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'कट्टरपंथियों पर लगाम लगाओ...', राम प्रतिमा निर्माण रुका तो भारत हुआ सख्त, तारिक सरकार को सुनाई खरी-खरी

बांग्लादेश के गाइबांधा में भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगाए जाने के बाद हिंदू समुदाय में आक्रोश फैल गया है. इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जबकि भारत ने भी बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कट्टरपंथी तत्वों पर कार्रवाई की मांग की है

Image Source: X/ IANS/X/@tariquebd78 / Videograb
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बांग्लादेश में एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. गाइबांधा जिले में भगवान राम की 81 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण कार्य पर रोक लगाए जाने के बाद वहां का हिंदू समुदाय सड़कों पर उतर आया है. इस फैसले को लेकर न केवल स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हुआ है, बल्कि भारत ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए बांग्लादेश सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है.

दरअसल, तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि देश में बढ़ते इस्लामिक कट्टरपंथ पर नियंत्रण लगाया जाएगा और सभी समुदायों को समान अधिकार मिलेंगे. हालांकि हाल की घटनाएं कुछ अलग ही तस्वीर पेश करती दिखाई दे रही हैं. मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF) का आरोप है कि भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण पर रोक इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लगाई गई है.

12 जून को रोक दिया गया निर्माण कार्य

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जानकारी के अनुसार, जैसे ही मंदिर परिसर में विशाल प्रतिमा निर्माण की योजना सार्वजनिक हुई, कुछ स्थानीय इस्लामिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. विरोध के दौरान रैलियां निकाली गईं, प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं और प्रशासन को शिकायत पत्र सौंपे गए. बढ़ते तनाव और संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 12 जून को निर्माण कार्य रोकने का फैसला लिया.

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हिंदू समुदाय में बढ़ा आक्रोश

इस निर्णय के बाद हिंदू समुदाय में भारी नाराजगी देखने को मिली. लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और इसे धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला बताया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि किसी समुदाय को अपने धार्मिक प्रतीकों और आस्था के केंद्रों का निर्माण करने की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा

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मानवाधिकार संगठन ने उठाए सवाल

मानवाधिकार संगठन JMBF ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. संगठन का कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को बिना किसी दबाव के तथ्य सामने लाने चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की भी नजर बनी हुई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार कट्टरपंथी तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई करेगी और हिंदू समेत सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.


गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं. ऐसे में भगवान राम की प्रतिमा निर्माण पर रोक का मामला एक बार फिर धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बहस का केंद्र बन गया है. अब सभी की निगाहें बांग्लादेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.

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