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Hydrogen Train: देश को मिली पहली हाइड्रोजन ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जानिए किराए से लेकर रूट तक सबकुछ

Hydrogen Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. यह हरियाणा के जिंद-सोनीपत रूट पर चलेगी और स्वच्छ, शून्य-उत्सर्जन रेल तकनीक को बढ़ावा देगी.

Image source: Narender Modi/Youtube
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Hydrogen Train: भारत ने रेलवे के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चलेगी और इसे पर्यावरण के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि यह ट्रेन डीजल की जगह हाइड्रोजन ईंधन से चलेगी, जिससे प्रदूषण काफी कम होगा. ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों ने भी इसे लेकर खुशी जाहिर की और कहा कि यह आने वाले समय में हरित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा.

26 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री मोदी के हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब दौरे के दौरान कई विकास योजनाओं की शुरुआत भी की गई. इस दौरान 26 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई और कई योजनाएं देश को समर्पित की गईं. इनमें हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ सबसे खास रहा, क्योंकि यह भारत की आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल रेलवे व्यवस्था की नई शुरुआत मानी जा रही है.

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किस रूट पर चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन और कितना होगा किराया?

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर चलेगी. करीब 89 किलोमीटर लंबे इस रूट को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिविजन के अंतर्गत रखा गया है. नियमित संचालन के दौरान यह ट्रेन सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और करीब दो घंटे बाद सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी. वापसी में यह ट्रेन सुबह 10:30 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर करीब 1 बजे जींद पहुंचेगी. ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. हाइड्रोजन ट्रेन का किराया 5 से 26 रुपये रखा गया है. 

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12 स्टेशनों पर रुकेगी हाइड्रोजन ट्रेन

जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन रास्ते में कई छोटे-बड़े स्टेशनों पर यात्रियों को सुविधा देगी. ट्रेन कुल 12 स्टेशनों पर रुकेगी.
इन स्टेशनों में शामिल हैं:
जींद सिटी
पांडु पिंडारा
ललित खेड़ा
भांबेवा
ईशापुर खेरी
बुटाना
खंदराय
गोहाना
राभड़ा
लाठ
मोहना
बड़वासनी

10 कोच वाली ट्रेन, 2600 यात्रियों की क्षमता

हाइड्रोजन ट्रेन को खास तकनीक के साथ तैयार किया गया है. इसमें कुल 10 कोच होंगे, जिनमें 2 ड्राइविंग पावर कोच और 8 यात्री कोच शामिल हैं. ट्रेन में करीब 2600 यात्री सफर कर सकेंगे. रेलवे के अनुसार, यह दुनिया की सबसे ज्यादा यात्री क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल होगी. अभी तक ज्यादातर देशों में चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेनें छोटे रूट पर और कम कोच के साथ संचालित होती हैं.

डीजल ट्रेन की जगह हाइड्रोजन तकनीक

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यह ट्रेन पहले से मौजूद डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन को आधुनिक तकनीक के साथ बदलकर तैयार की गई है. इसमें 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है. हाइड्रोजन ईंधन से बिजली पैदा करने के लिए फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से पानी की भाप निकलती है, जिससे यह पारंपरिक डीजल ईंधन की तुलना में ज्यादा साफ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बन जाता है.

हाइड्रोजन ट्रेन से प्रदूषण होगा कम

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका कम प्रदूषण करना है. डीजल ट्रेनों में जहां धुआं और हानिकारक गैसें निकलती हैं, वहीं हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में उत्सर्जन बेहद कम होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी ट्रेनें कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

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जींद में बनाया गया खास रीफ्यूलिंग सिस्टम

इस ट्रेन को चलाने के लिए हरियाणा के जींद में हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग की विशेष सुविधा तैयार की गई है. यहां हाइड्रोजन गैस को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने और ट्रेन में भरने की व्यवस्था की गई है. सुरक्षा के लिए सेंसर, निगरानी प्रणाली और लीकेज जांच की आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि ट्रेन का संचालन पूरी तरह सुरक्षित रहे.

हाइड्रोजन ट्रेन की रेस में भारत भी शामिल

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हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे पहले जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेन चल रही हैं. भारत की यह पहल रेलवे को ज्यादा आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. आने वाले समय में ऐसी तकनीकें देश के परिवहन सिस्टम को नई पहचान दे सकती हैं.

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