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ममता बनर्जी की TMC पर बागियों का कब्जा, बागी गुट को मिली मान्यता, ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया

ममता बनर्जी की TMC में आखिरकार बड़ी फूट पड़ ही गई. 60 विधायकों वाले गुट को विधानसभा में मान्यता दे दी गई है. इसके कर्ताधर्ता ऋतब्रत बनर्जी बने हैं, जिन्होंने सबसे पहले बगावत की थी. वो नेता प्रतिपक्ष बना दिए गए हैं. वहीं पूर्व सीएम ममता पार्टी प्रमुख बनी रहेंगी.

Image Source: IANS
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हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की खबर अब आधिकारिक हो गई है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से करीब 60 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी है.

ऋतब्रत बनर्जी को बनाया गया LOP

बुधवार को विधानसभा में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर इन 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे. इसमें दावा किया गया कि वे ही तृणमूल कांग्रेस के असली प्रतिनिधि हैं. इस प्रस्ताव में हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नामित किया गया है.

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इसी प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष का उप नेता नामित किया गया है. इनमें उत्तरी कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से संदीपान साहा, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर से शिउली साहा और दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा से जावेद अहमद खान शामिल हैं.

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रघुनाथगंज से तृणमूल कांग्रेस के अनुभवी विधायक अखरुज़्ज़मान को इस प्रस्ताव में विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के नए गुट का मुख्य सचेतक नामित किया गया है. हालांकि इस प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी की ‘सुप्रीमो’ यानी पार्टी अध्यक्ष के रूप में ही दर्शाया गया है.

एक-एक कर विधानसभा पहुंचे बागी विधायक

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जिन 60 विधायकों के हस्ताक्षर इस प्रस्ताव पर थे, वे सभी सुबह से एक-एक करके विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे. इसके बाद बागी विधायकों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पांच सीटों के लिए पांच नामों का अनुमोदन किया गया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक स्पीकर के कक्ष में गए और प्रस्ताव प्रस्तुत किया. स्पीकर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

शोभनदेव चट्टोपाध्याय अब नहीं रहे नेता प्रतिपक्ष

पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के कार्यालय को एक पत्र भेजा था. इसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी), नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष की दो उप नेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था.

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फर्जी हस्ताक्षर वाले मामले में फंसे अभिषेक बनर्जी

हालांकि, स्पीकर ने जोर देकर कहा कि जिस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के हस्ताक्षर हैं और जिसमें विधानसभा की सीटों के लिए चार नामों का समर्थन किया गया है, उसे अभिषेक बनर्जी के पत्र के साथ ही जमा किया जाना चाहिए. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के हस्ताक्षरों वाला प्रस्ताव स्पीकर के कार्यालय में जमा कर दिया गया, लेकिन इसके बाद स्थिति में नाटकीय मोड़ आ गया, जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने पार्टी के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की ओर इशारा किया. इन दोनों को इसी हफ्ते की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था.

TMC में नतीजे के बाद से ही शुरू हुई बगावत

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इसके तुरंत बाद विधानसभा सचिवालय ने जांच का मामला सीआईडी को सौंप दिया, जिसने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए दो बार तलब किया. इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत तेज होने लगी, जिसने बुधवार को एक नया गुट बनने के साथ अपना अंतिम रूप ले लिया. इस गुट ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का असली प्रतिनिधि होने का दावा किया है.

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जिस समय यह रिपोर्ट फाइल की गई थी, उस समय ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस के किसी अन्य नेता अथवा निर्वाचित प्रतिनिधि की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी, जो अब भी बुआ और भतीजे के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं.

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