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अंत की ओर CJP का प्रोटेस्ट...सोनम वांगचुक अस्पताल में, AISA वालों ने जंतर-मंतर पर खत्म की भूख हड़ताल
CJP Protest Live: दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव बरकरार है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की ओर से लाठीचार्ज के बीच AISA के तीन छात्र नेताओं ने अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है.
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करीब 1 महीने से जंतर मंतर पर जारी कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) का प्रोटेस्ट अंत की ओर बढ़ रहा है. सोनम वांगचुक के दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के बाद अब लेफ्ट छात्र संगठन AISA के नेहा, मनीष और आमीन ने भी अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है.
AISA के तीन छात्र नेताओं ने खत्म किया आमरण अनशन!
कहा जा रहा है कि AISA के नेहा, मनीष और आमीन ने अपनी भूख हड़ताल शबाना आजमी, प्रकाश राज, सांसद मनोज झा, राजाराम सिंह, अमरा राम के साथ-साथ डॉ. योगेंद्र यादव, वकील प्रशांत भूषण और प्रोफेसर अतुल सूद के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की अपील पर खत्म की.
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आपको बता दें कि भले ही CJP के प्रोटेस्ट का चेहरा अभिजीत दिपके थे, लेकिन इस प्रदर्शन को मैन पावर, वैचारिक, रणनीतिक और दूसरे तरीके से चलाने का काम इन्हीं लेफ्ट संगठनों का था. AISA, AISF, SFI सहित दूसरे संगठनों ने अपने-अपने तरीके से पूरे महीने इस प्रदर्शन को चलाया, लेकिन अब भूख हड़ताल खत्म कर दिया है. ये ऐसे वक्त में हुआ है जब CJP के प्रवक्ता सौरभ दास को कमिश्नर ऑफिस जाते देखा गया. वहीं सौरभ ने भी सरकार से बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया.
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AISA के इन तीनों नेताओं का पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल चल रहा था. इस दौरान तीनों का ही करीब 12 किलो वजन कम हो गया था, सुगर लेवल, शरीर में पानी और दूसरी जरूरी चीजों की भारी कमी हो गई थी.
सफदरगंज अस्ताल ने जारी किया सोनम वांगचुक का हेल्थ बुलेटिन
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इसी बीच सफदरगंज अस्पताल ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर हेल्थ बुलेटिन जारी किया है. इसमें बताया गया है कि सोनम वांगचुक का वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदर गंज अस्पताल में पूरा इलाज चल रहा है. उनके जरूरी हेल्थ पैरामीटर स्थिर हैं. ब्लड पैरामीटर्स पर लगातार बारीकी से मेडिकल निगरानी की जरूरत बनी हुई है. वांगचुक लगातार मेडिकल देखरेख में हैं और विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी बारीकी से निगरानी कर रही है.
बुलेटिन में आगे बताया गया कि सफदरजंग अस्पताल तथा एम्स नई दिल्ली की इलाज करने वाली टीमों के क्लिनिकल असेसमेंट के आधार पर, किसी भी संभावित जटिलता का जल्द पता लगाने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेडिकल इलाज और बिना रुकावट क्लिनिकल निगरानी ज़रूरी है. उन्हें ज़रूरी सभी मेडिकल देखभाल मिल रही है और विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी क्लिनिकल स्थिति पर लगातार बारीकी से नजर रख रही है.
सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने की मांग
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इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था. हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने की मांग को खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा था कि वांगचुक का अस्पताल में भर्ती किया जाना स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया फैसला था.
बता दें कि जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद शनिवार तड़के उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और चिकित्सकों की सलाह पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस आंदोलन में शामिल हुए, जो 6 जून से कथित नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. वांगचुक ने 28 जून से औपचारिक रूप से आमरण अनशन शुरू किया था.
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"मैं अपना व्रत कब तोडूंगा....!", सोनम वांगचुक ने बता दिया
वहीं अपना अनशन खत्म करने को लेकर सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार का मुद्दा उठाने का भरोसा देते हैं तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे. इस संबंध में उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट कर जानकारी दी है.
