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सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए बड़ा कदम, हरियाणा में बदल गया मिड-डे मील, 747 करोड़ होंगे खर्च

Haryana: केंद्र सरकार 222 करोड़ रुपये देगी और राज्य सरकार 525 करोड़ रुपये का योगदान करेगी, इसका मकसद बच्चों को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना हैं , ताकि वे न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत हों , बल्कि पढाई में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकें.

Image Source: Social Media
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Haryana: हरियाणा सरकार ने अपने सरकारी स्कूलों के बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत 747 करोड़ रूपये का बजट मंजूर किया हैं, यह बजट प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत बच्चों में पोषण बढ़ाने के लिए रखा गया हैं. इसमें केंद्र सरकार 222 करोड़ रुपये देगी और राज्य सरकार 525 करोड़ रुपये का योगदान करेगी, इसका मकसद बच्चों को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना हैं,  ताकि वे न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत हों, बल्कि पढाई में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकें.

योजना की समीक्षा और बैठक

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य स्तरीय संचालन और निगरानी समिति (State Level Sanctioning and Monitoring Committee) की बैठक आयोजित की गई. बैठक में पिछले साल की योजना के क्रियान्वयन, खर्च की स्थिति और अगले साल की योजना पर चर्चा की गई .मुख्य सचिव ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मानकों का सख्ती से पालन किया जाए. उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन में किसी भी तरह का समझौता कतई स्वीकार नहीं होगा. इसके लिए जिला और विद्यालय स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा.

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बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन

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इस योजना के तहत बच्चों को जो खाना दिया जाएगा, वह पौष्टिक, स्वादिष्ट और निर्धारित बच्चों के अनुसार होगा. बच्चों से नियमित फीडबैक ( Feedback ) लिया जाएगा ताकि उन्हें पसंद आने वाला और सेहतमंद भोजन सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि धनराशि का सही उपयोग हो और समय पर किस्त जारी की जाए. मौलिक शिक्षा निदेशक मनीता मलिक ने बताया कि अगले वित्त वर्ष में बाल वाटिका से लेकर उच्च प्राथमिक कक्षा तक के लगभग 14 लाख 80 हजार बच्चों को इस योजना में शामिल किया जाएगा. यह योजना न सिर्फ बच्चों को पोषण देती है, बल्कि सरकारी स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने और नामांकन बनाए रखने में भी मदद करती है.

पोषण सामग्री और निगरानी

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बैठक में यह भी तय किया गया कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में दूध, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, मूंगफली पिन्नी, खीर जैसे पोषण तत्व शामिल होंग.शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया और महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने भी इस योजना की अहमियत और बेहतर क्रियान्वयन पर अपनी राय रखी. इस तरह की पहल बच्चों की सेहत और पढ़ाई दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. जब बच्चे पौष्टिक भोजन लेते हैं, तो उनकी ऊर्जा बढ़ती है, ध्यान केंद्रित रहता है और सीखने की क्षमता मजबूत होती है. यह योजना बच्चों को मजबूत और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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