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ISRO में ताबड़तोड़ इस्तीफे, चंद दिनों के अंदर 100-120 वैज्ञानिकों के जाने से हड़कंप, मोदी सरकार ने लिया बड़ा एक्शन
ISRO के अहम प्रोजेक्ट्स से ताबड़तोड़ इस्तीफ़ों, वैज्ञानिकों के छोड़ने की ख़बरों से हड़कंप मच गया है. अब इसके बाद मोदी सरकार को सख्त फैसला लेना पड़ा है. अब किसी के लिए इसरो छोड़ना आसान नहीं होगा.
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देश की आन-बान-शान इसरो में अहम प्रोजेक्ट्स जैसे कि गगनयान आदि से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स के ताबड़तोड़ इस्तीफे, स्वैच्छिक रिटायरमेंट से बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. आने वाले समय में कुछ बड़े मिशन को अंजाम देने जा रहे इसरो के लिए ये अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है. ऐसे में अब केंद्र सरकार और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस को पूरे मामले में दख़ल देने के साथ-साथ सख़्त फैसला लेना पड़ा है.
ISRO में ताबड़तोड़ इस्तीफे, एक्शन में मोदी सरकार
सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक़ डिपार्टमेंट ऑफ साइंस (DoS) ने मिशन और प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स के पावर बहुत हद तक सीज कर लिए गए हैं. DoS द्वारा 14 जुलाई को जारी एक नए इंटरनल मेमोरैंडम के ज़रिए, गगनयान और दूसरे अहम मिशन पर काम करने वाले वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक रिटायरमेंट और इस्तीफ़े से जुड़े नियमों को कड़ा कर दिया गया है.
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सूत्रों की मानें तो सरकार को हाल के दिनों में, बहुत कम समय के अंदर 100 से 120 वैज्ञानिकों के इस्तीफे के कारण आनन-फ़ानन में ये बड़ा फैसला लिया गया. हालांकि DoS की ओर से इस्तीफ़ा देने वालों की संख्या का खुलासा नहीं किया गया है और ना ही इसकी पुष्टि की गई है. इसरो सूत्रों ने भी स्वीकार किया कि उनके लिए भी इतनी भारी संख्या में इस्तीफा देना चौंकाने वाला है और नंबर्स बड़े हैं.
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100-120 इस्तीफों से मोदी सरकार के कान खड़े
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक़ अकेले URSC से लगभग 80 लोगों ने नौकरी छोड़ी है. VSSC से कम से कम 20 लोग चले गए हैं. इसके लिहाज़ से देखें तो अन्य दूसरे विभागों को जोडे़ं तो यह संख्या कुल मिलाकर 120 तक हो सकती है. वहीं कई ऐसे और आवेदन हैं, जिनपर संभवतः अभी विचार चल रहा है.
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ख़बर के मुताबिक़ इस्तीफा देने वालों में सबसे अहम नाम है विक्टर जोसेफ का, जो VSSC के LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर अहम जिम्मेदारी सँभाल रहे थे. वहीं SpaDeX प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने URSC से इस्तीफ़ा दे दिया. चंद्रयान-3 का हिस्सा रहे एक बहुत होनहार युवा ने भी नौकरी छोड़ दी है. सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है.
हालिया इस्तीफों की लहर पर क्या बोले इसरो चेयरमैन
इस्तीफ़ों की बात स्वीकार करते हुए ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि ISRO इससे निपटने के लिए तैयार है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक़ नारायणन ने कहा कि ‘बहुत से लोग जाते हैं, लेकिन यह हर ऑर्गनाइज़ेशन का हिस्सा है. यह कदम [मेमोरैंडम] सिर्फ़ लोगों को बनाए रखने के लिए नहीं है, बल्कि यह पक्का करने के लिए भी है कि अहम प्रोजेक्ट्स पर अचानक कोई बुरा असर न पड़े. लेकिन अगर कोई फिर भी जाता है, तो कोई और ज़िम्मेदारी संभाल लेगा. हम इसका ध्यान रख रहे हैं.’