वांगचुक ने लिखा, "मैं अपना व्रत कब तोड़ूंगा...?"
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उन्होंने आगे लिखा, "प्रिय दोस्तों और समर्थकों, आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब खत्म करूंगा. जैसा कि मैंने पहले समर्थकों को बताया था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा, अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक वगैरह) की जिम्मेदारी ले या मैं और सीजेपी का नेतृत्व संसद पहुंचें तथा वहां सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हमें यह भरोसा दिलाएं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे." उन्होंने आगे लिखा, "यदि मेरी सेहत या किसी अन्य कारण से ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर यह भरोसा दें."
वांगचुक ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया कि यह संदेश उन्होंने 19 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल में अपनी "गैरकानूनी नजरबंदी" के दौरान लिखा, जहां उनके अनुसार उनके घूमने-फिरने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगी हुई है.
इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर वांगचुक को यह आश्वासन देते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे.
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आंगमो ने कहा था, "सोनम अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल में उनसे मिलकर यह आश्वासन देंगे कि वे संसद सत्र के दौरान शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे."
दिल्ली पुलिस ने भीड़ को किया कंट्रोल!
इससे पहले कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आवाहन पर जंतर-मंतर पर सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए और कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 'चलो संसद' मार्च निकालने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई. सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बैरिकेड पार करने से रोकने की कोशिश की.
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प्रदर्शन के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था थी और दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली जिले में कई जगहों पर बैरिकेडिंग की थी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी विरोध स्थल पर जमा हुए और भीड़ लगातार बढ़ती गई. मौके की तस्वीरों में सैकड़ों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी झंडे लिए और नारे लगाते हुए दिखाई दिए. कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड के आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखे, जिसके बाद व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों ने उन्हें बार-बार पीछे धकेला और रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया.
जंतर मंतर पर भारी फोर्स की तैनाती!
जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था और सोमवार सुबह ही प्रदर्शन वाली जगह पर दंगा-रोधी गाड़ी भी पहुंच गई थी. चूंकि प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की योजना बनाई थी, इसलिए अधिकारियों ने इलाके के आसपास पाबंदियां भी लगा दी थीं. मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास इकट्ठा होने के बाद कई छात्र जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए. जैसे-जैसे और छात्र मार्च में शामिल होते गए, प्रदर्शन और तेज हो गया.
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पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बैरिकेड पार करने से रोकने के लिए बल का प्रयोग किया और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान लाठीचार्ज की भी खबर मिली. हालात तनावपूर्ण बने रहे क्योंकि सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित इलाकों की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश में जुटे रहे. प्रदर्शन के बीच एहतियात के तौर पर जंतर-मंतर के पास स्थित पटेल चौक मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया.
#WATCH | Delhi | Security is tightened outside Parliament, in view of the Monsoon session of Parliament, which has started today, and the CJP's proposed protest march pic.twitter.com/gZCrrY9J08
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 20, 2026
पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास सिग्नल जैमर भी लगाए थे. कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रदर्शन स्थल के पास मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी पर असर पड़ा. यहां पर दिल्ली पुलिस के लगभग 5,000 जवानों को तैनात किया गया और दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई. दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती देखी गई. प्रदर्शनकारियों को केरल हाउस के पास रोक दिया गया, जब वे जंतर-मंतर पर तय प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे.
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दिल्ली पुलिस ने हिंसा से किया इनकार, अफवाह से बचने की अपील की!
दिल्ली पुलिस ने बताया कि मीडिया के कुछ हिस्सों में जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा या लोगों को हिरासत में लेने की छिटपुट घटनाओं का जिक्र किया गया है. यह सूचित किया जाता है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और विरोध-प्रदर्शन को पेशेवर तरीके से संभाला जा रहा है. सभी से अनुरोध है कि वे किसी भी अफवाह या गलतफहमी पर ध्यान न दें और उस जगह व उसके आसपास शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस का सहयोग करें.
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बता दें कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग नीट पेपर लीक से जुड़े आरोपों के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित न कर पाने का आरोप लगाया है और जिम्मेदार लोगों से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.