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विजय थलापति ने छात्रों को ‘कॉकरोचों’ से दूर रहने का दिया आदेश, CJP के मुखिया को लगी मिर्ची

CJP: शिक्षा विभाग की ओर से 17 अगस्त को जारी किए गए इस पत्र में अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों से कहा गया था कि वे स्कूल-कॉलेज के छात्रों और युवाओं को वामपंथी संगठनों और CJP जैसे संगठनों के बैनर तले होने वाले विरोध प्रदर्शन, आंदोलन और हड़ताल में शामिल होने से रोकें.

Image Source: IANS
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Tamil-Nadu: तमिलनाडु मे छात्रों और युवाओं को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए जारी किया गया एक आदेश अब वापस ले लिया गया है. इस आदेश को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा. शिक्षा विभाग की ओर से 17 अगस्त को जारी किए गए इस पत्र में अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों से कहा गया था कि वे स्कूल-कॉलेज के छात्रों और युवाओं को वामपंथी संगठनों और CJP जैसे संगठनों के बैनर तले होने वाले विरोध प्रदर्शन, आंदोलन और हड़ताल में शामिल होने से रोकें. आदेश सामने आने के बाद इसे लेकर सवाल उठने लगे कि आखिर छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध या राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से कैस रोका जा सकता है. विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा निदेशालय ने अपना यह आदेश वापस ले लिया.

क्या कहा गया था आदेश में?

सरकार की ओर से जारी निर्देश में अधिकारियो और शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों और युवाओं पर नजर रखने तथा उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई थी. खास तौर पर वामपंथी संगठनों और CJP के बैनर तले होने वाले आंदोलनों और प्रदर्शनों का जिक्र किया गया था. सरकार का मकसद यह बताया गया कि छात्र अपनी पढ़ई और भविष्य पर ध्यान दें और राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होकर अपना समय न गंवाएं. हालाकि, आदेश की भाषा और उसमें खास संगठनों का नाम लिए जाने के कारण यह मामला तुरंत राजनीतिक विवाद में बदल गया.

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CJP ने जताई कड़ी नाराजगी

आदेश सामने आने के बाद CJP (Cocokroach Janta Party) की ओर से इसका जोरदार विरोध किया गया. संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के इस कदम को निंदनीय और असंवैधानिक बताया. उनका कहना था कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने से रोकना सही नहीं है. CJP ने सवाल उठाया कि अगर किसी छात्र या युवा को किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने का अधिकार है, तो उसे केवल किसी संगठन के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कैसे रोका जा सकता है. इस विरोध के बीच सरकार पर आदेश को लेकर दबाव बढ़ता गया.

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बीजेपी ने किया था सरकार के फैसले का समर्थन

जहां विपक्ष और CJP ने इस आदेश पर सवाल उठाए, वहीं बीजेपी ने सरकार के कदम का समर्थन किया था. BJP नेता विनोज पी सेल्वम ने वामपंथी संगठनों और CJP पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि ऐसे संगठन छात्रों को आंदोलनों में आगे कर देते हैं और प्रदर्शन खत्म होने के बाद नेता अपने घर चले जाते हैं, जबकि छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि छात्रों को प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए.

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आखिर क्यों वापस लेना पड़ा आदेश?

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आदेश को लेकर बढ़ते विवाद और विरोध के बाद शिक्षा निदेशालय ने 17 अगस्त को जारी निर्देश को वापस ले लिया. इस फैसले के साथ फिलहाल सरकार ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की है. पूरे मामले में एक तरफ सरकार की चिंता छात्रों को राजनीतिक आंदोलनों से दूर रखने की थी, तो दूसरी तरफ विरोध करने के अधिकार और छात्रों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हुए. आदेश वापस लिए जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार के लिए एक कदम पीछे हटने के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, यह मामला एक बार फिर यह बहस जरूर खड़ी करता है कि छात्रों को राजनीति और आंदोलनों से कितनी दूरी पर रखा जाना चाहिए और उनके अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

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