BJP की जीत का ‘गुमनाम हीरो'... जो कैमरे से दूर रहकर करता है बड़ा खेल, UP से बंगाल तक दिलाई ऐतिहासिक जीत, कौन है अमित शाह का ‘सीक्रेट सुपरस्टार’?
Sunil Bansal: इस पूरी सफलता के पीछे एक ऐसा नाम भी है जो अक्सर मीडिया की सुर्खियों से दूर रहता है, लेकिन संगठन को मजबूत बनाने में उसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.ऐसा रणनीतिकार माना जाता है जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं. उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है जो बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने में माहिर हैं.
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Amit Shah: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत कोई अचानक हुई घटना नहीं है. इसके पीछे कई सालों की मेहनत, मजबूत रणनीति और हजारों कार्यकर्ताओं की लगातार मेहनत छिपी हुई है .BJP ने लंबे समय से पश्चिम बंगाल को एक बड़े राजनितिक लक्ष्य के रूप में देखा था. 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद पार्टी ने उन राज्यों पर खास ध्यान देना शुरू किया जहां उसकी पकड़ कमजोर थी , जैसे पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब..कई चुनावों में उम्मीद के मुताबिक सफलकता नहीं मिली ,लेकिन पार्टी ने हार मानी. BJP की ख़ास बात यही रही कि उसके नेता और कार्यकर्ता लगातार जमीन पर काम करते रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने बंगाल में संगठन को मजबूत करने का काम लगातार जारी रखा..इसी मेहनत का नतीजा अब बड़ी जीत के रूप में सामने आया.
सुनील बंसल कौन हैं?
इस पूरी सफलता के पीछे एक ऐसा नाम भी है जो अक्सर मीडिया की सुर्खियों से दूर रहता है, लेकिन संगठन को मजबूत बनाने में उसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. यह नाम है Sunil Bansal. सुनील बंसल को BJP का ऐसा रणनीतिकार माना जाता है जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं. उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है जो बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने में माहिर हैं. उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश में BJP को मजबूत बनाया और बाद में ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई. शांत स्वभाव और मजबूत संगठनात्मक समझ के कारण वे अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
सुनील बंसल मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी. छात्र जीवन में ही उनकी संगठन क्षमता दिखाई देने लगी थी. वर्ष 1989 में वे राजस्थान यूनिवर्सिटी के महासचिव चुने गए. इसके बाद 1990 में वे RSS के प्रचारक बने. प्रचारक के रूप में काम करते हुए उन्होंने संगठन चलाने और कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया. बाद में उन्हें BJP में जिम्मेदारी दी गई और यहीं से उनका राजनीतिक सफर तेजी से आगे बढ़ा.
अमित शाह के करीबी कैसे बने?
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले RSS ने सुनील बंसल को BJP में भेजा. उस समय उन्हें उत्तर प्रदेश का संयुक्त संगठन मंत्री बनाया गया. उसी दौरान अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे। उत्तर प्रदेश BJP के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य था और पार्टी वहां बड़ी जीत की तैयारी कर रही थी. सुनील बंसल ने अपने अनुशासन, मेहनत और संगठन को मजबूत करने की क्षमता से अमित शाह को काफी प्रभावित किया. उन्होंने बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का काम किया. “मेरा बूथ सबसे मजबूत” और “पन्ना प्रमुख” जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारने में उनकी बड़ी भूमिका रही. उनका फोकस सिर्फ बड़े नेताओं पर नहीं बल्कि छोटे कार्यकर्ताओं तक संगठन को मजबूत करने पर था.
उत्तर प्रदेश में बड़ी सफलता
सुनील बंसल की रणनीति का असर 2014 के लोकसभा चुनाव में साफ दिखाई दिया। BJP ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल कर इतिहास बना दिया. इसके बाद पार्टी में उनकी अहमियत और बढ़ गई. उन्हें उत्तर प्रदेश का संगठन मंत्री बना दिया गया. 2017 के विधानसभा चुनाव में BJP की बड़ी जीत के पीछे भी उनकी रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना गया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई. लगभग आठ वर्षों तक उन्होंने उत्तर प्रदेश में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा. योगी आदित्यनाथ सरकार और पार्टी संगठन के बीच समन्वय बनाने में भी उनका बड़ा योगदान रहा.
दिल्ली में नई जिम्मेदारी
2022 में उत्तर प्रदेश में BJP की दोबारा सरकार बनने के बाद सुनील बंसल को दिल्ली बुलाया गया। पार्टी अध्यक्ष Jagat Prakash Nadda की टीम में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। इसके साथ ही उन्हें पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई। यह जिम्मेदारी आसान नहीं थी क्योंकि इन राज्यों में BJP को संगठनात्मक रूप से और मजबूत होने की जरूरत थी। लेकिन बंसल ने यहां भी अपनी रणनीति और मेहनत से पार्टी को नई ताकत दी।
ओडिशा और तेलंगाना में भी दिखा असर
ओडिशा में लंबे समय से Naveen Patnaik और उनकी पार्टी का दबदबा था. लेकिन सुनील बंसल ने वहां BJP का संगठन मजबूत किया. बूथ स्तर तक नेटवर्क तैयार किया गया और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि 2024 के चुनाव में BJP ने शानदार प्रदर्शन किया और राज्य में पहली बार मजबूत सरकार बनाने में सफलता हासिल की. इसी तरह तेलंगाना में भी BJP ने अपनी सीटें बढ़ाईं. वहां पार्टी पहले जितनी मजबूत नहीं थी, लेकिन लगातार मेहनत और सही रणनीति से BJP ने अपनी स्थिति बेहतर कर ली.
बंगाल में हार से सीखी सीख
2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में BJP को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. लेकिन सुनील बंसल ने इसे हार मानने के बजाय सीख के रूप में लिया. उन्होंने तुरंत 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी. सबसे पहले पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को खत्म करने पर काम किया गया. नाराज नेताओं को मनाया गया और राज्य नेतृत्व तथा केंद्रीय नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बनाया गया. उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया. हर क्षेत्र के जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की लोकप्रियता का गहराई से अध्ययन किया गया. डेटा और माइक्रो मैनेजमेंट का इस्तेमाल करके चुनावी रणनीति तैयार की गई.
नाराज नेताओं को साथ लाने की कोशिश
किसी भी चुनाव में पार्टी की एकजुटता बहुत जरूरी होती है. सुनील बंसल ने इस बात को अच्छी तरह समझा. उन्होंने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की जो पार्टी से नाराज चल रहे थे. RSS और BJP के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी खास ध्यान दिया गया. अमित शाह के बंगाल दौरे के दौरान भी बंसल लगातार उनके साथ रहे और हर निर्देश को जमीन पर लागू करवाने का काम किया. यही वजह रही कि पार्टी के अंदर पहले से ज्यादा एकजुटता दिखाई दी.
जीत के पीछे संगठन की ताकत
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पश्चिम बंगाल में BJP की सफलता सिर्फ बड़े भाषणों या चुनावी रैलियों की वजह से नहीं आई. इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत संगठन की मेहनत रही. बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, हर वोटर तक पहुंचना, स्थानीय मुद्दों को समझना और लगातार संपर्क बनाए रखना, यही BJP की रणनीति का सबसे मजबूत हिस्सा रहा. सुनील बंसल जैसे नेता पर्दे के पीछे रहकर इसी काम को मजबूत करते रहे. यही कारण है कि आज उनकी चर्चा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों तक हो रही है.
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