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संभल मस्जिद को लेकर एक मुस्लिम युवक का बड़ा दावा, मस्जिद नहीं मंदिर है शाही जामा मस्जिद!

संभल में बीते दिनों शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़की. इस दौरान 4 लोगों की मौत हुई. कई पुलिसकर्मी घायल हुए. ये विवाद इसलिए हुआ क्योंकि संभल मस्जिद में मंदिर होने का दावा करते हुए सर्वे करवाया गया. जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष भड़का बवाल हुआ. ऐसे में अब एक मुस्लिम ने सामने आकर दावा किया है कि मस्जिद मंदिर ही था उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी बाबरनामे में ये सच लिखा हुआ है.

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संभल में 24 नवंबर की शाम को जो हिंसा भड़की। हिंसा भड़कने के पीछे मस्जिद में मंदिर होने के दावा। और सर्वे से बौखलाए कुछ मुसलमान रहे। जो दावा कर रहे थे की जानबूझकर मुसलमानों के साथ साथ उनकी मस्जिद को निशाना बनाया जा रहा है।मस्जिद में मंदिर होने का दावा कर झूठ फैलाया जा रहा है। लेकिन इस बीच संभल के एक मुसलमान ने दंगाईयों के साथ साथ उन बवाली नेताओं को आईना दिखाने का काम किया। जो सर्वे से डरे हुए थे।योगी आदित्यनाथ के साथ आए संभल के एक मुसलमान ने लोगों को मस्जिद के अंदर का स्याह सच बाहर निकालकर रख दिया है। हेडलाइन इंडिया नाम के एक चैनल को बयान देते हुए साफ़ साफ़ और खुले शब्दों में कहा 


ये शख़्स कौन है ये तो मालूम नहीं। लेकिन इसके मस्जिद में मंदिर वाले दावों ने संभल में सनसनी फैला दी है। सपा से लेकर कांग्रेस तक की टेंशन बढ़ा दी है। क्योंकि ये मुस्लिम शख्स सिर्फ़ मस्जिद का सच ही बाहर नहीं ला रहा। बल्कि बाबर नामे का हवाला देकर पूरा इतिहास बता रहा है।खैर इस युवक के दावे पर मुस्लिम कट्टरपंथी तो बौखलाएँगे ही। लेकिन समाजवादी पार्टी से लेकर कांग्रेसी नेता भी घबरा जाएंगे। क्योंकि मुस्लिम युवक ने साफ़ साफ़ कहा है कि संभल में जो कुछ हुआ उसके पीछे सपा और कांग्रेस नेताओं का हाथ है। सपा और कांग्रेस के नेताओं ने लोगों को भड़काने का काम किया है। पर्दे के पीछे से माहौल बनाने का काम किया। खैर इस युवक के दावे से पहले ही संभल हिंसा में लोगों को भड़काने के आरोप में सांसद जियाउर्रहमान बर्क फँस हुए हैं।उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज हुई है। खैर ये बात ये मुस्लिम युवक ही नहीं। बल्कि जब  मुल्ला अफ़रोज़ नाम के दंगाई को गिरफ्तार किया गया। तो उसने भी क़बूल किया कि हिंसा में नेताओं की भी साज़िश थी सूत्रों के मुताबिक़ मुल्ला अफ़रोज़ ने तो पुलिस के आगे यहाँ तक खुलासा किया ।

24 नवंबर को दूसरे साथी को शारिक साटा एक ऐप पर कॉल कर कहा था कि नेता भीड़ जमा करा रहे हैं नेताओं की ओर से पूरी सपोर्ट है और हरी झंडी मिल गई है इसलिए 10 से 20 पुलिसकर्मियों और आम लोगों को मार दो इससे पुलिस प्रशासन डर जाएगा और शासन भी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ ही कार्रवाई करेगा।

हालांकि ये नेता कौन हैं।किससे इन दंगाईयों की बातचीत हो रही थी उस नाम का खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन ये मामला अपने आप में और ज़्यादा हाईप्रोफ़ाइल बन गया है। एक तरफ मुस्लिम युवक खुलासा कर रहा है कि शाही जामा मस्जिद मंदिर था। राजनीति के तहत दंगे भड़के और दूसरी तरफ दंगाई ने ही क़बूल लिया है नेता इस दंगे में शामिल थे। तो ऐसे में अब सीएम योगी और यूपी पुलिस दंगों के असली खिलाड़ी को बाहर निकालकर लाएगी।और सख़्ती के साथ सबक सिखाएगी।
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