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इसरो जैसे बड़े संगठन, जहां हजारों लोग काम करते हैं, आंकड़ों के मुताबिक़ ये आंकड़ा क़रीब 14 से 15 हज़ार तक पहुंचती है, वहां से 100 से 120 का जाना संख्या कम लग सकती है, लेकिन जो लोग गए उनकी जिम्मेदारियां बड़ी थीं, वो जिससे जुड़े थे, वो प्रोजेक्ट्स बड़े थे. कहा जा रहा है कि ये इस्तीफे स्ट्रैटेजिक मिशंस में हुए हैं. आपको बता दें कि पिछले फाइनेंशियल ईयर के आखिर में URSC में 1,339 कर्मचारी थे, जबकि ISRO के सबसे बड़े सेंटर VSSC में 4,577 कर्मचारी थे. चिंता अहम मिशन से लोगों के जाने को लेकर है.
जिम्मेदारियों की बात करें दो जोसेफ़ के अलावा चंद्रयान-3 के वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली का नाम इस लिस्ट में अहम हैं, जो मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर (सिमुलेशन) हैं. आदित्य ने उस टीम का नेतृत्व किया जिसने 1 लाख से ज़्यादा टेस्ट से लगभग 25 टेराबाइट डेटा तैयार किया; यह कोशिश मून लैंडिंग सीक्वेंस को वेरिफ़ाई करने के लिए बहुत अहम साबित हुई.
सरकार ने बदल डाला इस्तीफे देने का नियम, डायरेक्टर के पावर सीज!
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मेमोरेंडम में यह चिंता जताई गई है: “हाल ही में देखा गया है कि ग्रुप ‘A’ के साइंटिफिक/टेक्निकल कर्मचारियों—जिनमें प्रतिष्ठित गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों/प्रोजेक्ट्स से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं, की ओर से वॉलंटरी रिटायरमेंट और इस्तीफे की कई मांगें आई हैं, जिससे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन पर गंभीर असर पड़ रहा है.”
इसी कारण DoS की ओर से जारी मेमोरेंडम में इस पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि “हाल ही में देखा गया है कि ग्रुप ‘A’ के साइंटिफिक/टेक्निकल कर्मचारियों, जिनमें प्रतिष्ठित गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों/प्रोजेक्ट्स से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं, की ओर से वॉलंटरी रिटायरमेंट और इस्तीफे की कई मांगें आई हैं, जिससे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन पर गंभीर असर पड़ रहा है.”
अब क्या हुआ है, क्या बदल गया है?
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DoS की ओर से जारी मेमोरेंम के अनुसार अब डायरेक्टरों की शक्तियां बदली गई हैं. इसके बाद अब किसी के लिए इस्तीफा, ऐच्छिक सेवानृविति, आदि पर रोक लगा दी गई है. डायरेक्टर के पास से पावर वापस ले लिया गया है.
1. अब गगनयान और दूसरे अहम मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफ़े और स्वैच्छिक रिटायरमेंट (VRS) के अनुरोधों को "आमतौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता".
2. सेंटर डायरेक्टरों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे अनुरोध तब तक स्वीकार न करें जब तक कि वे प्रोजेक्ट पूरे न हो जाएं.
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3. ऐसे सभी मामलों को डायरेक्टर की सिफारिशों के साथ अंतिम निर्णय के लिए DoS को भेजा जाएगा, वहां से फैसला होगा.
4. 2020 में इस्तीफों और ऐसे आवेदनों को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इसके तहत ISRO सेंटर डायरेक्टरों और यूनिट प्रमुखों को ग्रुप A के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों (साइंटिस्ट/इंजीनियर-SG लेवल तक) के स्वैच्छिक रिटायरमेंट और इस्तीफ़े के अनुरोध स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था.
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5. कुल मिलाकर देखें तो गगनयान और दूसरे बड़े मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए अब यह अधिकार असल में वापस ले लिया गया है.