Advertisement
आखिर कौन थीं पद्मजा नायडू जिसे नेहरू भेजते थे लेटर, निशिकांत दुबे ने संसद में जिक्र कर बताया था अय्याश!
जिस महिला का जिक्र कर निशिकांत दुबे ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को अय्याश कहा, वो पद्मजा नायडू कौन हैं जिन्हें नेहरू लेटर लिखा करते थे. यहां तक कि अपने आधिकारिक आवास में पद्मजा कुटीर बनवाया था.
Advertisement
निशिकांत दुबे बीजेपी के फायरब्रांड नेता हैं. वो संसद से लेकर सड़क तक कांग्रेस के साथ-साथ गांधी-नेहरू परिवार की बखिया उधेड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते. इतना ही नहीं उन्होंने कुछ ही दिनों पहले संसद के मॉनसून सत्र के दौरान दावा करते हुए आरोप लगाया कि पूर्व पीएम नेहरू कथित तौर पर अय्याश थे…अय्याश थे.
आपको बता दें कि जिन पंडित नेहरू ने आजाद भारत की पहली बार सत्ता संभाली…जिन नेहरू के नाम पर आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज हो, उन्हें नेहरू को कोई भरे सदन में अय्याश बोल दे, वो भी सदन के पटल से, ये यूं ही नहीं हो सकता.
निशिकांत दुबे ने संसद में नेहरू को अय्याश कहा तो वो किताब भी संसद के सामने रख दी, जिसका हवाला देते हुए उन्होंने नेहरू को अय्याश कहा था, लेकिन बात अभी यहीं खत्म नहीं होती. गांधी-नेहरू परिवार के पीछे लगातार हमलावर रहने वाले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 20 अगस्त को एक और बड़ा खुलासा किया. इस बार तो उन्होंने पद्मजा नायडू के नाम का जिक्र कर नेहरू पर बड़ा खुलासा करते हुए तारीख के साथ लिखा;
Advertisement
“21 अगस्त 1954 को नेहरू जी ने पद्मजा नायडू जी पर दबाव बनाने के लिए पत्र लिखा कि वो प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहते हैं लेकिन इस बात का पता इंदिरा गांधी को भी नहीं होना चाहिए, 1936 में कमला नेहरू जी की मृत्यु के बाद नेहरू जी पद्मजा नायडू से शादी करना चाहते थे, 1936-37 यानि एक साल में नेहरू जी पद्मा जी को लगभग 50 चिट्ठी लिखी, पद्मजा जी ने 92 खत लिखे, इंदिरा जी और विजय लक्ष्मी के दबाव में ये शादी नहीं हो पाई, इंदिरा गांधी जी की आत्मकथा में पुपुल जयकर जी ने ये लिखा है.”
Advertisement
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व पीएम नेहरू के बारे में लिखी गई अपनी बात साबित करने के लिए पुपुल जयकर का भी नाम लिया, जिन्होंने नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की सबसे चर्चित और प्रमाणिक जीवनी लिखी थी...इसी ट्वीट में उन्होंने आगे लिखा;
“पद्मजा जी काफी दिनों तक इलाहाबाद के आनंद भवन और बाद के दिनों में प्रधानमंत्री आवास तीन मूर्ति भवन दिल्ली में रहीं, ज्यादातर प्रकाश तो नेहरू जी के पत्र ही हैं लेकिन इन पत्रों से ये स्पष्ट है कि देशवासियों की चिंता कम और अपने व्यक्तिगत संबंध में नेहरू जी प्रधानमंत्री पद की गरिमा को हमेशा ठेस पहुंचाते रहे, इस पत्र के बाद 1954 से 1956 तक पद्मजा जी तीन मूर्ति में रहीं, उन्हें 1956 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया.”
Advertisement
निशिकांत दुबे ने दावा किया कि सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू नेहरू के आवास तीन मूर्ति में भी लंबे समय तक रही हैं. और जिस घर में रहती थीं. निशिकांत दुबे ने तीन मूर्ति के उस घर की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा;
प्रधानमंत्री नेहरू जी के सरकारी आवास तीन मूर्ति भवन में ये मकान पद्मजा कुटीर है, ये मकान सरकारी आवास में पद्मजा नायडू जी के लिए विशेष तौर पर बनाया गया था, ये आज भी मौजूद है, ये आज की फोटो है.
Advertisement
ऐसे में जरा सोचिये. देश के प्रधानमंत्री मोदी के सरकारी आवास सात लोक कल्याण मार्ग में अगर किसी महिला के लिए कोई खास मकान बना दिया जाए. फिर तो मोदी विरोधी छाती पीटने लगेंगे… और पीएम मोदी के चरित्र का चीर हरण करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे.
वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के मुताबिक देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के सरकारी आवास तीन मूर्ति में पद्मजा नायडू के लिए एक मकान बनाया गया था. और उसे पद्मजा कुटीर नाम दिया गया था. वो भी तब, जब नेहरू तीन मूर्ति में अकेले रहा करते थे, क्योंकि उनकी पत्नी कमला नेहरू का 1936 में ही निधन हो गया था. इतना ही नहीं नेहरू के निजी सचिव MO मथाई ने भी अपनी किताब माई डेज विथ नेहरू में लिखा है.
एमओ मथाई, नेहरू के निजी सचिव ने लिखा, “साल 1946 में जब मैं उनसे इलाहाबाद में मिला, तब वो नेहरू के घर को संभालने में लगी हुई थीं, फिर दिल्ली में उन्होंने यही किया, वह हमेशा नेहरू के बगल के कमरे में रहने पर जोर देती थीं, हर साल नवंबर के पहले हफ्ते में वह हमेशा हैदराबाद से नेहरू के आवास पर आ जाती थीं ताकि 14 नवंबर को नेहरू, 19 नवंबर को इंदिरा और 17 नवंबर को अपना जन्मदिन साथ में मना सकें, इंदिरा को उनका आना अच्छा नहीं लगता था, न ही उनका वहां लंबा ठहरना.”पुपुल जयकर से लेकर एमओ मथाई तक, कई दिग्गज लेखकों ने ये बात स्वीकार की… कि नेहरू और पद्मजा नायडू के बीच निजी रिश्ते थे. और नेहरू तो उनसे शादी भी करना चाहते थे, लेकिन इंदिरा गांधी की नाराजगी की वजह से शादी नहीं की.
Advertisement
कौन हैं पद्मजा नायडू?
यह भी पढ़ें
- देश की ‘भारत कोकिला’ सरोजिनी नायडू की बेटी थीं पद्मजा नायडू.
- 21 साल की उम्र में कांग्रेस में शामिल हुई और भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गईं.
- 1948 में पहली बार पद्मजा नायडू हैदराबाद से सांसद चुनी गई थीं.
- नेहरू ने 1956 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया, 1967 तक इस पद पर रहीं.
- 1962 में पद्मजा नायडू को देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण दिया गया.
- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग चिड़िया घर का नाम पद्मजा नायडू के नाम पर ही है.
- नेहरू की करीबी रहीं पद्मजा नायडू आखिरी सांस तक उन्हीं के सरकारी आवास तीन मूर्ति में रहीं. और 2 मई 1975 को इसी तीन मूर्ति में उनका निधन हुआ.
लेख: धीरेंद्र रावत
एडिट: केशव झा