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UP में खत्म होगा जल संकट, नालियों का पानी बनेगा खेती और उद्योग का सहारा, CM योगी का मास्टर प्लान

CM Yogi: शहर, गांव और उद्योग हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि पानी बचे भी और विकास भी रुके नहीं. यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है.

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02 Jan 2026
( Updated: 02 Jan 2026
10:43 AM )
UP में खत्म होगा जल संकट, नालियों का पानी बनेगा खेती और उद्योग का सहारा, CM योगी का मास्टर प्लान
Image Source: Social Media

Water Crisis to End in UP:  उत्तर प्रदेश में पानी की बढ़ती कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक लंबी और ठोस योजना तैयार की है. इस योजना का सीधा मकसद है कि आने वाले समय में प्रदेश को जल संकट से स्थायी राहत मिले और विकास भी बिना रुकावट चलता रहे. सरकार ने तय किया है कि जो पानी अभी नालियों और नदियों में बेकार चला जाता है, यानी वेस्ट वॉटर, उसे साफ करके दोबारा काम में लाया जाएगा. लक्ष्य साफ है साल 2030 तक 50 प्रतिशत और 2035 तक 100 प्रतिशत वेस्ट वॉटर को ट्रीट कर इस्तेमाल में लाना.

बेकार पानी अब नहीं जाएगा बर्बाद

आज की स्थिति यह है कि शहरों और कस्बों से निकलने वाला गंदा पानी बिना उपयोग के बर्बाद हो जाता है. इससे एक तरफ पानी की कमी बढ़ती है और दूसरी तरफ पर्यावरण को नुकसान होता है. योगी सरकार की इस योजना से यह तस्वीर बदलेगी. अब यही गंदा पानी साफ होकर खेती, उद्योग और शहरों के कई कामों में इस्तेमाल किया जाएगा. इससे नदियों पर दबाव घटेगा और भूजल भी सुरक्षित रहेगा.

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वेस्ट वॉटर बनेगा कमाई और विकास का जरिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ विजन है कि वेस्ट वॉटर को बोझ नहीं बल्कि विकास का साधन बनाया जाए. सरकार इसके लिए एक पूरी नीति बना रही है, जिसके तहत साफ किए गए पानी का इस्तेमाल नगर निगमों के काम, फैक्ट्रियों, खेतों की सिंचाई और घरों के गैर-पीने वाले कामों में किया जाएगा. इससे ताजे पानी की बचत होगी और जल संतुलन भी बना रहेगा.

तीन चरणों में लागू होगी पूरी योजना

राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों के अनुसार, यह योजना एक साथ नहीं बल्कि तीन चरणों में लागू की जाएगी, ताकि हर क्षेत्र में सही तरीके से काम हो सके. पहले चरण (2025 से 2030) में उन इलाकों पर फोकस होगा जहां पहले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं. यहां 50 प्रतिशत वेस्ट वॉटर को दोबारा इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है.

2035 तक पूरा होगा बड़ा लक्ष्य

दूसरे चरण में, यानी 2030 से 2035 के बीच, पहले चरण वाले इलाकों में ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि पूरा 100 प्रतिशत वेस्ट वॉटर साफ करके दोबारा उपयोग किया जा सके. इसके बाद तीसरा चरण उन क्षेत्रों के लिए होगा जहां अभी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. वहां धीरे-धीरे पहले 30 प्रतिशत, फिर 50 प्रतिशत और अंत में 100 प्रतिशत वेस्ट वॉटर के उपयोग की व्यवस्था की जाएगी.

किसानों, उद्योगों और शहरों को होगा सीधा फायदा


इस योजना का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा, जिन्हें सिंचाई के लिए पानी की कमी से जूझना पड़ता है. ट्रीटेड वॉटर से खेती आसान होगी. उद्योगों को भी पानी की बेहतर उपलब्धता मिलेगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा. वहीं शहरों में सड़क सफाई, पार्कों की सिंचाई और अन्य गैर-पीने वाले कामों के लिए पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी.

पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा


योगी सरकार की यह पहल सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. इससे नदियां साफ रहेंगी, जमीन के अंदर का पानी बचेगा और पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी. जल संरक्षण के साथ-साथ यह योजना प्रदेश को सतत विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का काम करेगी.

यूपी बन रहा जल प्रबंधन का मॉडल


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अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से जल संरक्षण और जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल बनता जा रहा है. शहर, गांव और उद्योग हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि पानी बचे भी और विकास भी रुके नहीं. यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है.

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