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UP में सरकारी वकीलों के लिए बड़ी खुशखबरी, योगी सरकार में भत्ते से लेकर सुनवाई फीस तक की दोगुनी
कैबिनेट बैठक में सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव सबसे अहम था. महाधिवक्ता की फीस साल 2012 और अधिवक्ताओं की फीस साल 2016 से नहीं बढ़ी है.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक की. यह बैठक CM योगी के सरकारी आवास पर हुई. जिसमें सरकारी वकीलों के भत्ते में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला लिया गया.
कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप और सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. कैबिनेट बैठक में सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव सबसे अहम था.
योगी सरकार ने कितनी बढ़ाई वकीलों की फिस?
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योगी सरकार ने UP में जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और भत्तों में 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी है. दरअसल महाधिवक्ता की फीस साल 2012 और अधिवक्ताओं की फीस साल 2016 से नहीं बढ़ी है.
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वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, जिला न्यायालयों में तैनात जिला शासकीय अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप 9 हजार से बढ़कर 14 हजार रुपये कर दी गई है.
जबकि प्रति सुनवाई फीस भी 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है. अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं (एडीजीसी) की रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये और प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये की गई है.
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महाधिवक्ता की 75 हजार रुपये मासिक रिटेनरशिप को बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया गया है. जबकि बहस की फीस भी 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है.
इसके साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले अपर महाधिवक्ता की रिटेनरशिप 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये और बहस की फीस 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दी गई है.
मुख्य स्थायी अधिवक्ता या फिर शासकीय अधिवक्ता को 22 हजार रुपये से बढ़ाकर अब 35 हजार रुपये मिलेंगे. बहस के लिए प्रतिदिन सात हजार रुपये के बजाय 12 हजार रुपये मिलेंगे.
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नए वकीलों को मिलेगा प्रोत्साहन
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को 12 हजार रुपये से बढ़ाकर अब 20 हजार रुपये मिलेंगे. इन्हें भी बहस के लिए पांच हजार रुपये के बजाय आठ हजार रुपये प्रतिदिन मिलेंगे. स्थायीअधिवक्ता को नौ हजार के स्थान पर 15 हजार रुपये मिलेंगे. प्रति सुनवाई इन्हें अब 3 हजार रुपये के बजाय पांच हजार रुपये दिए जाएंगे.
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले एडवोकेट आन रिकार्ड को अब 18 हजार के बजाय 30 हजार रुपये मिलेंगे. इन्हें बहस में प्रतिदिन 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये मिलेंगे.
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इसी तरह विशेष पैनल अधिवक्ता को प्रतिदिन सुनवाई के लिए 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये मिलेंगे. वहीं, वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता को आठ हजार रुपये के बजाय अब 12 हजार रुपये प्रतिदिन सुनवाई के लिए मिलेंगे. कनिष्ठ पैनल अधिवक्ता को भी अब पांच हजार रुपये के बजाय 7500 रुपये प्रतिदिन बहस के लिए मिलेंगे.
प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ और उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं.
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बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने वकीलों की फीस बढ़ाने का फैसला लिया है. निसंदेह योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी और दक्ष वकीलों को प्रोत्साहन मिलेगा. इसके साथ ही न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और ज्यादा प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी. कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग की ओर से की जाएगी.