अविमुक्तेश्वरानंद जाएंगे जेल? कोर्ट ने दिया FIR का आदेश, दो बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा क्या है पूरा मामला
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करते हुए यौन शोषण के आरोप लगाए थे.
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शंकराचार्य विवाद थोड़ा ठंडा ही पड़ा था कि अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के कथित मामले में FIR दर्ज होगी. प्रयागराज की एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने केज दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रयागराज जिले के झूंसी पुलिस स्टेशन में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा. दरअसल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करते हुए यौन शोषण के आरोप लगाए थे. कैमरे के सामने कोर्ट में बच्चों के बयान दर्ज हुए थे.
क्या है पूरा मामला
आरोप लगाने वाले दोनों बच्चों के बयान 13 फरवरी को कोर्ट में दर्ज किए गए थे. इसकी वीडियोग्राफी भी हुई थी. कोर्ट ने उस दिन फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं. वहीं, केस दर्ज करने की मांग करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज शाकुंभरी पीठाधीश्वर हैं. उन्होंने 8 फरवरी को शिकायत दर्ज की थी. उन्होंने कहा था, अविमुक्तेश्वरानंद अवैध गतिविधियों में शामिल हैं. उनके पास आय से अधिक संपत्ति है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए. आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान उनके पास बच्चे आए थे. दोनों ने उन पर कुकर्म के गंभीर आरोप लगाए थे.
आदेश के बाद क्या बोले आशुतोष ब्रह्मचारी?
कोर्ट के आदेश के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा, हम दर-दर भटक रहे थे. पुलिस के पास जा रहे थे. हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. इसलिए न्याय के मंदिर में आए. आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है. न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया है. मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया. इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है.
यह भी पढ़ें- धरना, विवाद और फिर प्रस्थान… माघ मेला छोड़ काशी रवाना हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं. माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन से विवाद के बाद संगम स्नान नहीं किया था और 11 दिन तक धरने पर बैठे रहे.
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