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‘चैन से नहीं रह सकते मियां मुसलमान’ घुसपैठियों को CM हिमंत ने फिर दी चेतावनी, ‘रिक्शा’ वाले बयान पर क्या कहा?

CM हिमंत ने दावा किया कि 'मियां' लोग अवैध बांग्लादेशी हैं और उन्हें असम में काम करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.

असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) इन दिनों अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. जिसमें उन्होंने असम में मियां मुसलमानों को परेशान करने की बात कही थी. अब CM हिमंत ने इस बयान पर सफाई दी है, लेकिन उनके लिए एक बड़ी चेतावनी भी जारी कर दी है. 

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि जब तक वह सत्ता में रहेंगे, मियां मुसलमानों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. CM हिमंत ने दावा किया कि 'मियां' लोग अवैध बांग्लादेशी हैं और उन्हें असम में काम करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए. 

अवैध बांग्लादेशियों को सीधी चेतावनी 

CM हिमंत ने एक बार फिर उन लोगों को चेताया जो अवैध रूप से असम में रह रहे हैं. उन्होंने ऐसे लोगों को अवैध बांग्लादेशी बताया और कहा कि उन्हें राज्य में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. CM हिमंत ने साफ कहा ‘अगर मैं असम में रहा, तो उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. वे यहां शांति से नहीं रह सकते. जब हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे, तभी वे राज्य छोड़ेंगे. 

असम CM ने इस दौरान मुसलमानों पर सत्राओं (वैष्णव शिक्षा केंद्रों) और जमीनों पर अतिक्रमण करने का आरोप भी लगाया. दावा किया कि प्रदेश में लव जिहाद और फर्टिलाइजर जिहाद जैसी एक्टिविटी हो रही हैं. दरअसल, असम में कुछ महीनों में ही चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले राज्य में ज्वलंत मुद्दों को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा एक्टिव हो गए हैं. 

'रिक्शा' वाले बयान पर दी सफाई 

बीते दिनों हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में मियां मुसलमानों को लेकर एक बयान दिया था. जिसकी आलोचना भी हुई थी. हालांकि अब उन्होंने इस बयान का संदर्भ (Context) समझाते हुए सफाई दी. दरअसल, CM हिमंत ने कहा था, अगर मियां मुसलमान रिक्शा चालक है और वो 5 रुपये मांगें, तो 4 रुपये ही दो. इस तरह के छोटे-छोटे काम से परेशानी होने पर ही वो राज्य छोड़ेंगे. 

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इस पर सफाई देते हुए CM हिमंत ने कहा, मैंने तो ये बात असल में उनके (मियां मुसलमानों) के भले के लिए कही थी. अगर कानून के हिसाब से देखें, तो वे यहां काम नहीं कर सकते. किसी देश के नागरिक अपनी ही जमीन पर काम कर सकते हैं. बांग्लादेश के लोग यहां कैसे काम कर सकते हैं? अगर वे मेरे अपने भले के लिए कही गई बात को स्वीकार नहीं कर सकते, तो मुझे उनके खिलाफ ही काम करना होगा.

‘मियां’ शब्द पर हो रहा विवाद

दरअसल, असम में मियां मुसलमानों को बांग्लादेशियों से जोड़ा जाता है. ये गैर बंगाली भाषी होते हैं जिन्हें बंगाली या असमिया नहीं माना जाता. पिछले कुछ साल में असम में ये शब्द काफी चर्चा में रहा. CM हिमंत ने मियां मुसलमानों का नाम लेते हुए निशाना साधा तो कई मुस्लिम संगठनों ने सवाल उठाए. इस शब्द को सभी मुसलमानों के अपमान से जोड़ा गया. इसे मुस्लिम विरोधी और बांटने वाला बताया गया. हालांकि CM हिमंत ने अपने इस बयान को अब एक्सप्लेन करते हुए बताया, उनका मतलब सीधे तौर पर अवैध प्रवाशियों से था न कि सभी मुसलमानों से. जहां बांग्लादेशियों के लिए कोई जगह नहीं. 

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