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वाराणसी में फिर गरजा 'बाबा का बुलडोजर', रेलवे की जमीन पर खड़ी मजार-मस्जिद सब ध्वस्त ! पुलिस फोर्स तैनात

वाराणसी में देर रात प्रशासन ने काशी रेलवे स्टेशन परिसर स्थित अजगैब शहीद मजार और मस्जिद को बुलडोजर कार्रवाई में ढहा दिया. इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा.

Image Source: Videograb
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार देर रात करीब 12 बजे प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की. इस कार्रवाई के दौरान काशी रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित पुरानी 'अजगैब शहीद मजार' और उसके पास बनी मस्जिद को ढहा दिया गया. कार्रवाई को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.

दरअसल, वाराणसी में केंद्र और राज्य सरकार की कई विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इसी क्रम में शहर के राजघाट क्षेत्र स्थित काशी रेलवे स्टेशन को 'आधुनिक मॉडल स्टेशन' के रूप में विकसित किया जा रहा है. परियोजना के तहत रेलवे अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा है. इसी के तहत स्टेशन परिसर में स्थित 'अजगैब शहीद मजार' और उसके पास बनी मस्जिद पर कार्रवाई की गई. कार्रवाई से पहले एसीपी शिवहरी मीणा अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इलाके में बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया. इसके बाद प्रशासन ने तीन बुलडोजर की मदद से मजार और मस्जिद को ध्वस्त कर दिया.

बड़े अधिकारी मौके पर रहे मौजूद 

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कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा घेरे में रखा था. मजार और मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया के समय पुलिस और पीएसी के सैकड़ों जवान मौके पर तैनात रहे. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीसीपी काशी गौरव बंसवाल, एडीसीपी वैभव बांगर, एसीपी विजय प्रताप सिंह और चेतगंज सर्किल के अधिकारियों समेत कई वरिष्ठ अफसर लगातार मौके पर मौजूद रहे और हालात पर नजर बनाए रखी. प्रशासन ने कार्रवाई पूरी होने के बाद देर रात ही मलबा हटाने का काम भी शुरू करा दिया. जेसीबी और अन्य वाहनों की मदद से मलबे को वहां से हटाकर क्षेत्र को खाली कराया गया. बताया जा रहा है कि मजार और मस्जिद से जुड़ा यह विवाद पिछले करीब दो वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन था. भदऊ चुंगी स्थित किला कोहना इलाके में मौजूद इस परिसर में मजार, मस्जिद और कब्रिस्तान होने का दावा किया जाता रहा है. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद का इतिहास कई पीढ़ियों पुराना है. वहीं प्रशासन का पक्ष है कि संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है और समय के साथ वहां अवैध कब्जा कर धार्मिक ढांचे खड़े कर दिए गए थे. अधिकारियों के अनुसार परिसर में मौजूद अन्य निर्माणों को भी हटाया गया, जिनमें एक हनुमान मंदिर का ढांचा भी शामिल था.

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कोर्ट ने दिये थे जगह खाली करने के आदेश 

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जानकारी देते चलें कि वाराणसी में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी संख्या को देखते हुए शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन कैंट और बनारस के अलावा अन्य रेलवे स्टेशन के विस्तार की योजना भी बनाई गई. इसी क्रम में साल 2024 में काशी रेलवे स्टेशन का कायाकल्प करने की योजना बनाई गई. इस योजना के तहत से मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप विकसित करने के उद्देश्य से पहले ज़मीन की पैमाइश की गई. तब जाकर रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जों का पता चला. इसके बाद रेलवे ने अपनी जमीन को पर बने अवैध कब्जों को ख़ाली करने को कहा. लेकिन इसके बाद मामला वाराणसी कोर्ट में पहुंचा. इस क़ानूनी प्रक्रिया में मजार पक्ष को कोर्ट से निराशा हाथ लगी. इसके बाद अब रेलवे ने पहले जमीन खाली करने का नोटिस दिया. जब मुस्लिम पक्ष ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया तो प्रशासन ने अंत में मजार और मस्जिद को तोड़ने की कारवाई की.

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बहरहाल, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. हालांकि धार्मिक स्थल हटाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का माहौल बना हुआ है. वहीं रेलवे और प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विकास परियोजना के तहत की गई है.

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