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कोलकाता एयरपोर्ट पर मौजूद बांकरा मस्जिद में अब नहीं पढ़ी जाएगी नमाज! विरोध के बावजूद फैसला 'लागू'

बंगाल में रनवे विस्तार के लिए कोलकाता एयरपोर्ट से बांकरा मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने का काम शुरू हो गया है. बांकरा को लेकर एंट्री पास बंद होने के बाद आखिरी जुम्मे के दिन भी नमाज नहीं पढ़ी गई. वहीं काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने के ऐलान से कमेटी बीते दिन पीछे हट गया.

Representational Image/ Source: IANS
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बंगाल में सरकारी कई सालों की बातचीत के बाद, रनवे का विस्तार करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल (एनएससीबीआई) एयरपोर्ट इलाके से बांकरा मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सीएम सुवेंदु ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है.

आपको बता दें कि बीते शनिवार से ही एयरपोर्ट के रास्ते मस्जिद में जाने के लिए एंट्री पास बंद कर दिए गए हैं. मस्जिद के अंदर नमाज भी रोक दी गई थी. इसके बाद बीते दिन पहला जुमा था, जब इस मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ी गई. बांकड़ा कमेटी के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने मस्जिद में ही काली पट्टी पहनकर नमाज पढ़ने का ऐलान किया था. हालांकि उनकी धमकी काम नहीं आई. 

सुवेंदु सरकार ने किसी भी प्रदर्शन से निपटने के लिए पूरी तैयारी की थी. एयरपोर्ट गेट के पास कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बंगाल पुलिस, CRP, रैपिड एक्शन फोर्स, दंगा रोधी गाड़ियां, वाटर कैनन आदि कि तैनाती की गई थी. सरकार ने पहले ही कह रखा है कि इस मामले में एयरपोर्ट की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है और अपील की है कि इस घटना को लेकर कोई भड़काऊ बात न की जाए.

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राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि: सुवेंदु अधिकारी

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आपको बताएं कि इस मस्जिद को शिफ्ट किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बीते हफ्ते कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा को हर चीज पर प्राथमिकता दी जायेगी. हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि चीन और बांग्लादेश दोनों इसके काफी करीब हैं. ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से हवाई अड्डे के गेट बाहरी लोगों के लिए खुले नहीं छोड़े जा सकते.

वहीं पुलिस और सरकार के तेवर को देखते हुए बांकड़ा कमेटी के अध्यक्ष द्वारा मस्जिद में काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने का ऐलान वापस ले लिया गया. चौधरी ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था, नमाजियों से एकत्रित होने को कहा था. हालांकि प्रशासन की भी पूरी तैयारी थी. पुलिस ने मस्जिद के आसपास धारा 163 लगा दिया था.

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बांकरा में नमाज पढ़ने के फैसले से पीछे हटे सिद्दीकुल्ला चौधरी

कुल मिलाकर देखें तो कोलकाता एयरपोर्ट परिसर स्थित बांकड़ा मस्जिद (गौरीपुर जामा मस्जिद) में शुक्रवार को नमाज पढ़ने के अपने घोषित कार्यक्रम से बंगाल के पूर्व मंत्री और पश्चिम बंगाल जमीयत-ए-उलेमा हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी पीछे हट गए. उन्होंने इसके पीछे का कारण नहीं बताया. हालांकि कहा जा रहा है कि पुलिस की सख्ती और तैयारी के कारण उन्हें अपने फैसले से पीछे हटना पड़ा है. इसके अलावा बीते हफ्ते से मस्जिद में एंट्री पास बंद होने वाला फैसला खबर के मुताबिक आज से ये फैसला लागू हो गया है. 

'रथ यात्रा के लिए चार घंटा कोलकाता बंद क्यों?'

