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‘ये ध्वजा बता रही हिंदुस्तान की ताकत…’, गुजरात से PM मोदी की हुंकार, बोले- जहां दफन हो गया औरंगजेब, वहीं खड़ा है सोमनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित स्वाभिमान पर्व में शिरकत की, 108 अश्वों की शौर्य यात्रा में भाग लिया और पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हजार साल की आस्था, संघर्ष और भारत के गौरव का प्रतीक है.

‘ये ध्वजा  बता रही हिंदुस्तान की ताकत…’, गुजरात से PM मोदी की हुंकार, बोले- जहां दफन हो गया औरंगजेब, वहीं खड़ा है सोमनाथ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित स्वाभिमान पर्व के कार्यक्रम में शामिल हुए. इस अवसर पर उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया. यह यात्रा उन वीर योद्धाओं के सम्मान में आयोजित की गई थी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. शौर्य यात्रा को वीरता, साहस और बलिदान की अमिट पहचान के रूप में देखा जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की और इसके बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों को संबोधित किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर के श्रद्धालुओं को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक सुखद संयोग है कि आज सोमनाथ मंदिर की स्वाभिमान यात्रा के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं. साथ ही 1951 में हुए इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं. उन्होंने का कि 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' एक हजार साल पहले हुए विध्वंस के स्मरण के लिए ही नहीं है. ये पर्व हजार साल की यात्रा का पर्व है. ये हमारे भारत के अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है.

पुरखों ने लगाई थी जान की बाजी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है, यह विजय और पुनर्निमाण का है. यह हमारे पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का इतिहास है. आक्रांता आते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से स्थापित होता रहा, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है. उन्होंने कहा, 'एक हजार साल पहले इसी जगह पर हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगा दी थी. अपनी आस्था, अपने विश्वास और भगवान शिव के लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। हजार साल पहले वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है.'

PM मोदी ने किया औरंगजेब का जिक्र 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है. वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं, उसके नाम में ही 'सोम' अर्थात् 'अमृत' जड़ा हुआ है. उसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है. उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है जो कल्याणकारी भी है और 'प्रचंड तांडव: शिव:' शक्ति का स्रोत भी है.'

 मजहबी आक्रांता इतिहास हो गए 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान महादेव उनका एक नाम मृत्युंजय भी है, मृत्युंजय जिसने मृत्यु को भी जीत लिया, जो स्वयं काल स्वरूप है. सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है. ये इतिहास विजय और पुनर्निर्माण का है. उन्होंने कहा कि यह समयचक्र है, सोमनाथ को ध्वस्त करने की मंशा लेकर आए मजहबी आक्रांता आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट कर रह गए हैं और सोमनाथ मंदिर उसी विशाल समुद्र के किनारे गगनचुंबी धर्मध्वजा को थामे खड़ा है.

सोमनाथ के विरोधियों को हराना होगा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अगर सोमनाथ पर हमले केवल धन लूटने के इरादे से किए गए होते, तो एक हजार साल पहले पहली लूट के बाद ही यह सिलसिला थम जाता. लेकिन इतिहास गवाह है कि इस पवित्र स्थल पर बार-बार आक्रमण किए गए. उन्होंने कहा कि नफरत और क्रूरता के इस सच को लंबे समय तक छिपाने की कोशिश की गई. सच्चा धार्मिक व्यक्ति कभी भी ऐसी कट्टरता और हिंसा का समर्थन नहीं करता. पीएम मोदी ने आगे कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों ने इस अतिवादी सोच के सामने हमेशा समझौता किया और सच से मुंह मोड़ा. आजादी के बाद भी जब देश गुलामी की बेड़ियों से बाहर निकला और सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने के प्रयास किए गए. वर्ष 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के सोमनाथ आगमन पर भी आपत्ति जताई गई थी. उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार का विरोध करने वाली शक्तियां उस दौर में भी सक्रिय थीं और आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे तलवारों के साथ सामने नहीं आतीं, बल्कि अपने तौर-तरीके बदल चुकी हैं. प्रधानमंत्री ने चेताया कि ऐसी ताकतें आज भी भारत के खिलाफ साजिशें रच रही हैं, इसलिए देश को हर समय सतर्क रहना होगा.

भारत ने दुनिया को दिया अहम संदेश 

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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सभ्यता की मूल भावना आस्था और निर्माण पर आधारित रही है, न कि घृणा और विनाश पर. सत्ता का उद्देश्य कभी भी अहंकार में डूबकर सब कुछ खत्म करना नहीं होता. उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास यह संदेश देता है कि सृजन और संस्कार की राह भले ही लंबी हो, लेकिन वही टिकाऊ और स्थायी होती है. जो सभ्यताएं दूसरों को नष्ट कर आगे बढ़ने की सोचती हैं, वे समय के साथ खुद ही इतिहास बन जाती हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया को तलवार के बल पर जीतना नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास से दिल जीतना सिखाया है. उनके अनुसार, सोमनाथ का एक हजार वर्षों का संघर्ष और पुनर्निर्माण हमें आने वाले एक हजार वर्षों के लिए संकल्प और ऊर्जा प्रदान करेगा.

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