फडणवीस फैक्टर से घिरे ठाकरे बंधु... BMC चुनाव में बीजेपी-शिवसेना इस तरह बढ़ी मुश्किलें
बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मी तेज है. बीजेपी-शिवसेना की मजबूत महायुति से उद्धव और राज ठाकरे की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 75 हजार करोड़ बजट वाली बीएमसी में सत्ता की लड़ाई अहम है.
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Maharashtra BMC Election: महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के नेतृत्व में बीजेपी और शिवसेना के मजबूत तालमेल ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की चुनौतियां बढ़ा दी हैं. बाल ठाकरे की विरासत के सहारे मुंबई में अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश कर रहे ठाकरे बंधुओं ने एक साथ आने का फैसला जरूर किया है, लेकिन जमीनी हकीकत उनके लिए आसान नहीं दिख रही है. खास बात यह है कि कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने के फैसले ने भी उद्धव और राज की रणनीति को कमजोर किया है.
एशिया की सबसे अमीर नगर निगमों में BMC
बीएमसी (BMC) को एशिया की सबसे अमीर नगर निगमों में गिना जाता है. करीब 75 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली इस नगर निगम पर हर राजनीतिक दल की नजर रहती है. मुंबई की सत्ता का रास्ता बीएमसी से होकर गुजरता है और यही वजह है कि यहां की लड़ाई बेहद अहम मानी जाती है. साल 2017 में हुए पिछले चुनाव में तब की एकजुट शिवसेना और बीजेपी ने 227 सदस्यीय निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. उस समय शिवसेना ने 84 और बीजेपी ने 82 सीटें जीती थीं. मेयर भी शिवसेना का बना था. हालांकि, अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. शिवसेना दो हिस्सों में बंट चुकी है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को चुनाव आयोग से असली शिवसेना का दर्जा मिला हुआ है और यह गुट बीजेपी (BJP) के साथ महायुति में शामिल है. इसी बदले हुए राजनीतिक समीकरण ने उद्धव ठाकरे को अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ आने के लिए मजबूर कर दिया. दोनों नेता जानते हैं कि अलग-अलग रहकर बीएमसी की जंग जीतना बेहद मुश्किल होगा. हालाँकि महायुति की बात करें तो बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (Shivsena) एक साथ हैं, लेकिन अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. वहीं गठबंधन में शामिल न किए जाने से नाराज रामदास आठवले ने अपने 38 उम्मीदवार उतार दिए हैं. हालांकि, बाकी सीटों पर उनकी पार्टी महायुति के साथ ही खड़ी नजर आ रही है. कुल मिलाकर महायुति भीतर से मजबूत और संगठित दिखाई दे रही है.
देवेंद्र फडणवीस ने दी थी प्रतिक्रिया
ठाकरे बंधुओं के एक होने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी तीखा तंज कसा है. उन्होंने कहा था कि ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो रूस और यूक्रेन एक साथ आ गए हों या व्लादीमीर पुतिन और जेलेंस्की बातचीत कर रहे हों. फडणवीस ने कहा कि ये दोनों पार्टियां अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं और बार-बार अपनी भूमिका बदल चुकी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति की वजह से इनका वोट बैंक खिसक चुका है. फडणवीस का कहना था कि सिर्फ अस्तित्व बचाने के लिए साथ आने से चुनाव नहीं जीते जाते और इन दोनों भाइयों के पास अब कोई ठोस विचारधारा नहीं बची है.
क्या सच में बिखर गई महाविकास अघाड़ी?
दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी भी पूरी तरह बिखरी नजर आ रही है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी और राज ठाकरे की मनसे साथ हैं, लेकिन कांग्रेस ने अलग राह चुन ली है और वह प्रकाश आंबेडकर की वीबीए (VBA) के साथ चुनाव लड़ रही है. मुंबई से बाहर की तस्वीर देखें तो राज्य की 29 नगर निगमों में से आधी में बीजेपी और शिवसेना साथ हैं. बाकी जगहों पर दोस्ताना मुकाबले की स्थिति है, जबकि महाविकास अघाड़ी के दल कई स्थानों पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं.
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बताते चलें कि बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति ज्यादा संगठित और मजबूत दिख रही है. वहीं ठाकरे बंधुओं का साथ आना भावनात्मक रूप से भले मजबूत लगे, लेकिन सियासी गणित के लिहाज से उनके सामने राह काफी मुश्किल नजर आ रही है. आने वाले महीनों में बीएमसी की यह जंग मुंबई की राजनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है.
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