, आतिशी या अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि कोर्ट जानता है कि वह क्या कर रहा है और इसलिए उसने आदेश दिए हैं. इसके अलावा, पूरी दिल्ली में 700 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य चल रहे हैं.

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क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में पिछले रविवार को निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन सटे इलाकों में अवैध तरीके से रह रहे लोगों के खिलाफ अभियान चलाया गया. जहां सैकड़ों मकानों को बुलडोजर की मदद से ढहा दिया गया. इन मकानों में मालिक के अलावा कई परिवार किराए पर रह रहे थे. यहां रहने वाले ज्यादातर परिवार दक्षिण भारतीय थे. यही कारण है कि इस बस्ती को मद्रासी बस्ती कहा जाता है. ये इलाका निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से सटा हुआ है. इसी कार्रवाई के बाद बयानबाजी देखने को मिली थी.

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