‘जो टिकट या पद की इच्छा रखते हैं RSS से दूर रहें’ संघ पर नैरेटिव गढ़ने वालों को मोहन भागवत का जवाब
मोहन भागवत RSS के 100 साल पूरे होने पर भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में शामिल हुए. यहां उन्होंने RSS की अवधारणा को और क्लियर किया और साफ किया कि संघ का BJP पर कोई कंट्रोल नहीं है.
File Photo/Social Media
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RSS राजनीति का रास्ता है ये मानने वालों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जवाब दिया है. उन्होंने साफ किया कि BJP या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से RSS को समझना गलत है. सभी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ किसी को कंट्रोल नहीं करता. मोहन भागवत RSS के 100 साल पूरे होने पर भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में शामिल हुए. यहां उन्होंने RSS की अवधारणा को और क्लियर किया.
दरअसल, उनका इशारा BJP की ओर था. उन्होंने कहा, संघ का मकसद सत्ता, टिकट या चुनाव नहीं, बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है.
‘जो राजनीति में टिकट या पद की इच्छा रखते हैं, उन्हें संघ की शाखाओं से दूरी रखनी चाहिए. वही जुड़ें जिनका उद्देश्य समाज सेवा और आत्म अनुशासन हो. सत्ता का मोह समाज को कमजोर करता है. समाज को मजबूत बनाना संघ का लक्ष्य है.’
‘हिंदू पहचान से एक हैं हम’
भागवत ने कहा कि हम वर्दी पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और लाठी का अभ्यास करते हैं. ऐसे में अगर कोई सोचता है कि यह एक पैरा मिलिट्री फोर्स है तो यह एक गलती होगी. हमारे मत-पंथ, संप्रदाय, भाषा और जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है. हमारी संस्कृति एक है, धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान हैं.
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, समाज में चार तरह के हिंदू हैं. कुछ गर्व से पहचान बताते हैं, कुछ संकोच करते हैं और कुछ भूल ही जाते हैं. संघ का लक्ष्य इन सभी को जोड़ना और जागृत करना है जहां हिंदू समाज बिखरा है अशांति बढ़ती है.
‘संघ को समझने की जरूरत’
मोहन भागवत ने कहा कि संघ के विरोधी और समर्थक दोनों ही इसके बारे में गलत नैरेटिव गढ़ते हैं. उन्होंने बताया, संघ की असली पहचान समाज निर्माण से है और इसी वास्तविक स्वरूप को लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसे संवाद कार्यक्रम किए जा रहे हैं.
मोहन भागवत ने कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी के विरोध या प्रतिक्रिया में शुरू नहीं हुआ. संघ की किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं है. इसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और देश के अनेक महापुरुषों से संवाद के बाद उन्होंने समाज संगठन की जरूरत महसूस की.
मोहन भागवत ने GenZ को दिया बड़ा संदेश
RSS प्रमुख ने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया. उन्होंने कहा, जेन-जी और युवाओं को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है. भागवत ने चीन से सीखने की नसीहत भी दी. उन्होंने कहा, वहां की पीढ़ी को बचपन से राष्ट्रीय दृष्टि सिखाई जाती है, भारत को भी अपनी पीढ़ी को संस्कार और इतिहास से जोड़ना होगा. समाज में फैशन और उपभोक्तावाद की अंधी नकल बढ़ रही है. घर में विवेकानंद का चित्र होगा या किसी पॉप स्टार का, यह समाज की दिशा तय करता है. फास्ट फूड की संस्कृति पर भी उन्होंने संयम की सलाह दी और कहा कि परिवार को साथ बैठकर भोजन करने की आदत लौटानी होगी.
इसके साथ-साथ मोहन भागवत ने टैरिफ पर भारत के स्टैंड की तारीफ की. उन्होंने कहा, भारत को स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए. अगर किसी विदेशी वस्तु की जरूरत पड़े भी, तो वह भारत की शर्तों पर हो. भारत टैरिफ से डरने वाला देश नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की क्षमता रखता है.
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