मध्य प्रदेश में विवाद के बीच दो जातियां OBC लिस्ट में शामिल, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 27 से 14 फीसदी आरक्षण का मामला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने OBC आरक्षण 27 से 14 फीसदी कर दिया. इस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया. हालांकि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
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Madhya Pradesh OBC Reservation Controversy: मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी से 14 फीसदी कर दिया गया. इस फैसले को लेकर विवाद चल ही रहा था कि प्रदेश में दो जातियों को ओबीसी दर्जे में शामिल किया गया है. मध्य प्रदेश के अनूपपुर में पनिका और प्रजापति जाति को OBC लिस्ट में रखा गया है.
अनूपपुर में इस फैसले के बाद मांग उठ रही है कि पूरे मध्य प्रदेश में इसे लागू किया जाए. वहीं, 8 सितंबर को जारी सरकार के एक आदेश में पनका/पनिका और कुम्हार (प्रजापति)/कुंभार जातियों से संबंधित OBC सूची की प्रविष्टियों में संशोधन किया गया है. छतरपुर, दतिया, पन्ना, टीकमगढ़, सतना, रीवा, सीधी और शहडोल जिलों प्रजापति और कुम्हार जातियों को अपवाद बताया गया है. ऐसे में एक जिले में किसी जाति को OBC कैटेगरी में रखने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
MP हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आवश्यक संवैधानिक और विधिक कार्यवाही किए जाने का आग्रह किया है. नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में कहा कि OBC वर्ग को सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक न्याय दिलाने तथा शासन-प्रशासन में उसकी समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है.
नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2019 में सरकार ने OBCवर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के संबंध में विधिक प्रावधान किए गए थे. इस विषय में उच्च न्यायालय के संबंधित न्यायिक निर्णयों और वर्तमान विधिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है.
उमंग सिंघार ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण संबंधी प्रावधानों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए और इस दिशा में केंद्र सरकार के सामने पहल की जाए.
उमंग सिंघार ने कहा है कि हाई कोर्ट के संबंधित निर्णयों और लागू संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उपलब्ध विधिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही हो सके.
कांग्रेस ने की मुख्यमंत्री से बड़ी मांग
उमंग सिंघार ने आशा व्यक्त की है कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री इस महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय के विषय पर संवैधानिक मर्यादाओं और विधिक प्रावधानों के अनुरूप जरूरी कदम उठाएंगे, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके.
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दरअसल राज्य में कांग्रेस की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी को आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने का अध्यादेश पारित किया था, जिसे बाद में न्यायालय में चुनौती दी गई. उच्च न्यायालय का भी हाल ही में फैसला आया और उसने सरकार के फैसले को रद्द कर दिया. अब राज्य की मोहन यादव सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लिव पिटिशन (एसएलपी) दायर की है.