माघ मेले में संस्कृति-संगीत का संगम, UP सरकार के ‘कला संगम’ कार्यक्रम की हुई शुरुआत, 120 कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
प्रयागराज माघ मेले में ‘कला संगम’ के तहत लोक और शास्त्रीय कला की प्रस्तुतियां शुरू हो गई हैं. पहले दिन लोकगीत, भजन, शंख वादन, शास्त्रीय गायन और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने संगम तट को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया.
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित पावन संगम तट पर आयोजित माघ मेला केवल आस्था और स्नान का पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं का जीवंत उत्सव भी है. इसी भावना को साकार करते हुए माघ मेला क्षेत्र में ‘कला संगम’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शनिवार से भव्य शुभारंभ हो गया. उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्रीय और लोक संगीत, नृत्य और गायन की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है, जिसने पूरे मेला क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया है.
लोक कला की प्रस्तुतियों से गुलजार हुआ माघ मेला
प्रयागराज के संगम तट पर शुरू हुए माघ मेले में भारतीय संस्कृति और कलाओं का भी संगम हो रहा है. मेला क्षेत्र के परेड ग्राउंड में रविवार से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की शुरुआत हो गई है. कार्यक्रम के पहले दिन का प्रथम कार्यक्रम उदय चन्द्र परदेशी एवं टीम द्वारा देवी लोकगीत की प्रस्तुति से हुआ. लोक गायिका मालिनी अवस्थी के भजनों की प्रस्तुति से श्रोता भाव विभोर हो गए. कार्यक्रम में वाराणसी से आए राम जनम की टीम का शंख वादन ने भी लोगों को रोमांचित किया. संगीता मिश्रा ने लोक गायन में अपनी प्रस्तुति दी तो वहीं लखनऊ से आए वरुण मिश्रा की शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति का भी श्रोताओं ने रसास्वादन किया. लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्यों का भी पहले दिन संगम देखने को मिला. कीर्ति श्रीवास्तव के लोक नृत्य डेढ़इया और नीता जोशी के कथक नृत्य की जबरदस्त जुगलबंदी देखने को मिली. कार्यक्रम का संचालन आभा मधुर ने किया.

120 से अधिक लोक और शास्त्रीय कलाकार देंगे प्रस्तुति
कला संगम के पहले दिन दिन कुल 6 प्रस्तुतियां हुई. माघ मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है कि मेला क्षेत्र में 4 जनवरी से 30 जनवरी तक इनकी प्रस्तुतियां होंगे. इस आयोजन में 120 से अधिक लोक एवं शास्त्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. इस 20 दिवसीय आयोजन को उत्तर प्रदेश का संस्कृति विभाग आयोजित कर रहा है.
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बताते चलें कि माघ मेला क्षेत्र में आयोजित ‘कला संगम’ कार्यक्रम आस्था के इस महापर्व को सांस्कृतिक गरिमा से जोड़ रहा है. शास्त्रीय और लोक कलाओं की निरंतर प्रस्तुतियों से संगम तट न सिर्फ श्रद्धा, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान का साक्षी बन रहा है.
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