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मस्जिद में नमाज रोके जाने पर बांकड़ा मस्जिद कमेटे के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि "कल रथ यात्रा के लिए सड़क क्यों बंद की गई थी? इसका जवाब कौन देगा? क्या कोई कोर्ट का आदेश था? मैं यह इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि कोई कोर्ट का आदेश नहीं था. हमने पुलिस स्टेशन में एक पत्र दिया था और स्थानीय MLA और MP ने भी सिफारिशें की थीं, फिर भी कुछ नहीं हुआ. आप सिर्फ़ हमें ही सबक क्यों सिखाना चाहते हैं? अगर हमारे हिंदू भाइयों को अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है, तो मुसलमानों को भी अपने अधिकार मिलने चाहिए. कल रथ यात्रा के लिए कोलकाता का बड़ा हिस्सा लगभग चार घंटे तक बंद कर दिया और हमें खुशी है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ...अगर अस्थायी तौर पर नमाज पढ़ाते तो नाक नीचे हो जाता, दिल देख लिया सरकार मुसलमान विरोधी है.

राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि: सुवेंदु अधिकारी

आपको बताएं कि इस मस्जिद को शिफ्ट किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बीते हफ्ते कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा को हर चीज पर प्राथमिकता दी जायेगी. हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि चीन और बांग्लादेश दोनों इसके काफी करीब हैं. ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से हवाई अड्डे के गेट बाहरी लोगों के लिए खुले नहीं छोड़े जा सकते.

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क्या है बांकरा मस्जिद को लेकर बवाल?

136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद को 'बांकरा मस्जिद' के नाम से जाना जाता है. यह मस्जिद एयरपोर्ट के अंदर ही स्थित है. लंबे समय से मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने की बात चल रही है. दम दम एयरपोर्ट पर दो रनवे हैं; मुख्य (बड़ा) रनवे टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि दूसरा रनवे छोटा है. मस्जिद उस रनवे से थोड़ी दूरी पर स्थित है.

जानकारों का कहना है कि अगर मरम्मत के लिए पहला रनवे कुछ समय के लिए बंद किया जाता है तो बड़े विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग में दिक्कतें आएंगी. एयरपोर्ट अधिकारियों ने कहा कि मस्जिद से भी टेक-ऑफ और लैंडिंग करने वाले विमानों को खतरा है, और दूसरे रनवे को बड़ा करने का काम भी रुका हुआ है. कई दशकों से मस्जिद को हटाने पर चर्चा हो रही है, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर कोई पक्का फैसला नहीं हो पाया है.

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राज्य में सरकार बदलने के बाद, एनएससीबीआई एयरपोर्ट के अंदर से मस्जिद को हटाने के लिए कदम उठाए गए. एयरपोर्ट अधिकारियों और प्रशासनिक हलकों में बैठकें भी हुईं. उस जमीन से मस्जिद को हटाने की कोशिशें कई दिनों से चल रही थीं. आखिरकार शनिवार को यह प्रक्रिया शुरू हुई. उस मस्जिद की मौजूदगी के कारण एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठ रहे थे.

बीते शनिवार से ही एयरपोर्ट ने एयरपोर्ट गेट से एंट्री के लिए पास जारी करना बंद कर दिया है, और मस्जिद में नमाज भी रोक दी गई है. खबर है कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए पुलिस और सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए हैं.

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ममता-लेफ्ट सरकार फेल, सुवेंदु राज में हो गया फैसला!

नॉर्थ 24 परगना जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में स्थानीय विधायकों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों के साथ पहले ही एक बैठक हो चुकी है. एक स्पेशल टीम ने मस्जिद का मुआयना किया और एयरपोर्ट सुरक्षा कमेटी के साथ भी बैठक हुई. यह तय किया गया कि 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद के बारे में अंतिम फैसला ईद के बाद लिया जाएगा.

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मस्जिद कमेटी ने पहले कहा था कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से एयरपोर्ट को कोई नुकसान हो या सुरक्षा में कोई बाधा आए, और एयरपोर्ट अधिकारियों ने एयरपोर्ट के बाहर एक बड़ी मस्जिद बनाने का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे अभी जगह बदलने के बारे में कोई अंतिम फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं. बाद में, इस मामले में एक फैसला लिया गया और सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया.

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