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बकरीद के बाद बिलाल बना विशाल… बेजुबानों की कुर्बानी से आहत होकर अपनाया सनातन धर्म, महादेव मंदिर में हुआ शुद्धिकरण

बिलाल से विशाल बने युवक का कहना है कि जानवरों की कुर्बानी उसे बचपन से ही विचलित करती थी. खंडवा के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में पहले बिलाल का शुद्धिकरण हुआ.

Source- AI/Social Media
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MP News: क्या किसी धर्म को छोड़ने की वजह उस धर्म का त्यौहार हो सकता है? मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में कुछ ऐसा ही हुआ, यहां एक मुस्लिम युवक ने बकरीद के बाद मुस्लिम धर्म छोड़ सनातन अपना लिया. युवक ने धर्म छोड़ने की वजह बकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी को बताया. 

जानकारी के मुताबिक, बिलाल नाम के मुस्लिम युवक ने महादेवगढ़ मंदिर में सनातन धर्म अपना लिया है. हिंदू धर्म के रिवाजों के मुताबिक बिलाल ने धर्म परिवर्तन किया और बिलाल से विशाल बन गया. उसने बकायदा सिर मुंडवाकर अपनी पिछली पहचान को मिटा दिया. युवक का कहना है कि उसने अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत की है. 

बेजुबानों की कुर्बानी ने आहत किया

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बिलाल खंडवा के खिरकिया इलाके में रहता है. मुस्लिम धर्म छोड़ने के पीछे उसने सबसे बड़ी वजह जानवरों की सार्वजनिक कुर्बानी को बताया. बिलाल से विशाल बने युवक का कहना है कि जानवरों की कुर्बानी उसे बचपन से ही विचलित करती थी. 

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बिलाल ने महादेवगढ़ मंदिर के प्रमुख के सामने अपनी कशमकश बताते हुए धर्म बदलने की पेशकश की. उसने बताया, वह बचपन से ही इस्लाम धर्म में बकरीद के त्योहार पर होने वाले बड़े पैमाने पर मूक पशुओं के कत्लेआम से बेहद आहत था. त्योहार के नाम पर बेजुबान जानवरों की बेरहमी से की जाने वाली हत्याएं उसके संवेदनशील मन को झकझोर देती थीं, समय के साथ यह आहत भाव इतना गहरा गया कि उसने सनातन धर्म अपनाने का निश्चय कर लिया.

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दो दिन पहले बकरीद का त्यौहार था, जिसमें बिलाल ने अपने सामने कुर्बानी होते हुए देखा और धर्म त्यागने का इरादा पक्का कर लिया. बिलाल ने महादेवगढ़ मंदिर की महिमा के बारे में सुना था. कहा जाता है पुरुषोत्तम मास में इस महीने में भगवान स्वयं धरती पर आकर विराजते हैं, बिलाल चाहता था वह इस शुभ समय में ही सनातन धर्म अपनाए. 

शुद्धिकरण के बाद अपनाया सनातन 

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खंडवा के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में पहले बिलाल का शुद्धिकरण हुआ. 10 विधि स्नान में गंगाजल, गो-दुग्ध, पंचामृत, गोमूत्र, गौ-गोबर, तुलसी रज, फल, धातु, पंचगव्य और कोष से स्नान कराया गया. फिर मुंडन और महाआरती के बीच बिलाल विशाल बना. इस दौरान मंदिर में जय श्री राम और महादेव के नारे लगे. सनातन अपनाने के बाद विशाल को रामायण भी दी गई. 

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