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'फर्क नहीं पड़ता, 100 साल से झेल रहे ऐसे हमले...', संघ को लेकर प्रियंक खड़गे के सवाल के बीच मोहन भागवत की दो टूक
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे की संघ को लेकर लिखी गई चिट्ठी के बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने दो टूक कहा है कि कैसे और किस लिए ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं और उसका आधार क्या है.
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RSS और कर्नाटक सरकार के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को RSS प्रमुख मोहन भागवत को लेटर लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के सोर्स, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे हैं. इसके जवाब में मोहन भागवत ने सरकार के रुख को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि RSS को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है और पिछले 100 वर्षों में किसी भी सरकार ने इस तरह की मांग नहीं की है. हालांकि कहा जा रहा है कि खड़गे की चिट्ठी 15 जून को भेजी गई और डॉ. भागवत ने ये जवाब 13-14 जून को संभवत: दिया था.
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा कि "उन्हें इस पर जवाह देने की जरूरत नहीं है....बहुत सी ऐसी चीज़ें हो रही हैं जो रजिस्टर्ड नहीं हैं, और हम कोई गुप्त काम नहीं कर रहे हैं. हम सबके सामने काम कर रहे हैं. हम लोगों को बुलाते हैं और उन्हें संघ के बारे में बताते हैं. यह राजनीति है, और ऐसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं..."
'संघ को ऐसे दबाव की आदत है'
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डॉ. भागवत ने आगे कहा कि "अगर वो कुछ दिनों तक ऐसा नहीं बोलते हैं हमें लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है…में इसकी आदत है. संघ के बनने के 10-15 साल बाद ही हमें इन सब चीज़ों का सामना करना पड़ा था. हमें इसकी आदत है... हिंदू धर्म रजिस्टर्ड नहीं है. बहुत सी चीज़ें रजिस्टर्ड नहीं होतीं... सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया था, और वे प्रतिबंध एक बार कोर्ट के आदेश से और दूसरी बार सत्याग्रह के ज़रिए हटाए गए. तो सरकार जानती है कि RSS का अस्तित्व है. अगर उन्होंने RSS पर प्रतिबंध लगाया, तो इसका मतलब है कि उन्होंने इसके अस्तित्व को माना..."
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'संघ के कामकाज में रुकावट, लोगों के मन में शंका पैदा करने की कोशिश'
संघ के कामकाज में दखल का आरोप लगाते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि "वे एक तरफ़ तो संघ के काम में रुकावट डालना चाहते हैं और दूसरी तरफ़ लोगों के मन में शक पैदा करना चाहते हैं. लेकिन अब ऐसा मुमकिन नहीं है क्योंकि लोग हमें जानते हैं. वे कहते हैं कि हम गुप्त रूप से काम करते हैं. हमारे कार्यकर्ता सभी इलाकों में रहते हैं. लोग उन्हें रोज़ देखते हैं. हमारी शाखाएँ खुले मैदानों में लगती हैं. लोग उन्हें रोज़ देखते हैं. हमारे सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं..."
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#WATCH | Thrissur | Reacting to Karnataka Minister Priyank Kharge's statement, RSS Chief Mohan Bhagwat says, "I don't need to respond. There are so many unregistered things going on, and we are not secretive. We are working in the open. We are calling people and telling them… pic.twitter.com/3zDXPJVZp4
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 16, 2026
प्रियंक खड़गे ने पत्र लिखकर संघ से पूछे सवाल!
इससे पहले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देने के साथ ही साथ उन्होंने आरएसएस की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए थे.
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उन्होंने पूछा था कि आरएसएस देशभर में 60 हजार से अधिक शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों वाला एक विशाल संगठन होने का दावा करता है. ऐसे में उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संविधान के अनुरूप संचालन के सर्वोच्च मानकों का पालन करना चाहिए.
उन्होंने संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की 2025-26 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केवल कर्नाटक में ही आरएसएस की 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां संचालित होती हैं. इसके अलावा 2,194 समाजोत्सवों में करीब 19.61 लाख लोगों की भागीदारी और 562 पथ संचलनों में 2.21 लाख से अधिक गणवेशधारी स्वयंसेवकों के शामिल होने का दावा किया गया है.
VIDEO | Delhi: During a press conference, Karnataka Home Minister Priyank Kharge (@PriyankKharge) says, “Mohan Bhagwat said, 'Are we doing anything in secret? We are doing it openly in the name of the Sangh.' I am asking the very same thing. If it is being done in the name of the… pic.twitter.com/rXevfg0Ad1
— Press Trust of India (@PTI_News) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 16, 2026Advertisement
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प्रियंक खड़गे ने कहा कि इतनी व्यापक गतिविधियों वाले संगठन को निजी या अनौपचारिक संस्था नहीं माना जा सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यक्रम, पथ संचलन और जनसंपर्क गतिविधियां चलाने वाले संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोत, सार्वजनिक जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन स्पष्ट होना चाहिए.
संघ के पंजीकरण को लेकर उठाए सवाल
उन्होंने आरएसएस से अपने अधिकृत पदाधिकारियों को चर्चा के लिए भेजने का आग्रह करते हुए पूछा कि आखिर किस कानूनी आधार पर संगठन बिना औपचारिक पंजीकरण या "बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स" के रूप में पंजीकृत हुए बिना कार्य कर रहा है.
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प्रियंक खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संगठन, चाहे वह कितना भी पुराना, बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों से लेकर धार्मिक संस्थाओं, ट्रस्टों, एनजीओ, कंपनियों और अन्य संगठनों तक सभी को पंजीकरण, ऑडिट और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ती है; ऐसे में आरएसएस को भी समान मानकों का पालन करना चाहिए.